क्या पपीता पत्तियों के रस से बनी दवा ‘कैरीपिल’ डेंगू वायरस संक्रमण का इलाज है?

इस साल डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी के साथ ही, पपीता पत्तियों की तस्वीर के साथ 2012 का एक फेसबुक पोस्ट फिर से वायरल है। इसे पहले पोस्ट किए जाने से अबतक इसके 9,95,000 के करीब शेयर हो चुके हैं। यह फेसबुक पोस्ट, टाइम्स ऑफ इंडिया के एक लेख को सूचना का स्रोत बताते हुए सुझाव देता है कि पपीता पत्तियों के रस से डेंगू का चमत्कारिक इलाज हो सकता है।

“यह डेंगू का चमत्कारिक इलाज हो सकता है। और सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे घर पर बना सकते हैं।

पपीता के पत्ते का रस प्लेटलेट्स के नाश होने को रोकते हुए देखा गया है जो इस डेंगू सीजन में इतनी सारी मौत का कारण रहा है। आयुर्वेद शोधकर्ताओं ने पपीता के पत्ते में वह एंजाइम पाया है जो न केवल डेंगू के वायरल संक्रमण की बड़ी संख्या से लड़ सकते हैं, बल्कि प्लेटलेट्स और सफेद रक्त कोशिकाओं को पुन: उत्पन्न करने में मदद कर सकते हैं।”

अवलोकन

पपीता पौधों का उपयोग करते हुए डेंगू रोगियों में प्लेटलेट्स की गणना बढ़ाने के विचार का ‘कैरीपिल’ नामक टैबलेट के रूप में व्यावसायीकरण किया गया है, जिसमें पपीता पत्ती का रस शामिल होता है। कम हो गई प्लेटलेट गणना, जो डेंगू बुखार का एक लक्षण है और जिसके कारण रक्तस्राव हो सकता है, को बढ़ाने में कैसे यह दवा मददगार हो सकती है, इसका सुझाव देने वाले शोध अध्ययन काफी हद तक संदिग्ध आंकड़ों और प्रोब्लेमैटिक ब्लाइंडिंग (problematic blinding) वाले हैं। इस बीमारी की अवधि जो लगभग 10 दिनों की होती है, ये अध्ययन दावा करते हैं कि यह 2 दिन पहले ही प्लेटलेट्स को बढ़ा देता है, जिसकी तुलना में कोई उपचार नहीं है।

हालांकि, सोशल मीडिया के पोस्ट यह उल्लेख नहीं करते कि प्लेटलेट्स की गणना बढ़ाने में दवा कुछ प्रभावी हो सकती है, तो भी, यह डेंगू संक्रमण से छुटकारे का संकेत नहीं है। इसके अलावा, ये अध्ययन, उन रोगियों में ‘कैरीपिल’ के प्रभावों को नहीं मापते, जिनमें प्लेटलेट्स की गणना खतरनाक रूप से कम (यानी डेंगू के चरम रूपों में) है या ट्रांसफ्यूजन थेरेपी प्राप्त करने वाले मरीजों के साथ, डेटा की तुलना नहीं करते हैं। ये अध्ययन डेंगू वायरल लोड में परिवर्तन या बुखार या चकत्ते जैसे लक्षणों के विस्तार को भी नहीं मापते हैं, जो ठीक होने के वास्तविक संकेतक हैं। अनुसंधान डेटा में बड़ी त्रुटियों के साथ, यह संभावना है कि यह दवा केवल कुछ रोगियों पर प्रभावी है, सभी पर नहीं, और दावों के विपरीत, प्रतिकूल प्रभाव पैदा करने के अनुमान से रहित नहीं है।

इस लेख में हम इन बिन्दुओं पर चर्चा करेंगे:

  • डेंगू संक्रमण क्या है?
  • डेंगू और पपीता को लेकर गलत जानकारी
  • डेंगू के लिए पपीते की दवा ‘कैरीपिल’ के विपणन पर विशेषज्ञों की आलोचना
  • क्या प्लेटलेट्स की गणना को बढ़ाना ठीक होने का मार्ग है?
  • डेंगू संक्रमण के लिए कैरीपिल पर शोध अध्ययनों का विश्लेषण, और
  • निष्कर्ष

डेंगू संक्रमण क्या है?

