फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म्स पर राजनीतिक विज्ञापनों में पारदर्शिता लाने की पहल के रूप में 2018 में एड लाइब्रेरी लॉन्च की थी. 2016 के अमेरिकी चुनावों और कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैन्डल जैसे मुद्दों के उजागर होने बाद, इस लाइब्रेरी का उद्देश्य यूज़र्स को सामाजिक मुद्दों, चुनाव या राजनीति के अंतर्गत आने वाले विज्ञापनों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना था. हालांकि, कई वर्षों से हो रहे रीसर्च, मेटा की एड लाइब्रेरी में घटती पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े करती है. राजनीतिक पार्टियां और उनकी इकाइयां प्रॉक्सी पेजों के माध्यम से मेटा की पारदर्शी पॉलिसी को दरकिनार करके राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए इनकी खामियों का पूरा फायदा उठाते हैं. ऑल्ट न्यूज़ ने कई ऐसी रिपोर्ट्स पब्लिश की हैं जिससे पता चला है कि राजनीतिक पार्टियां विज्ञापन चलाते समय अपनी पहचान और इरादों को छिपाने के लिए प्रॉक्सी पेजों का उपयोग करती हैं. कई रिपोर्ट्स में ये सामने आया है कि राजनीतिक पार्टियां झूठी जानकारी फैलाने के लिए, दूसरी पार्टियों के नेताओं को टारगेट करने के लिए नस्लभेदी, नफरती भाषण और हत्या का महिमामंडन करने जैसे वाहियात किस्म के राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए ऐसे पेजों का उपयोग करती हैं जिनका मूल उद्देश्य होता है असली विज्ञापनदाता की पहचान को छिपाना. ये पेज मेटा एड लाइब्रेरी की पारदर्शिता की आवश्यकताओं से बचते हैं और एड लाइब्रेरी के समूचे उद्देश्य को निष्क्रिय करते हैं.

मेटा द्वारा इन विज्ञापनों पर निरीक्षण की कमी ने ऐसे पेजों को एड लाइब्रेरी में मौजूद खामियों का फायदा उठाने की खुली छूट दे दी है जिससे वो उचित खुलासे के बिना राजनीतिक विज्ञापन चलाने में सक्षम हो गए हैं. मेटा की ओर से जवाबदेही की यह कमी पारदर्शिता के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता और अपने व्यावसायिक लाभ के लिए सिस्टम में हेरफेर करने की कोशिश जैसी उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने की इच्छा पर सवाल खड़े करती है.

भारत में 2024 के लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं. चुनाव के दौरान राजनीतिक दल मतदाताओं तक पहुंचने के लिए हर माध्यम का उपयोग कर रही थीं. इन माध्यमों में सोशल मीडिया विशेष रूप से शामिल है क्यूंकि ये पब्लिक नैरेटिव को आकार देने और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हालांकि, हाल की जांच में हमने पाया है कि फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल राजनीतिक पार्टियों द्वारा बिना पहचान वाले प्रॉक्सी पेज के ज़रिए अपना प्रॉपगेंडा चलाने और राजनीतिक प्रतिद्वन्द्वियों पर भद्दे और भड़काऊ टिपण्णी, विज्ञापन के ज़रिए करने के लिए कर रहे हैं.

हमारी रिसर्च 14 फ़ेसबुक पेजों के एक नेटवर्क पर केंद्रित है जिसके द्वारा चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर खर्च करके राजनीतिक विज्ञापन चलाए गए थे. इन पेजों ने राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा की पॉलिसी का उल्लंघन किया और फ़ेसबुक ने इसे खुले तौर पर नज़रअंदाज़ करने का काम किया. फ़ेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए, विज्ञापनदाताओं को एक डिसक्लेमर अप्रूव करवाना होता है जो यह खुलासा करता है कि राजनीतिक विज्ञापनों पर होने वाले खर्च का वित्तपोषण कौन कर रहा है. यह जानकारी पारदर्शिता के लिहाज से मेटा एड लाइब्रेरी में 7 साल के लिए सार्वजनिक तौर पर संग्रहीत की जाती है.

