27 मार्च को शिल्पा बोधके ने दो तस्वीरें ये कहते हुए ट्वीट की -“जितना आज दिहाड़ी,रेहड़ी,हाइवे पर चलते लोगो को मारकर सख्ती करी जा रही है.” शिल्पा खुद को महाराष्ट्र प्रदेश महिला कॉंग्रेस कमिटी की सोशल मीडिया स्टेट कॉर्डिनेटर बताती हैं. उन्होंने आगे बताया -“अगर इसकी 10% भी अगर @RahulGandhi जी की #कोरोना चेतावनी पर अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर कर ली जाती तो भारत सुरक्षित रहता! @LambaAlka @sujitsingh_” (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

इन तस्वीरों में दो लोगों के पीठ पर चोट के कई निशान दिखाई दे रहे हैं. आर्टिकल लिखे जाने तक इस ट्वीट को 1,100 बार रीट्वीट और 3,500 बार लाइक किया गया है. बोड़के ने ये तस्वीर कोरोना वायरस के चलते जारी किये 21 दिनों के लॉकडाउन की पृष्टभूमि में शेयर की है. उनका दावा है कि लॉकडाउन के दौरान जो भी मज़दूर अपने-अपने घर लौट रहे है उनकी पुलिस इतनी बेरहमी से पिटाई कर रही है.

कई लोगों ने फ़ेसबुक और ट्विटर पर ये तस्वीरें इसी दावे के साथ शेयर की है.

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ये तस्वीरें पुरानी हैं और इसका लॉकडाउन से कोई लेना-देना नहीं हैं. गूगल और यानडेक्स पर रिवर्स इमेज सर्च करने से हम ये ढूंढ पाने में कामयाब हुए कि इन तस्वीरों को सबसे पहले किसने शेयर किया था.

तस्वीर 1

ये तस्वीर “matinews.com” नामक एक वेबसाइट पर 18 दिसम्बर 2017 को पब्लिश हुई थी. इस आर्टिकल में वायरल हो रही तस्वीरों के साथ और भी कई तस्वीरें शेयर की गई हैं.

इसके अलावा हमें 2018 का एक ट्वीट भी मिला. ट्वीट में दावा किया गया कि ढाका के शांतिनगर में एक रिक्शाचालक की ट्रैफ़िक पुलिस ने बेरहमी से पिटाई कर दी. ट्वीट के मुताबिक -“गरीबों के साथ अन्याय हो रहा है. इस वीडियो को शेयर करे अगर आपकी आत्मा अभी भी जीवित है.”

तस्वीर 2

दूसरी तस्वीर भी 9 महीने पुरानी है. इस तस्वीर को एक फ़ेसबुक पेज ने 17 जुलाई 2019 को पोस्ट किया था. ये तस्वीर लॉकडाउन से जुड़ी हुई नहीं है.

पश्चिम बंगाल पुलिस के ऑफ़िशियल हैन्डल ने भी इस तस्वीर की सच्चाई 27 मार्च 2020 को ट्वीट कर बताई थी. पुलिस ने कहा -“सोशल मीडिया में कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर कर पश्चिम बंगाल प्रशासन पर निशाना साधा जा रहा हैं.”

ऑल्ट न्यूज़ तस्वीरों के सदर्भ और सोर्स के बारे में स्वतंत्र रूप से पता नहीं लगा पाया है. हालांकि ये बात साफ़ हो चुकी है ये तस्वीरें कोरोना वायरस के चलते जारी किये गए लॉकडाउन से जुड़ी हुई नहीं हैं.

ग़लत
दावा:
लॉकडाउन के दौरान मजदूरों को बेरहमी से पीट रही पुलिस

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