डेंगू बुखार एक संक्रमण है जो फ्लैविविरिदाय (Flaviviridae) परिवार के वायरस के कारण होता है जो मच्छरों का उपयोग अपने मेजबान जीव के रूप में करता है। मच्छर (एडीज इजिप्ती) किसी संक्रमित व्यक्ति को काटकर वायरस प्राप्त करता है, और बाद में अन्य स्वस्थ मनुष्यों तक फैलाता है। काटने के बाद लगभग 4-5 दिनों में बीमारी का पहला लक्षण दिखाई देता है, जिसमें जोड़ों या मांसपेशियों के दर्द के अलावा तेज बुखार, जोर का सिरदर्द, मतली, उल्टी और शरीर के चकत्ते भी शामिल होते हैं। हालांकि, यह आमतौर पर जीवन को खतरे में नहीं डालता, मगर बेहद दर्दनाक और कमजोर कर देने वाला होता है।

डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप या उप-प्रजातियां हैं (डेन -1, डेन -2, डेन -3 और डेन -4)। प्रत्येक संक्रमण उस विशिष्ट सीरोटाइप के लिए आजीवन प्रतिरक्षा प्रदान करता है, लेकिन बाद में, किसी दूसरे सीरोटाइप के संक्रमण से डेंगू हेमोरेजिक बुखार (डीएचएफ) नामक अधिक चरम बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

भारत के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (National Vector Borne Disease Control Program/NCVBDCP) के आंकड़ों से पता चला है कि 2017 में, 2014 की तुलना में मामलों की संख्या 4 गुना से अधिक बढ़ी है। असामान्य डेंगू संक्रमण से 2014 में 137 के विपरीत, 2017 में 325 लोगों की मौत हो गई। वर्ष 2018 का डेटा अपूर्ण है, मगर इस वर्ष डेंगू संक्रमण दर और बढ़ी है, और इसकी बारंबारता इसके यहां महामारी की तरह रहने का संकेत देती है।

डेंगू और पपीता को लेकर गलत जानकारी

हर साल, जिन महीनों में डेंगू सबसे ज्यादा फैलता है, इस बीमारी के इलाज के रूप में पपीता, पपीता के पत्तों या पपीता के बीज के बारे में ढेर सारे पोस्ट की भीड़ भारत सहित विभिन्न एशियाई, अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी देशों में सोशल मीडिया तंत्र में जमा हो जाती है।

पपीता के बीज से डेंगू समेत सभी चीजों का इलाज होने के बारे में एक फेसबुक वीडियो को 1.3 करोड़ से अधिक बार देखा गया है। इसी तरह, यूट्यूब पर ऐसे दर्जनों वीडियो हैं जिन्हें दस लाख से अधिक बार देखा गया है।

अभी ‘कैरीपिल’ नामक कैरीका पपीता पत्तियों के टैबलेट के बॉक्स का एक और पोस्ट सोशल मीडिया पर निम्नलिखित कैप्शन के साथ दोबारा लगाया गया है:

“मुख्य रूप से पपीता पत्ती के रस से बना कैरीपिल टैबलेट डेंगू के इलाज के लिए है। यह मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है और बीमारी से निकलने में सहायता करता है।”

सार्वजनिक स्वास्थ्य सूचना के लिए आधिकारिक सरकारी वेबसाइट, भारत का राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल भी कहता है कि हालांकि डेंगू के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, फिर भी, गुडुची, तुलसी, सूखे अदरक और पपीता जैसे औषधीय पौधे जटिलताओं को रोकते हैं और रोग को तेजी से नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

इससे पहले, द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे कई मीडिया संस्थानों ने बताया है कि न केवल पपीता के पत्तों का टैबलेट, बल्कि पके हुए पपीता का रस या पपीता के पत्तों को उबालकर या पीसकर लेने से रक्त में प्लेटलेट्स की गणना बढ़ाकर डेंगू का इलाज हो सकता है।

डेंगू के लिए पपीते की दवा ‘कैरीपिल’ के विपणन पर विशेषज्ञों की आलोचना

पिछले साल, न्यू इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित स्पंदना सेंटर फॉर मेटाबोलिक मेडिसिन, मंगलुरु के सलाहकार चिकित्सक, डॉ. श्रीनिवास काक्किलाया के एक लेख में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की प्रधान स्वास्थ्य सचिव शालिनी रजनीश द्वारा शेयर किए गए प्याज और गुड़ की तस्वीर के साथ ‘डेंगू का इलाज’ शीर्षक लेख के सोशल मीडिया पोस्ट की आलोचना की गई थी। “चरका संहिता में ‘वायरस’ शब्द का कोई उल्लेख नहीं है। जब कोई चीज एक संक्रमण की पहचान तक नहीं करता, तो वे उपाय की सिफारिश कैसे कर सकते हैं?”

