“कर्नाटक में 12 मई 2018 को मतदान होगा, गिनती 18 मई 2018 को होगी।” इस ट्वीट ने अमित मालवीय को मुश्किलों के बीच लाकर खड़ा कर दिया। मालवीय ने चुनाव आयोग के आधिकारिक घोषणा करने से पहले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के तारीखों को ट्वीट कर दिया था।

मालवीय का यह ट्वीट विवादों के घेरे में आ गया, जिसे चुनाव प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन माना गया। उन्हें इस वजह से सोशल मीडिया पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। विपक्ष ने भी निशाना साधा, कई कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने मालवीय के कर्नाटक चुनाव के तारीखों वाली ट्वीट की वजह से कड़ी आलोचना की।

यह नाराजगी सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं थी बल्कि सड़कों पर भी बाहर आई जब युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मालवीय के खिलाफ प्रदर्शन किया।

प्रमुख समाचार संगठनों ने बताया कि मालवीय के इस ट्वीट ने उन्हें चुनाव आयोग की जांच के तहत लाकर रख दिया है और अब चुनाव आयोग इस लीक की जांच करेगा।

इस जानकारी को कर्नाटक कॉंग्रेस सोशल मीडिया के प्रभारी श्रीवत्स ने भी मालवीय के ट्वीट करने के समय ही ट्वीट किया था। बाद में दोनों ने अपने-अपने ट्वीट्स हटा लिए।

हालांकि अमित मालवीय ने कई मौकों पर सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाई है। लेकिन इस बार अमित मालवीय ने नहीं बल्कि समाचर चैनल टाइम्स नाउ ने चुनाव आयोग से पहले कर्नाटक चुनाव के तारीख की जानकारी को प्रसारित किया था जैसा कि ऑल्ट न्यूज़ के पहले लेख में बताया गया है।

टाइम्स नाउ के 11:06/11:07am बजे चैनल पर ये जानकारी प्रसारित करने के ठीक कुछ ही देर में कुछ कन्नड़ समाचार चैनलों ने भी प्रसारित की। जबकि मालवीय का ट्वीट 11:08 बजे का था। अपने बचाव में दिए गए पत्र में मालवीय ने लिखा कि उनका ट्वीट टाइम्स नाउ द्वारा प्रसारित जानकारी पर आधारित था। इसमें यह भी कहा गया कि कर्नाटक कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रभारी ने भी टाइम्स नाउ द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर चुनाव आयोग की घोषणा के पहले ट्वीट किया था।

भाजपा ने भी मालवीय का बचाव करते हुए कहा कि मालवीय का ट्वीट एक समाचार चैनल के जानकारी पर आधारित था और उन्हें यह ट्वीट नहीं करना चाहिए था।

अमित मालवीय को गलत जानकारी शेयर करते हुए ऑल्ट न्यूज़ ने कई मौकों पर पकड़ा है। इस बार अमित मालवीय खुद के बनाए गए जाल में फंस गए। हालांकि, इस खास मामले में अमित मालवीय ने नहीं बल्कि टाइम्स नाउ ने चुनाव आयोग के घोषणा से पहले यह जानकारी प्रसारित की थी।

असत्य

यह सामग्री तथ्यात्मक रूप से गलत या गढ़ी हुई है।

हमारी कार्यप्रणाली पढ़ें