उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 फ़रवरी को एक ट्वीट में बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण आई मंदी के बावजूद उत्तर प्रदेश सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है.

इसके कुछ समय बाद ही द टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) ने रिपोर्ट किया, “पूरे विश्व में कोविड के कारण आई मंदी के बाद भी उत्तर प्रदेश सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया है. यूपी ने गुजरात और तमिलनाडु जैसे औद्योगिक राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है. TOI ने वित्त मंत्रालय से जो आकंड़े निकाले हैं उनके मुताबिक, यूपी की GSDP वित्त वर्ष 2020-2021 में 19.48 लाख करोड़ रुपये, पार कर चुकी है. इसी के साथ यूपी पिछले वित्त वर्ष 2019-2020 के 5 पांचवें स्थान से बढ़कर अब दूसरे स्थान पर आ चुका है.” द न्यू इंडियन एक्सप्रेस और स्वराज्य ने भी यही रिपोर्ट किया.

TOI ने ये भी कहा, “महाराष्ट्र पहले स्थान पर बना हुआ है लेकिन उत्तर प्रदेश ने तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल कर लिया है… पिछले वित्त वर्ष (2019-2020) में तमिलनाडु दूसरे स्थान पर, गुजरात तीसरे और कर्नाटका चौथे पायदान पर था.”

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट ऑप-इंडिया के कॉलमिस्ट @AbhishBanerj, प्रयागराज की सांसद रीता बहुगुणा जोशी, भाजपा समर्थक शहज़ाद पूनावाला, स्वराज्य के कॉलमिस्ट आशीष चंदोरकर और आरएसएस से मान्यता प्राप्त स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने शेयर की.

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भ्रामक दावा : ये पहली बार नहीं है जब यूपी दूसरे पायदान पर आया हो

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और मीडिया रिपोर्ट्स में ये दिखाया गया है कि यूपी का सकल राज्य घरेलू उत्पाद में दूसरा स्थान हासिल करना एक नया कीर्तिमान है. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक यूपी इस स्थान पर तेज़ी से पहुंचा है.

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने GSDP पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) द्वारा बीते वर्ष के जारी किये गए आंकड़ों पर नज़र डाली. ये आंकड़े वित्त वर्ष 2004-05 से लेकर वित्त वर्ष 2019-20 तक के हैं (स्प्रेडशीट देखें). यही आंकड़े भारतीय रिज़र्व बैंक ने अक्टूबर 2020 में जारी किये थे.

MOSPI के मुताबिक, GSDP का अंतिम आंकड़ा वित्त वर्ष 2019-20 का ही है. लेकिन गौर करें कि इस वित्त वर्ष में महाराष्ट्र और गुजरात समेत कुछ अन्य राज्यों की GSDP नहीं दी गयी है. इसलिए, TOI का ये दावा कि यूपी पहले पांचवें पायदान पर था और अब दूसरे पर पहुंच गया है सही नहीं ठहराया जा सकता है. इसके लिए सभी राज्यों के ताज़ा आंकड़े मौजूद होने ज़रूरी हैं. ऑल्ट न्यूज़ ने उस पत्रकार से बात की जिन्होंने इस बारे में रिपोर्ट की थी. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 का आंकड़ा यूपी के वित्तीय विभाग ने जारी किया था. ऑल्ट न्यूज़ ने यूपी के वित्तीय विभाग से इस बाबत जानकारी मांगी है और अगर हमें इन आंकड़ों पर कोई जानकारी मिलती है तो ये आर्टिकल अपडेट किया जाएगा.

हालांकि, मौजूदा आंकड़ों से एक बात साफ़ होती है कि यूपी वित्त वर्ष 2004-05 और वित्त वर्ष 2018-19 के बीच GSDP के मामले में दूसरे या तीसरे नंबर पर बना रहा.

MOSPI के मुताबिक, यूपी की GSDP वर्ष 2004-05 और वित्त वर्ष 2013-14 के बीच दूसरे स्थान पर बनी रही. वित्त वर्ष 2014-15 में तमिलनाडु ने यूपी को तीसरे स्थान पर कर दिया था. 2004 से लेकर 2015 तक महाराष्ट्र की GSDP पहले स्थान पर बनी रही. यहां MOSPI ने वित्त वर्ष 2004-05 को आधार माना है. (PDF देखें)

वित्त वर्ष 2014-15 से आगे के आंकड़ों के लिए 2011-12 को आधार वर्ष लिया गया. और इसलिए वित्त वर्ष 2011-18 के लिए यूपी के पायदान में बदलाव आ गया. लेकिन वित्त वर्ष 2018-19 में यूपी की GSDP वापस दूसरे पायदान पर आ गयी. पाठक गौर करें कि योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च, 2017 को यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी.

नीचे दिया गया ग्राफ़ वित्त वर्ष 2011-12 से लेकर वित्त वर्ष 2019-20 के बीच भारत के शीर्ष पांच राज्यों की GSDP (वर्तमान कीमतें) की तुलना दिखा रहा है. ये पांच राज्य हैं- महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात.

ग्राफ़ का विश्लेषण

1. महाराष्ट्र जहां GSDP में पहले स्थान पर है, तमिलनाडु और यूपी एक-दूसरे के काफ़ी करीब हैं.

2. वित्त वर्ष 2011-12 और 2017-18 के बीच GSDP के मामले में तमिलनाडु दूसरे नंबर पर रहा और वित्त वर्ष 2018-19 में यूपी दूसरे पायदान पर रहा.

3. यूपी की GSDP साफ़-तौर से प्रत्येक वर्ष कर्नाटक और गुजरात से ज़्यादा रही है.

4. वित्त वर्ष 2019-20 में यूपी की GSDP कर्नाटक से ज़्यादा थी, जो कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने नहीं बताया. इस वित्त वर्ष में गुजरात और महाराष्ट्र के आंकड़े दिए ही नहीं गए हैं.

5. बेशक वित्त वर्ष 2019-20 में महाराष्ट्र का नाम नहीं दिया गया है, लेकिन जिस तरह का इसका ट्रैक रिकॉर्ड है, इस साल भी महाराष्ट्र को पहले पायदान पर मानने के ठोस कारण हैं. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु पहले स्थान पर था और उत्तर प्रदेश दूसरे पर.

निष्कर्ष

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक यूपी की GSDP वित्त वर्ष 2004-05 और वित्त वर्ष 2018-19 के बीच दूसरे या तीसरे नंबर पर बनी रही. वित्त वर्ष 2019-20 के आंकड़ों में कुछ राज्यों के नाम नहीं थे और वित्त वर्ष 2020-21 के आंकड़े जारी ही नहीं किये गए हैं. जहां तक यूपी का सवाल है, ये हमेशा से ही कर्नाटक और गुजरात से ऊपर रहा है. इसलिए ये लिखना कि ‘यूपी ने GSDP के मामले में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है’, भ्रामक है. ऐसा कहकर ये जताने की कोशिश की गयी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने नए कीर्तिमान को छुआ है.


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About the Author

Archit is a senior fact-checking journalist at Alt News. Previously, he has worked as a producer at WION and as a reporter at The Hindu. In addition to work experience in media, he has also worked as a fundraising and communication manager at S3IDF.