उसके बाद, आयुष विभाग ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया था, “यह सुझाव देने का इरादा नहीं है कि पारंपरिक इलाज की बजाय इन उपचारों का उपयोग किया जाना चाहिए।”

बैंगलोर स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी माइक्रो लैब्स, जो कैरीपिल के निर्माता हैं, का यह भी दावा है कि मई 2015 में आयुष विभाग द्वारा इस दवा को मंजूरी दे दी गई है।

क्या प्लेटलेट की गणना बढ़ाना, ठीक होने की राह है?

संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉ. हितेन करेलिया ने सुझाव दिया कि “डेंगू अस्थि मज्जा (प्लेटलेट बनने का स्थान) सहित ऊतकों में गहराई तक प्रवेश करके कार्य करता है। यहां प्रतिरक्षा कम्प्लीमेंट सक्रियता (immune compliment activation) के एक तंत्र से, प्लेटलेट की गणना कम हो जाती है। प्लेटलेट गणना केवल जब खतरनाक रूप से कम हो जाती है, तभी प्लेटलेट गणना बढ़ाना महत्वपूर्ण हो जाता है (ट्रांसफ्यूजन द्वारा)। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वायरल संक्रमण से मुक्त होने (ठीक होने) की प्रक्रिया हो गई है।”

इससे पता चलता है कि यद्यपि प्रत्येक रोगी को प्लेटलेट की निगरानी की आवश्यकता होती है, लेकिन प्रत्येक डेंगू रोगी के लिए कम प्लेटलेट्स का सामना करने की चिकित्सा से गुजरना आवश्यक नहीं होता है। और ऐसा करने का मतलब यह नहीं होता कि किसी के डेंगू संक्रमण का इलाज हो रहा है।

डॉ करेलिया ने आगे कहा, “प्लेटलेट गणना में परिवर्तन प्रतिरक्षा कार्य (immune function) का संकेतक है। प्लेटलेट गणना में किसी बड़े बदलाव के बिना, डेंगू संक्रमण के साथ, कमजोर या दबी हुई प्रतिरक्षा वाले मरीज़ हो सकते हैं, जैसे बच्चे या बूढ़े मरीज़, तब, पपीता वाली दवा कैरीपिल का प्लेटलेट की गणना पर कमजोर प्रभाव हो सकता है, लेकिन इससे वायरल संक्रमण कम नहीं होता।”

इससे पता चलता है कि डेंगू वायरस, व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के अनुसार प्लेटलेट गणना को कम करने का काम करता है। कमजोर प्रतिरक्षा के व्यक्तियों के लिए, रक्त परीक्षण में किसी बड़े बदलाव के बिना भी डेंगू संक्रमण जारी रह सकता है। इसका मतलब यह भी है कि बड़ी संख्या में मरीजों में, कम प्लेटलेट, संक्रमण का संकेतक नहीं हो सकता है, फिर भी उनमें डेंगू वायरल हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि, “उनके क्लिनिक में आने वाले मौजूदा डेंगू संक्रमण के मरीजों की कुल संख्या के लगभग 20-30% रोगी पहले से ही यह दवा ले रहे हैं”

इसका मतलब यह है कि इन रोगियों के ‘कैरीपिल’ दवा लेने के बावजूद मौजूदा डेंगू संक्रमण के साथ-साथ डेंगू के लक्षण भी मौजूद हैं।

मच्छर के काटने से रोकने के उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, विशेष रूप से पुनरावर्ती संक्रमण को रोकने के लिए। डेंगू के लक्षणों के लिए दर्द निवारक या पानी चढ़ाने जैसे उपचार की सिफारिश की जाती है, जबकि संक्रमण इसका नैदानिक ​​समय लेकर 10 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो सकता है।

डेंगू संक्रमण के लिए कैरीपिल पर शोध क्या कहता है?