क्या होता है डिसक्लेमर?

संक्षेप में, फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर सामाजिक मुद्दों, चुनाव या राजनीति से संबंधित विज्ञापन चलाने के लिए डिसक्लेमर की आवश्यकता होती है जिसमें मेटा की पॉलिसी ने मुताबिक, पारदर्शिता के लिहाज से ऐसे विज्ञापन चलाने के लिए ज़िम्मेदार संगठन या व्यक्ति के नाम का सटीक रूप से बताया जाना ज़रूरी होता है. बिजनेस हेल्प सेंटर पेज पर मेटा ने डिसक्लेमर रिव्यू करने के प्रोसेस के बारे में बताया है जिसके मुताबिक, डिसक्लेमर में विज्ञापन के लिए भुगतान करने वाली संस्था का नाम सटीक, पूरा और सच्चा होना चाहिए.

 

मेटा बिजनेस हेल्प सेंटर पर मौजूद जानकारी के मुताबिक़, फ़ेसबुक या इंस्टाग्राम पर राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए डिसक्लेमर को अप्रूव करवाने के लिए विभिन्न देशों के लिए मेटा द्वारा कन्ट्री-स्पेसिफिक पॉलिसी है. फ़ेसबुक हेल्प सेंटर पेज पर मौजूद जानकारी कहती है कि वर्तमान में मेटा, भारत में डिसक्लेमर बनाने के लिए दो विकल्प प्रदान करता है: पहला विकल्प है संगठन का नाम (Organisation Name) और दूसरा विकल्प है पेज का नाम (Page Name). हालांकि, अगर किसी पेज को अपने नाम (Page Name) विकल्प के ज़रिए डिसक्लेमर अप्रूव करवाना है तो उसके लिए शर्त ये है कि वह पेज कम से कम 30 दिन पुराना हो.

ऑल्ट न्यूज़ की जांच में हमें इन पेजों द्वारा एक बेहद ज़रूरी उल्लंघन का पता चला जिसमें फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा द्वारा राजनीतिक विज्ञापन चलाने वाले पेजों के डिसक्लेमर को बिना उचित जानकारी का खुलासा किये हुए अप्रूव कर दिया गया. परिणामस्वरूप उस डिसक्लेमर का इस्तेमाल कई नए प्रॉक्सी पेजों के एक नेटवर्क ने राजनीतिक विज्ञापन चलाने के बाइपास के रूप में किया. जबतक नए पेज खुद 30 दिन पुराने होकर ‘पेज नाम’ आधारित डिसक्लेमर बनाने के लिए योग्य हो जाते थे, तबतक इस नेटवर्क के प्रॉक्सी पेजों द्वारा इस डिसक्लेमर का इस्तेमाल किया गया. कुछ मामलों में इन पेजों ने बिना उचित खुलासा किये उसी दिन राजनीतिक विज्ञापन चलाना शुरू कर दिया गया जिस दिन उस पेज को बनाया गया था. इन पेजों द्वारा धड़ल्ले से विपक्षी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को टारगेट करते हुए विज्ञापन चलाए गए. साथ ही हत्या का महिमामंडन करते हुए भी राजनीतिक विज्ञापन चलाए गए. ऑल्ट न्यूज़ ने पहले भी ऐसे पेजों के नेटवर्क का सत्ताधारी पार्टी भाजपा से जुड़े होने पर जांच रिपोर्ट पब्लिश की है.

