कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच सोशल मीडिया में भी इससे जुड़ी हुई कई गलत जानकारियां शेयर की गई. ऐसी गलत सूचनाएं या अफ़वाह के कारण समाज में बीमारियों को लेकर डर ज़्यादा पसरता है. ऑल्ट न्यूज़ ने कोरोना वायरस से जुड़े हुए कई दावों की पड़ताल की है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं.

कोरोना वायरस से ही संबंधित एक और वीडियो शेयर किया जा रहा है. दावा है कि चीन में कोरोना वायरस के चलते मुस्लिमों को कुरान पढ़ने की अनुमति दे दी गई है. ये वीडियो हिन्दी मेसेज के साथ शेयर किया जा रहा है -“चीन मैं क़ुरान पे पाबन्दी लगाने वालों मैं अब क़ुरान को पढ़ने की होड़ मची हैं।अल्लाहु अकबर या मेरे रब इस वायरस से नीजात दिला” (आर्काइव किया हुआ पोस्ट)

चीन मैं क़ुरान पे पाबन्दी लगाने वालों मैं अब क़ुरान को पढ़ने की होड़ मची हैं।

अल्लाहु अकबर या मेरे रब इस वायरस से नीजात दिला

Posted by The great kayamkhani on Sunday, 8 March 2020

ऑल्ट न्यूज़ के ऑफ़िशियल ऐप पर भी इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए कई लोगों ने अनुरोध किये हैं.

फ़ैक्ट-चेक

वीडियो की सच्चाई जानने के लिए ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो के की-फ्रेम को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया. मालूम हुआ कि वीडियो के साथ किया गया दावा गलत है. दरअसल ये वीडियो 2013 का है. हमें 19 मार्च, 2013 का ‘गॉस्पलप्राइम’ वेबसाइट का एक आर्टिकल मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में दिख रहे लोगों की प्रतिक्रिया उस वक़्त की है जब उन्हें पहली बार बाइबल मिली थी. हालांकि, रिपोर्ट में वीडियो की जगह या समय के बारे में नहीं बताया गया है.

इन्टरनैशनल क्रिश्चियन कन्सर्न नाम के यूट्यूब चैनल ने ये वीडियो 17 मार्च, 2014 को अपलोड किया था. कुछ रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि ये वीडियो 1980 का है.

ऑल्ट न्यूज़ वीडियो के बारे में और जानकारी इक्क्ठा नहीं कर पाया है. लेकिन ये बात साफ़ है कि वीडियो कम से कम सात साल पुराना है और इसका कोरोना वायरस से कोई लेना-देना नहीं है. पहले भी ऐसा ही एक वीडियो चीन में कोरोना वायरस के डर के कारण नमाज़ पढ़ने के झूठे दावे से शेयर किया गया था.

वायरल है ये वीडियो

ये वीडियो हिन्दी मेसेज के साथ फ़ेसबुक और ट्विटर पर वायरल है.

इसके अलावा, ये वीडियो अंग्रेज़ी मेसेज के साथ भी फ़ेसबुक पर वायरल है.

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