हालांकि सोशल मीडिया में विभिन्न पोस्ट फल, बीज और इसकी पत्तियों जैसे विभिन्न रूपों में पपीता के पौधे के उपयोग का सुझाव देते हैं, लेकिन, डेंगू रोगियों पर प्लेटलेट्स का निरीक्षण करने के लिए किए गए शोध पपीता पत्तियों से बनी दवाओं तक ही सीमित रहे।

हमें PUBMED में दो नैदानिक ​​परीक्षण मिले, जिनमें जुलाई 2016 में मानव अध्ययन आयोजित किए गए थे, और दोनों एक ही जर्नल (द जर्नल ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजियंस ऑफ इंडिया) में। दोनों में कम प्लेटलेट गणना के आधार पर पपीता के रस के प्रभाव का डेंगू बुखार से तेज छुटकारे के साथ सहसंबंध किया गया था।

अध्ययन 1: ए के गढ़वाल, बी एस अंकित, सी चहर, पी तांतिया, पी सिरोही और आर पी अग्रवाल (2016)। थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (thrombocytopenia) के साथ डेंगू बुखार के मरीजों में प्लेटलेट गणना पर कैरिका पपीता पत्ती रस वाले कैप्सूल का प्रभाव। (Effect of Carica papaya leaf extract capsule on platelet count in patients of dengue fever with thrombocytopenia.) J Assoc Physicians India, 64 (6), 22-6)

परिणाम खंड में, इस अध्ययन के लेखकों ने कहा कि “पपीता के पत्ते के रस वाले कैप्सूल ने ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता को कम करने के साथ प्लेटलेट गणना को तीसरे दिन बढ़ा दिया”

जब हमने लेख के परिणाम खंड में दिए गए आंकड़ों को दिए गए दो समूहों, यानी पपीता पत्ती की दवा बनाम नियंत्रण प्लेसबो दवा (control placebo drug) जिन्हें क्रमश: लगभग 400 और 200 डेंगू रोगियों को दिया गया, मानक माध्य त्रुटि (standard error of the mean) के साथ दुबारा परखा, तो हमें इस अध्ययन में व्याख्या की गंभीर समस्याएं मिलीं।

ऊपर दिखाए गए ग्राफ में, एक टाइमपॉइंट (96 घंटे) को छोड़कर, अधिकांश दिनों में त्रुटि पट्टियां एक दूसरे को आच्छादित (overlap) करती हैं और इसलिए, पपीता दवा बनाम नियंत्रण समूह की दवा प्राप्त करने वाले मरीजों के बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं देखा जा सकता है।

नियंत्रण समूह दवा और पपीता दवा (पहली खुराक से 96 घंटे बाद) के बीच सबसे बड़े अंतर वाले दिन, हम देख सकते हैं कि त्रुटि पट्टियां अभी भी एक दूसरे को आच्छादित करती हैं। लेकिन, चूंकि नमूना आकार बड़ा है (एन = 400 डेंगू रोगी), यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उपचार के प्रभाव बहुत कमजोर हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अध्ययन ब्लाइंडेड (blinded) नहीं था, जिसका मतलब है कि रोगियों और स्वास्थ्य चिकित्सकों की दवाओं के प्रदर्शन की उम्मीदें परिणामों पर काफी प्रभाव डाल सकती हैं।

आयुष मंत्रालय का बयान और अध्ययन 1 का दावा है कि पपीता रस वाली दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है। लेकिन सावधानी से अध्ययन 1 पढ़ते समय, यह अन्य अवलोकनों को उद्धृत करता है जो बताते हैं, कि 0.25 ग्राम से 0.5 ग्राम/ किग्रा शरीर के वजन को सुरक्षित खुराक माना जाता है, जबकि उच्च खुराक से लाल चकत्ते, खुजली, पेट दर्द, मतली और उल्टी जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ये दुष्प्रभाव डेंगू बुखार के बहुत दुर्बल करने वाले दुष्प्रभाव हैं, जिससे मरीज ठीक होने की कोशिश कर रहे हैं।

अध्ययन 2: पी एन कस्तूरे, के एच नागभूषण और ए कुमार (2016)। डेंगू बुखार से जुड़े थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (thrombocytopenia) की अनुभवजन्य चिकित्सा के रूप में, कैरीका पपीता पत्ती रस की प्रभावकारिता और सुरक्षा का मूल्यांकन करने के लिए एक बहु-केंद्रित, डबल ब्लाइंड (double blind), प्लेसबो नियंत्रित, क्रम रहित, संभावित अध्ययन। (A multi-centric, double blind, placebo controlled, randomized, prospective study to evaluate the efficacy and safety of Carica papaya leaf extract, as empirical therapy for thrombocytopenia associated with dengue fever) J Assoc Physicians India, 64 (6), 15-20