Ulta Chashma – उल्टा चस्मा

‘उल्टा चश्मा’ पेज का डिसक्लेमर मेटा की नीतियों का उल्लंघन करता है. ये पेज मेटा की उस पॉलिसी का उल्लंघन करता है जिसमें मेटा ने कहा है कि डिसक्लेमर में विज्ञापन चलाने के लिए ज़िम्मेदार संस्था या व्यक्ति का नाम सटीक रूप से दर्शाया जाना चाहिए. चूंकि ना तो इस पेज पर और ना ही डिसक्लेमर में मौजूद जानकारी में ‘उल्टा चश्मा’ के किसी संगठन या संस्था होने का ज़िक्र है. इसकी वेबसाइट पर या मेटा की एड लाइब्रेरी में भी किसी संगठन या संस्था होने का कोई ज़िक्र नहीं है. डिसक्लेमर में उचित जानकारी का अभाव साफ तौर पर ट्रांसपेरेंसी के दायरे को ख़त्म कर देता है. ‘उल्टा चश्मा’ की वेबसाइट के डोमेन को मेटा द्वारा डिसक्लेमर अप्रूव करने से मात्र 3 दिन पहले (7 नवंबर 2023) को खरीदा गया था. डिसक्लेमर में मौजूद मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ़ है. ‘उल्टा चश्मा’ पेज के डिसक्लेमर को मेटा द्वारा अप्रूव होने से मात्र 4 दिन पहले बनाया गया था. इस नेटवर्क के पहले पेज ‘उल्टा चश्मा’ को 6 नवंबर 2023 को बनाया गया और 10 नवंबर 2023 को इस पेज के डिसक्लेमर को मेटा द्वारा अप्रूव किया गया और उसी दिन से इस पेज ने राजनीतिक विज्ञापन चलाना शुरू कर दिया.

यहाँ कुछ पेजों की लिस्ट दी गई है जिसमें देखा जा सकता है कि इन पेजों के बनने के 30 दिन के अंदर ही इनपर राजनीतिक विज्ञापन चलाए गए. आगे, दिए गए टेबल में इन पेजों के बनने, पहले डिसक्लेमर और उसके अप्रूव होने की तारीख, पहला विज्ञापन चलने की तारीख और डिसक्लेमर में हुए बदलाव और उसकी तारीख को दिखाया गया है. इन डिटेल्स में एक तरह का पैटर्न दिखाई देता है कि नए पेजों ने 30 दिन पुराना होने से पहले विज्ञापन चलाने के लिए ‘उल्टा चश्मा’ के डिसक्लेमर का इस्तेमाल किया. (मेटा की पॉलिसी के मुताबिक, 30 दिन से कम पुराने पेजों को ‘पेज नाम’ से डिसक्लेमर बनाने की अनुमति नहीं होती) मेटा पॉलिसी के मुताबिक, 30 दिन बाद कोई भी पेज अपने पेज के नाम से डिसक्लेमर बनाने के लिए योग्य हो जाते हैं, तब इन पेजों ने अपने नाम से डिसक्लेमर बना लिया और इस तरह मेटा की पॉलिसी को बाइपास किया गया. इस लिस्ट में मौजूद ज़्यादातर पेज पर भी ऑल्ट न्यूज़ ने रिपोर्ट किया है जिसके द्वारा भाजपा का प्रचार-प्रसार और विपक्षी नेताओं को विज्ञापन के ज़रिए टारगेट किया जाता है.

Page Name Creation Date First Disclaimer Date First Ad Date New Disclaimer Disclaimer Change
Ulta Chashma – उल्टा चस्मा 6/11/23 Ulta Chashmaa 10/11/23 10/11/23 NA NA
Amaar Sonar Bangla – অমর সোনার বাংলা 7/3/24 Ulta Chashmaa 12/3/24 13/3/24 Amaar Sonar Bangla – অমর সোনার বাংলা 11/4/24
Political X-Ray 7/12/23 Ulta Chashmaa 14/12/23 14/12/24 Political X Ray 5/2/24
MemeXpress 12/12/23 Ulta Chashmaa 12/12/23 12/12/23 Memes Xpress 5/2/24
Sidha Chashma – सीधा चश्मा 5/3/24 Sidha Chashma – सीधा चश्मा 12/3/24 17/3/24 Sidha Chashma – सीधा चश्मा 22/4/24
Tamilakam – தமிழகம் 9/2/24 Ulta Chashmaa 10/2/24 10/2/24 Tamilakam – தமிழகம் 26/3/24
Kannada Sangamam – ಕನ್ನಡ ಸಂಗಮ 9/2/24 Ulta Chashmaa 10/2/24 10/2/24 Kannada Sangamam – ಕನ್ನಡ ಸಂಗಮ 27/3/24
Aamcha Maharashtra – आमचा महाराष्ट्र 22/3/24 Ulta Chashmaa 11/4/24 18/4/24 NA NA
Telangana Central – తెలంగాణ సెంట్రల్ 9/2/24 Ulta Chashmaa 10/2/24 7/3/24 Telangana Central – తెలంగాణ సెంట్రల్ 27/3/24
Malabar Central – മലബാർ സെൻട്രൽ 9/2/24 Ulta Chashmaa 10/2/24 10/2/24 Malabar Central – മലബാർ സെൻട്രൽ 27/3/24
Sonar Bangla – সোনার বাংলা 29/2/24 Ulta Chashmaa 29/2/24 5/3/24 NA NA
Sidha Chashama 2.0 – सीधा चश्मा 2.0 7/3/24 Ulta Chashmaa 10/3/24 10/3/24 NA NA
Meme Hub 4/4/24 Memes Xpress 4/4/24 5/4/24 NA NA
Siyasat Di Baat – ਸਿਆਸਤ ਦੀ ਬਾਤ 9/5/24 Ulta Chashmaa 16/5/24 16/5/24 NA NA

