उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2021 को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि साल 2015 के नियम से बनाई गई आरक्षण सूची में दलितों और वंचितों के अधिकारों का हनन हो रहा है. इसके चलते नई आरक्षण सूची बनाई जाए. हाई कोर्ट ने ये याचिका ख़ारिज कर फ़ैसला सुनाया कि चुनाव में आरक्षण सूची साल 2015 के नियमों के आधार पर ही बनाई जाएगी. इसके बाद हाई कोर्ट के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

इस दौरान आज तक के ग्राफ़िक की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की गई जिसमें इस मुद्दे से जुड़ी खबरें दिख रही हैं. ग्राफ़िक में ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ बताते हुए लिखा है – “यूपी ग्राम पंचायत चुनाव बड़ा फ़ैसला”, “सुप्रीम कोर्ट का आदेश पुरानी सूची होगी जारी”, “नई सूची रद्द 1995 के अनुसार होगी जारी”. आज तक के एक दूसरे ग्राफ़िक में लिखा है – “यूपी पंचायत चुनाव अब 1 मई से”, “सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया नई आरक्षण सूची रद्द”, “हाई कोर्ट का फ़ैसला पलटा अब दुबारा सूची आएगी”. 23 मार्च को फ़ेसबुक यूज़र विजय नाथ उपाध्याय ने ये दोनों तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, “आज सर्वण समाज के लोग चुनाव लड़ने वाले थे आज उनको आरक्षण और जातिगत नीतियों का समर्थन और पार्टियों के दलाली का एहसास होगा”. (आर्काइव लिंक)

आज सर्वण समाज के लोग चुनाव लड़ने वाले थे आज उनको आरक्षण और जातिगत नीतियों का समर्थन और पार्टियों के दलाली का एहसास होगा

Posted by Vijay Nath Upadhyay on Monday, 22 March 2021

एक और फ़ेसबुक यूज़र ने ये तस्वीर शेयर की है.

फ़ेसबुक पर ये ग्राफ़िक्स वायरल हैं.

फ़ैक्ट-चेक

सर्च करने पर हमें मालूम चला कि ग्राफ़िक में बताई गई ख़बरें झूठी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पंचायत चुनाव के हाई कोर्ट के फ़ैसले को नहीं बदला है. यहां पर गौर करें कि ये ग्राफ़िक्स 22 मार्च से सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे हैं. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पंचायत चुनाव से जुड़ी याचिका पर 26 मार्च को फ़ैसला सुनाया था.

26 मार्च 2021 की ‘ABP गंगा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, “यूपी में पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया गया. देश की सबसे बड़ी अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने के लिये कहा. आपको बता दें कि, दिलीप कुमार नाम के श्ख्स ने 2015 के नियम से आरक्षण को लेकर चुनौती देते हुए कहा था कि 2021 के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था लागू हो.” बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद सरकार 2015 को आधार वर्ष मानकर नई सूची तैयार कर रही है. इस बीच उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया जिसमें पहले चरण का मतदान 15 अप्रैल से शुरू होगा.

यानी ग्राफ़िक में बताई गई खबरें सरासर गलत हैं. अब बात करते हैं आज तक के ग्राफ़िक के बारे में. आज तक की वेबसाइट और यूट्यूब चैनल खंगालने पर हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें वायरल ग्राफ़िक वाली खबरें बताई गई हों. आज तक के ब्रॉडकास्ट के ग्राफ़िक की वायरल तस्वीर से तुलना करने पर ये बात साफ़ हो जाती है कि वायरल तस्वीर फ़र्ज़ी है.

इसके अलावा, हमने आज तक के सीनियर एडिटर से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि ये स्क्रीनग्राफ़ फ़ेक हैं. तस्वीर में दिख रहा बैकग्राउंड बदल दिया गया है और ये टेम्पलेट भी पुराना है.

कुल मिलाकर, आज तक के फ़र्ज़ी ग्राफ़िक्स शेयर करते हुए दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 1995 के नियमों के आधार पर आरक्षण सूची बनाने का आदेश दिया है. जबकि असल में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई फ़ैसला सुनाया ही नहीं है.


NDTV पर सोशल मीडिया का निशाना, लेकिन क्या उसने झूठ रिपोर्ट किया था? | फ़ैक्ट-चेक :

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