दूसरा अध्ययन, हालांकि, डबल ब्लाइंडेड तरीकों का उपयोग करके आयोजित किया गया था, जिसका अर्थ है कि दवा की अपेक्षाओं ने परिणाम को प्रभावित नहीं किया होगा। ये परिणाम अध्ययन 1 के समान थे, जहां दवा देने के बाद के 96 घंटे की टाइमपॉइंट पर, प्लेटलेट गणना पपीता दवा के साथ ठीक होने के संकेत दिखाती है। हालांकि, त्रुटि पट्टियों को बहुत कमजोर प्रभाव का सुझाव देने वाले सभी टाइमपॉइंट पर आच्छादित किया गया। यही इसकी प्रभावशीलता की चोटी पर औसत परिणाम से भिन्नता है (यानी, उच्चतम प्लेटलेट गणना) जो कम परिणाम वाले निकटवर्ती दिनों के समान सांख्यिकीय रूप से समान थी।

इसके अलावा, दोनों मामलों में, त्रुटि पट्टियों ने सुझाव दिया कि दोनों अध्ययनों में कुछ (सभी नहीं) मरीज़ हो सकते हैं जिनके पास पपीता दवा के साथ प्लेटलेट का बढ़ना काफी तेज था, लेकिन कोई बड़ी बहुमत नहीं थी।

https://www.researchgate.net/profile/Muhammad_Zaman_Khan_Assir/publication/242655420/figure/fig2/AS:298516212666372@1448183219289/Clinical-course-of-dengue-virus-infection-7_W640.jpg

निष्कर्ष

प्रत्येक व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली अलग होती है, उसी अनुरूप सबकी प्लेटलेट गणना में गिरावट भिन्न हो सकती है। इसलिए, समूह में मजबूत परिवर्तनों को दिखाने के लिए, अलग-अलग प्लेटलेट की गणना, बेसलाइन से प्रतिशत परिवर्तन के रूप में सामान्यीकृत की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, कमजोर प्रभाव, दवा के प्रति मरीज की ब्लाइंडिंग के अध्ययन की कमी के साथ-साथ प्रयोग में संदिग्ध आंकड़े बताते हैं कि प्लेटलेट को बढ़ाने के लिए कैरीपिल को प्रभावी दवा का निष्कर्ष निकालने के लिए इसे विभिन्न स्थितियों में अधिक शोध की आवश्यकता है।

उपरोक्त आकृति में दिखाए गए डेंगू संक्रमण से ठीक होने के (नैदानिक ​​अवधि) सामान्य ढांचे की वही टाइमलाइन है जो पपीता दवा और नियंत्रण समूहों की दवा के दो समूहों के लिए दिखती है।

इसके अलावा, इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि प्लेटलेट्स का नुकसान या लाभ डेंगू संक्रमण की 8-10 दिनों की अवधि के भीतर नैदानिक ​​लक्षणों के संदर्भ में है। इसका अर्थ है कि अध्ययन नहीं दिखाते हैं कि कैरीपिल से बुखार या दर्द जैसे लक्षण कम होते हैं। इसके अलावा, कोई डेटा नहीं है जो बताता है कि वायरल लोड या वायरायमिया (viraemia) (उपरोक्त आंकड़ा देखें) पपीता दवा के कारण कम हो गया है, जो दवा की प्रभावकारिता का असली संकेतक है।

इसलिए, इसकी अत्यधिक संभावना है कि डेंगू रोगी बिना किसी उपचार के सामान्य स्वास्थ्य में लौट रहे हैं। यह अन्य गैर-जानलेवा वायरल संक्रमणों के समान, रोगियों की जन्मजात प्रतिरक्षा प्रणाली, बाह्य हस्तक्षेप के बिना, डेंगू सीरोटाइप के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित कर देती है। यहां तक ​​कि अगर कैरीपिल प्लेटलेट्स को बढ़ाने पर असर डालता है, तो भी यह डेंगू के लक्षणों से निकलने पर न निर्भर होता है, न डेंगू हेमोरेजिक बुखार से बचाने में मदद करता है।

योगदान करें!!
सत्ता को आइना दिखाने वाली पत्रकारिता जो कॉरपोरेट और राजनीति के नियंत्रण से मुक्त भी हो, वो तभी संभव है जब जनता भी हाथ बटाए. फेक न्यूज़ और गलत जानकारी के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद कीजिये. डोनेट करिये.

Donate Now

तत्काल दान करने के लिए, ऊपर "Donate Now" बटन पर क्लिक करें। बैंक ट्रांसफर / चेक / डीडी के माध्यम से दान के बारे में जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें

Send this to a friend