ऊपर लिस्ट में दिए गए सभी पेज ‘Ulta Chashma’ नेटवर्क से जुड़े हैं. इनके डिसक्लेमर में ‘Ulta Chashma’ देखा जा सकता है. हालांकि, इनमें 2 ऐसे पेज हैं (‘Sidha Chashma’ और ‘Meme Hub’) जिनके डिसक्लेमर में ‘उल्टा चश्मा’ नहीं लिखा है. एक में डिसक्लेमर में ‘सीधा चश्मा’ और दूसरे में ‘मीम एक्स्प्रेस’ लिखा है. लेकिन जांच करने पर पता चलता है कि ‘Sidha Chashma – सीधा चश्मा’ पेज के पुराने डिसक्लेमर के डिटेल्स में ‘Ulta Chashma’ का ईमेल और मोबाइल नंबर मौजूद है. वहीं दूसरा पेज ‘Meme Hub’ जिसके डिसक्लेमर में ‘उल्टा चश्मा’ नहीं लिखा है, इसकी जांच करने पर पता चलता है कि ये पेज ‘Ulta Chashma’ नेटवर्क के ‘Meme Xpress’ नाम के पेज से कनेक्टेड है और इसके डिसक्लेमर में दी गई डिटेल्स, MemeXpress के नए डिसक्लेमर से मेल खाती है.

कई पेजों द्वारा एक ही डिसक्लेमर के इस्तेमाल करने का पैटर्न

ये लूपहोल मेटा की पॉलिसी में मौजूद है जो पेज ऐड्मिन को उनके द्वारा चलाए जा रहे अन्य पेजों पर पहले से अप्रूव हो चुके डिसक्लेमर को नए पेजों के साथ शेयर करने की अनुमति देता है. प्रॉक्सी पेज नेटवर्क के नए पेज इस फीचर का लाभ उठाते हैं और बिना उचित खुलासा किये, पहले 30 दिन अप्रूव हो चुके किसी दूसरे डिसक्लेमर का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक विज्ञापन चलाते हैं. जब वे मेटा पॉलिसी के मुताबिक, 30 दिन के बाद ‘पेज नाम’ से डिसक्लेमर बनाने के लिए योग्य हो जाते हैं, तब वे अपने पेज के नाम से डिसक्लेमर बना लेते हैं. ये मेटा की एडवर्टाइजिंग सिस्टम में एक बड़ा लूपहोल है. ‘उल्टा चश्मा’ नाम का कोई संगठन ही नहीं है और न ही इसकी वेबसाइट पर इससे जुड़ी कोई जानकारी मौजूद है. भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट पर भी ऐसे किसी कंपनी का नाम नहीं है, ना ही इसके संगठन या संस्था होने की कोई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है. सबसे पहले मेटा ने ‘उल्टा चश्मा’ के डिसक्लेमर को बिना उचित जानकारी के अप्रूव किया और बाद में इसी डिसक्लेमर के ज़रिए प्रॉक्सी पेजों ने पहले तो मेटा की पॉलिसी को बाइपास किया गया और पेज के 30 दिन पुराना होने से पहले राजनीतिक विज्ञापन भी चलाया.

