रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मार्च को बांग्लादेश के 2 दिन के दौरे पर जा रहे हैं. ये मौका बांग्लादेश के 50वें स्वतंत्रता दिवस का है. इसी बीच कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने भीड़ की एक तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया कि बांग्लादेश में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के खिलाफ़ लोगों ने मार्च निकाला. कई यूज़र्स ने भीड़ की ये तस्वीर बांग्ला कैप्शन के साथ शेयर की. लोगों ने लिखा, “माशाअल्लाह! आज ढाका में इस्लामिक पार्टियों का मोदी के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन इस्लामी पार्टियों ने दिखा दिया कि देशभक्ति और धर्म उनके दिल में है! इस्लामी तौहिदी लोगों को मुबारक हो!”

(ओरिजिनल कैप्शन: মাশাল্লাহ! ঢাকায় ইসলামী দলগুলোর আজকের মোদী বিরোধী আন্দোলন। ইসলামিক দলগুলো দেখিয়ে দিলো যে দেশপ্রেম এবং ধর্মপ্রেম তাদের হৃদয়ের মনিকোঠায় থাকে! অভিনন্দন ইসলামপ্রিয় তৌহিদী জনতা)

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एक ट्विटर यूज़र ने अंग्रेज़ी में लिखा, “नरेंद्र मोदी को ढाका भी नहीं जाने दिया जा रहा है जबकि मोदी ने हसीना वाजिद की इतनी बार मदद की है. पीएम मोदी के आगामी दौरे के खिलाफ़ बांग्लादेश सड़कों पर आ गया है. ये आदमी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की तौहीन करवा रहा है.”

ऐंटी-फ़्रांस रैली की पुरानी फ़ोटो

इस तस्वीर का इमेज सर्च करने पर कई रिपोर्ट्स मिली हैं जिनमें बताया गया है कि ये अक्टूबर, 2020 में बांग्लादेश में फ़्रांस विरोधी रैली के मौके पर खींची गयी थी. न्यू स्ट्रेट टाइम्स की 28 अक्टूबर, 2020 की रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 27 अक्टूबर, 2020 को हज़ारों लोग सड़कों पर फ़्रांस का विरोध करने उतरे थे. दरअसल, फ़्रांस में एक टीचर ने स्टूडेंट्स को पैगम्बर मोहम्मद पर एक कार्टून दिखाया था जो लोगों के मुताबिक आपत्तिजनक था. इसके बाद एक मुस्लिम युवक ने कार्टून दिखाने वाले टीचर सेमुएल पैटी की हत्या कर दी थी. फ़्रांस राष्ट्रपति एमेनुएल मैक्रॉन ने अपने भाषण में फ़्रांस में सेक्युलर विचारधारा की बात करते हुए कार्टून का बचाव किया था. इसका नतीजा ये हुआ कि पूरी दुनिया में मुस्लिम बहुल राष्ट्रों ने फ्रेंच राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए फ़्रांस के उत्पादों का बहिष्कार किया था.

आउटलेट ने तस्वीर का क्रेडिट EPA को दिया है. हमें यूरोपियन प्रेसफ़ोटो एजेंसी (EPA) की वेबसाइट पर ये तस्वीर मिली जहां कैप्शन में बताया गया है कि बांग्लादेश के लोग फ़्रांस के राष्ट्रपति एमेनुएल मैक्रॉन के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने बांग्लादेश में ऐंटी-फ़्रांस रैली की 6 महीने पुरानी तस्वीर शेयर कर ग़लत दावा किया कि लोग मोदी के आगामी बांग्लादेश दौरे के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.


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