सोशल मीडिया में पुजारियों द्वारा कुछ श्रद्धालु की पिटाई करने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. कई यूज़र्स इसे शेयर करते हुए सांप्रदायिक दावा का रहे हैं कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर में मुस्लिम समुदाय के लोग ने श्रद्धालुओं पर मांस फेंक कर ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाये, जिसके बाद पुजारियों ने जम कर उन मुसलमानों की पिटाई कर दी.

@Mahaveer_VJ नामक राइट विंग हैंडल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर में मौजूद लगभग 20 पुजारियों ने एक ‘डेज़र्ट गैंग’ के सदस्यों के सिर पर नारियल फोड़ दिए, यह गैंग अपने साथ बीफ़ लेकर आया था, ‘अल्लाह अकबर’ के नारे लगा रहा था और श्रद्धालुओं पर मांस फेंकने की कोशिश कर रहा था.”

राइट विंग हैंडल @HinduAsociation, @PNRai1, @ocjain4, @yosishahbar, @_xojnk, जनार्दन मिश्रा, मनोज कुमार, रिद्धिमा शर्मा समेत कई यूज़र्स ने भी ऐसे दावों के साथ ये वीडियो शेयर किया.

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बता दें ऑल्ट न्यूज़ ने कई मौकों पर @HinduAsociation, @PNRai1, @ocjain4, @Mahaveer_VJ समेत जनार्दन मिश्रारिद्धिमा शर्मा को झूठ और सांप्रदायिक नफ़रती जानकारी फैलाते हुए पाया है.

फेसबुक पर भी ऐसे ही दावों के साथ ये वीडियो शेयर किया जा रहा है.

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फैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने वायरल वीडियो का सच जानने के लिए इसके कीफ़्रेम को रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें NDTV इंडिया के एक्स-हैंडल पर यही वीडियो 23 मार्च 2026 को अपलोडेड मिला, जिसके कैप्शन में घटना के बारे में बताया गया है कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित ज्योतिबा मंदिर में 15 से 20 पुजारियों के एक समूह ने दो श्रद्धालुओं के साथ बेरहमी से मारपीट की.

23 मार्च 2026 को प्रकाशित NDTV इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 22 मार्च को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच पारंपरिक ससनथी प्रदक्षिणा और आरती के दौरान पुजारियों और श्रद्धालुओं के एक छोटे समूह के बीच ये घटना घटी.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपने रिपोर्ट में बताया कि यह झड़प सुबह करीब 11:30 बजे उस समय शुरू हुई जब शाहूवाड़ी तहसील के परिते गांव से श्रद्धालुओं का एक समूह हिन्दू देवता ज्योतिबा के ध्वज के रूप में इस्तेमाल होने वाले एक सजे हुए खंभे, शसंकठी को लेकर मंदिर पहुंचा.

आगे रिपोर्ट में पुजारियों के अनुसार, समूह ने कालभैरव मंदिर से ज्योतिबा मंदिर तक निर्धारित आरती जुलूस के मार्ग को बाधित किया. पुजारियों पर गुलाल लगे नारियल फेंके और बार-बार दी गई चेतावनियों को अनसुना किया. उनका यह भी आरोप है कि हंगामे के कारण मेजें और अन्य आरती की व्यवस्थाएं उलट गईं और कुछ पुजारियों के पारंपरिक धोती (कमर पर पहना जाने वाला वस्त्र) अफरा-तफरी में उतर गए.

रिपोर्ट में श्रद्धालुओं का पक्ष, परिते गांव के सरपंच मनोज पाटिल ने कुछ यूं बताया है कि हल्गी (एक पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र) बजा रहे एक श्रद्धालु नाचते समय अपना संतुलन खो बैठा और गलती से एक पुजारी को धक्का दे दिया. उन्होंने आगे बताया कि मेला के दौरान गांव में तीन दिन तक शराब के सेवन और बिक्री पर प्रतिबंध था, इसलिए पुजारियों का यह दावा कि श्रद्धालु नशे में थे, निराधार है.

इसीलिए वायरल वीडियो महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित ज्योतिबा मंदिर का है ना कि महालक्ष्मी मंदिर का. कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर और ज्योतिबा मंदिर दोनों अलग-अलग और स्वतंत्र तीर्थ स्थल हैं. दोनों एक-दूसरे से लगभग 18 से 20 किलोमीटर की दूरी पर कोल्हापुर ज़िले में ही स्थित हैं, इसके अलावा घटना में किसी मुस्लिम समुदाय के लोगों के शामिल होने या सांप्रदायिक घटना होने जैसा कुछ भी रिपोर्ट में नहीं बताया गया है.

यानी, कोल्हापुर स्थित ज्योतिबा मंदिर में प्रदक्षिणा और आरती के दौरान पुजारियों और श्रद्धालुओं के बीच हुई झड़प का वीडियो राइट विंग यूज़र्स शेयर कर सांप्रदायिक रंग देते हुए झूठा दावा कर रहे हैं. महालक्ष्मी मंदिर में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा श्रद्धालुओं के ऊपर मांस फेंकने और ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाने जैसी कोई ख़बर नहीं है.

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