डिसक्लेमर को शेयर करने वाली सुविधा, 30 दिन से कम पुराने पेजों के लिए राजनीतिक विज्ञापन चलाने वाले डिसक्लेमर (पेज के नाम के जरिए अप्रूवड) को प्रतिबंधित करने वाली पॉलिसी को दरकिनार कर देता है. हालांकि, इसे पेज एडमिन के लिए एक सुविधा के रूप में देखा जा सकता है लेकिन ये पारदर्शिता पर सवाल उठाता है. यदि कोई पेज अन्य पेजों के साथ अपना डिसक्लेमर शेयर कर रहा है तो मेटा एड लाइब्रेरी, उस डिसक्लेमर का उपयोग करने वाले पेजों के बीच कनेक्शन स्थापित करने वाला स्पष्ट डेटाबेस प्रदान नहीं करती है. पारदर्शिता की यह कमी डिसक्लेमर के दुरुपयोग को बढ़ावा देती है. और यूज़र्स के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि किसी विज्ञापन के पीछे वास्तव में कौन है जो कि डिसक्लेमर का बेसिक उद्देश्य है.

इस नेटवर्क से जुड़े नए पेज पहले से अप्रूव हो चुके डिसक्लेमर का फायदा उठाते हैं जिससे प्रभावी ढंग से पेज के नाम पर डिसक्लेमर वेरीफाई करवाने के 30 दिन संबंधी नियम को दरकिनार करते हैं. उदाहरण के लिए, “MemeXpress” नाम के फ़ेसबुक पेज को 12 दिसंबर 2023 को बनाया गया और 12 दिसंबर को ही इस पेज ने ‘उल्टा चश्मा’ के डिसक्लेमर का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक विज्ञापन चलाना शुरू कर दिया. यानी, ये पेज 30 दिनों से पहले डिस्क्लेमर को अप्रूव करवाने में कामयाब रहा और 30 दिन के अंदर राजनीतिक विज्ञापन पर ₹835053 (8 लाख 35 हजार 53 रूपये) खर्च किया जिसपर 29302000 (2 करोड़ 93 लाख 2 हजार) से ज्यादा व्यूज़ आए.

अगर इस दृष्टिकोण से इन पेजों का एनालिसिस किया जाए तो हमें इस नेटवर्क के पेजों में एक पैटर्न दिखा है जिसके ज़रिए कई पेजों द्वारा मेटा के लूपहोल का इस्तेमाल करते हुए 30 दिन से पहले विज्ञापन चलाए गए. इसका क्रमबद्ध डिटेल कुछ इस प्रकार है:

  1. नया पेज – ‘Ulta Chashmaa’ नाम से एक पेज 6 नवंबर, 2023 को बनाया गया था.
  2. उल्लंघन या मेटा द्वारा नज़रअंदाज़ – इस पेज के डिसक्लेमर में उचित खुलासा न होने के बावजूद, इसके डिसक्लेमर को 10 नवंबर 2023 को मेटा द्वारा अप्रूव किया गया.
  3. विज्ञापन – डिसक्लेमर वेरीफाई होने के बाद इस पेज ने तुरंत 10 नवंबर 2023 को ही फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर विज्ञापन चलाना शुरू कर दिया. मेटा एड लाइब्रेरी में मौजूद डेटा के मुताबिक, इस पेज ने अबतक कुल ₹25716645 (2 करोड़ 57 लाख 16 हजार 645 रूपये) खर्च करके 1200 से ज़्यादा विज्ञापन चलाए जिसपर 697530000 (69 करोड़ 75 लाख 30 हजार) से ज्यादा व्यूज़ हैं.
  4. कनेक्टेड पेजों का नेटवर्क – इसके बाद इस नेटवर्क में कई अन्य नए पेज बनाए गए जिनमें अधिकतर पेजों द्वारा “Ulta Chashmaa” के अप्रूव किए गए डिसक्लेमर का उपयोग करके 30 दिन से कम पुराने कई पेजों द्वारा राजनीतिक विज्ञापन चलाया गया. उदाहरण के लिए, ऊपर दिए गए टेबल में कुछ पेजों के डिटेल्स हैं जिनके डिसक्लेमर में “Ulta Chashmaa” लिखा था. इन सभी पेजों द्वारा अबतक कुल ₹104558946 (10 करोड़ 45 लाख 58 हजार 946 रूपये) से ज़्यादा खर्च करके विज्ञापन चलाए गए जिसपर 2548241000 (254 करोड़ 82 लाख 41 हजार) से ज्यादा व्यूज़ हैं.
  1. 30 दिन बाद डिसक्लेमर में बदलाव – 30 दिनों के बाद, जब ये पेज खुद के डिसक्लेमर को वेरीफाई करवाने के लिए मेटा की पॉलिसी के तहत योग्य हो गए, तब इनके द्वारा अपने पेज के नाम का उपयोग करके एक नए डिसक्लेमर के लिए अप्लाई किया गया, जो मेटा द्वारा अप्रूव हो गया.

डिसक्लेमर में खुलासा करने से बचने के लिए इस्तेमाल की गई परतें

इसका एक उदाहरण यह है कि पहला ‘Ulta Chashmaa’ डिसक्लेमर 10 नवंबर 2023 को ‘Ulta Chashma – उल्टा चस्मा’ नाम के पेज द्वारा बनाया गया था. इस नेटवर्क के अन्य पेजों की तरह, 12 दिसंबर 2023 को बनाए गए ‘MemeXpress’ नाम के पेज ने भी शुरुआत में इस डिसक्लेमर का इस्तेमाल किया, क्यूंकि मेटा की पॉलिसी के मुताबिक, नए पेज बनने के 30 दिनों के अंदर ‘पेज नाम’ के आधार पर डिसक्लेमर बनाने की अनुमति नहीं होती है. इस पेज के बनने के दिन से ही ‘Ulta Chashmaa’ डिसक्लेमर का इस्तेमाल कर राजनीतिक विज्ञापन चलाना शुरू कर दिया था. फिर इस पेज ने 5 फरवरी 2024 को अपने नाम से ‘Memes Xpress’ डिसक्लेमर बनाया. अब बारी आती है ‘Meme Hub’ नाम के पेज की जिसे 4 अप्रैल 2024 को बनाया गया था. यह पेज भी पहले 30 दिनों तक ‘पेज नाम’ के आधार पर डिसक्लेमर नहीं बना सकता था. इसलिए, इस पेज के बनने के एक दिन बाद ही इसने ‘Memes Xpress’ के डिसक्लेमर का इस्तेमाल करते हुए उसे मेटा से अप्रूव करा लिया और राजनीतिक विज्ञापन चलाना शुरू कर दिया.

राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए डिसक्लेमर अप्रूव करने की प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी और स्पष्ट खुलासे के बिना एक पेज द्वारा अप्रूव हो चुके डिसक्लेमर को कई पेजों के साथ शेयर करने का ऑप्शन फ़ेसबुक एडवरटाइजिंग सिस्टम में हेरफेर की अनुमति दे सकती है.

Sidha Chashma – सीधा चश्मा

इनमें से एक पेज ‘Sidha Chashma – सीधा चश्मा’ को 5 मार्च 2024 को बनाया गया था. इस पेज के बनने के कुछ दिन बाद ही 12 मार्च को इस पेज द्वारा राजनीतिक विज्ञापन चलाने के लिए डिक्लेमर अप्लाई किया गया. गौर करने वाली बात ये है कि इस पेज द्वारा भी डिसक्लेमर अप्रूव करवाने के लिए उसी ‘Page Name’ ऑप्शन का सहारा लिया गया जिसके अंतर्गत मेटा की पॉलिसी के मुताबिक, 30 दिन से कम पुराने पेज का डिसक्लेमर वेरीफाई नहीं हो सकता. लेकिन इस पेज के डिसक्लेमर को फ़ेसबुक ने अपनी ही पॉलिसी को नज़रअंदाज़ करते हुए अप्रूव किया और फिर इस पेज द्वारा विपक्षी पार्टी और नेताओं को टारगेट करते हुए धड़ल्ले से विज्ञापन चलाए जाने लगे. हालांकि, बाद में मेटा ने इस डिसक्लेमर को 19 अप्रैल को अपनी पॉलिसी के खिलाफ़ बताते हुए कार्रवाई की और पहले से चल चुके सभी विज्ञापन को डाउन किया (जो तकनीकी रूप से अप्रभावी है क्योंकि ये विज्ञापन पहले ही चलाए जा चुके हैं), लेकिन तबतक इस पेज द्वारा राजनीतिक विज्ञापन पर ₹3811889 (38 लाख 11 हजार 889 रूपये) से ज़्यादा खर्च किया जा चुका था और इस पेज द्वारा चलाए गए विज्ञापन पर 79025000 (7 करोड़ 90 लाख 25 हजार) से ज़्यादा व्यूज़ थे.

ये पेज भी “Ulta Chashmaa” प्रॉक्सी पेज सिंडीकेट का हिस्सा है, क्यूंकि इसके पहले डिसक्लेमर में जिस मोबाइल नंबर और इमेल का इस्तेमाल किया गया है वही डिटेल मेटा एड लाइब्रेरी में “Ulta Chashmaa” में भी मौजूद है.

इन उल्लंघनों को डिटेक्ट करने में मेटा की विफलता ने कई पेजों को पॉलिसी के खिलाफ़ विज्ञापनों को चलाने की अनुमति दी जिसपर 2548241000 (254 करोड़ 82 लाख 41 हजार) से ज़्यादा व्यूज़ मिले हैं. इन विज्ञापनों में केंद्र में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी का प्रॉपगेंडा चलाया गया है इसके साथ ही विपक्षी पार्टियों और नेताओं पर भद्दे मीम्स, गलत जानकारी और सांप्रदायिक कंटेन्ट के ज़रिए निशाना साधा गया.

MemeXpress और Political X-Ray

इस नेटवर्क के दो पेजों पर विज्ञापन चलाने वाले एड अकाउंट से एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन किया गया जिसके बाद MemeXpress और Political X-Ray नाम के पेज पर विज्ञापन चलाने वाले एड अकाउंट को क्रमशः 12 जनवरी और 13 जनवरी को डिसैबल कर दिया गया और अब लाइनरेरी में इन विज्ञापनों पर एक नोटिस दिखता है जिसमें लिखा है “This ad was run by an account that we later disabled for not following our Advertising Standards.” लेकिन इस पेज पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद भी पेज लगातार विज्ञापन चलाते रहे. जबतक इन दोनों पेजों के एड अकाउंट्स को डिसैबल किया गया तबतक इन दोनों पेजों द्वारा करीब ₹2830007 (28 लाख 30 हजार 7 रूपये) खर्च करके राजनीतिक विज्ञापन चलाए जा चुके थे जिसपर करीब 71552000 (7 करोड़ 15 लाख 52 हजार) व्यूज़ आ चुके थे.

MemeXpress और Political X-Ray नाम के इन पेजों द्वारा पहले ‘उल्टा चश्मा’ के डिसक्लेमर का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक विज्ञापन चलाया गया बाद में इन पेजों ने Memes Xpress और Political X Ray नाम से अपना डिसक्लेमर अप्रूव करवाया. जबकि इन पेजों पर या इनकी वेबसाइट्स पर इनके संगठन या संस्था होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है, इनके डिसक्लेमर में मौजूद फोन नंबर भी लगातार अनुपलब्ध बता रहे हैं. इन दोनों पेजों की वेबसाइटों को मेटा द्वारा उनके नए डिसक्लेमर को अप्रूव करने के कुछ ही दिन पहले यानी, 2 जनवरी 2024 रजिस्टर किया गया था.

इन पेजों का खर्च और विज्ञापनों पर व्यूज़

नीचे दिए गए टेबल में इन पेजों के नेटवर्क द्वारा खर्च किये गए पैसे उनके विज्ञापनों पर मिले व्यूज़ का ब्यौरा मौजूद है. इस डेटा का श्रोत फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा का एड लाइब्रेरी है.

*ये डेटा 29 मई 2024 और 31 मई 2024 के बीच मेटा एड लाइब्रेरी के वेबपेज से ली गई है, वर्तमान में ये Ad Spend अमाउंट ज़्यादा भी हो सकता है.

**मेटा एड लाइब्रेरी में कई जगह इंप्रेशन में Upper Bound डेटा मौजूद नहीं है, इसलिए दिए गए टेबल में इंप्रेशन का Lower Bound डेटा दिया गया है, असल में विज्ञापन के इंप्रेशन इससे ज्यादा हो सकते हैं.

Page Name Ad Spend (INR) Ad Impressions (Lower Bound)
Ulta Chashma – उल्टा चस्मा 25716645* 697530000**
Amaar Sonar Bangla – অমর সোনার বাংলা 9244211* 230004000**
Political X-Ray 18915068* 421143000**
MemeXpress 17593449* 378587000**
Sidha Chashma – सीधा चश्मा 7892238* 160525000**
Tamilakam – தமிழகம் 8603334* 194615000**
Kannada Sangamam – ಕನ್ನಡ ಸಂಗಮ 2146567* 72535000**
Aamcha Maharashtra – आमचा महाराष्ट्र 1125457* 44284000**
Telangana Central – తెలంగాణ సెంట్రల్ 2026047* 41882000**
Malabar Central – മലബാർ സെൻട്രൽ 2317852* 65737000**
Sonar Bangla – সোনার বাংলা 327887* 5420000**
Sidha Chashama 2.0 – सीधा चश्मा 2.0 700327* 32424000**
Meme Hub 7867870* 191130000**
Siyasat Di Baat – ਸਿਆਸਤ ਦੀ ਬਾਤ 81994* 12425000**
Total 104558946* 2548241000**

मेटा की अनदेखी, विदेशी कंपनियों द्वारा भारत के लोकतंत्र में दखलंदाज़ी पर गंभीर सवाल उठाती है. ऐसी खामियों को नज़रअंदाज़ करने के बादजूद मेटा जैसी बड़ी कंपनी द्वारा पारदर्शिता का दावा करना किसी मज़ाक से कम नहीं है. भारत दुनिया में एक बड़ा लोकतंत्र है, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों को जवाबदेह होते हुए इन खामियों का तुरंत समाधान करना चाहिए.

सबसे ज़रूरी बात कि मेटा एड लाइब्रेरी पर लगातार हुए रिसर्च यह दर्शाते हैं कि ये मेटा का बिजनेस मॉडल के अंतर्गत आता है. जिन पेजों द्वारा उनकी पॉलिसी का उल्लंघन किया जाता है, उन पेजों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती. जहां तक बात आती है विज्ञापनों को डाउन करने की तो जो विज्ञापान पहले ही चल चुके हैं और उनपर करोड़ों में व्यूज़ हों, उन विज्ञापनों को डाउन करना और एड लाइब्रेरी में उनपर मास्क डालना एक छलावा मात्र मालूम पड़ता है.

हमने इस प्रॉक्सी नेटवर्क और मेटा की पॉलिसी के उल्लंघन से जुड़ी सारी जानकारी फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा को 29 मई को भेजा जिसपर उन्होंने जवाब में हमसे इन पेजों का लिंक मांगा. हमने उसी दिन मेटा को सारे पेजों का लिंक दे दिया है. हमें 5 जून को मेटा से जवाब मिला जिसमें उन्होंने कहा कि जांच के बाद उन्होंने पाया कि जिन पेजों को हमने चिह्नित किया था, उन पर दिए गए डिसक्लेमर, मेटा की डिस्कलोजर पॉलिसी का उल्लंघन नहीं करता है.

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Abhishek is a senior fact-checking journalist and researcher at Alt News. He has a keen interest in information verification and technology. He is always eager to learn new skills, explore new OSINT tools and techniques. Prior to joining Alt News, he worked in the field of content development and analysis with a major focus on Search Engine Optimization (SEO).