बीते दिनों नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे मजदूरों के प्रदर्शन के बाद कई वीडियो सामने आए. ऐसा ही एक वीडियो वायरल है जिसमें कुछ पुरुष पुलिसकर्मी सड़क पर खड़ी कुछ महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते, धक्का-मुक्की करते और उन्हें परेशान करते हुए दिख रहे हैं. वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एक लड़की को लाठियों और थप्पड़ों से पीटा जा रहा है और वीडियो में गालियां भी सुनी जा सकती हैं. कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया कि ये घटना नोएडा का है, जहां पुलिसकर्मी महिला पर लाठीचार्ज कर रहे हैं. इस घटना के सामने आने के बाद आम लोगों ने पुलिस के इस हिंसक रवैये की कड़ी आलोचना की.

बढ़ती आलोचनाओं के बीच पुलिस ने सोशल मीडिया पर सफाई पेश करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दीं. शुरुआत में गौतम बुद्ध नगर पुलिस आयुक्तालय ने कहा कि वायरल वीडियो के मूल स्रोत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की गहन जांच चल रही है और पुष्टि होने पर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

हालांकि, कुछ समय बाद पुलिस ने अपना रुख बदलते हुए सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स को जवाब दिया कि इस वीडियो से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए एक राजपत्रित अधिकारी को नियुक्त किया गया है. साथ ही पुलिस ने यह दावा भी किया कि प्रथम दृष्टया यह वीडियो मॉर्फ्ड या AI द्वारा बनाया गया प्रतीत होता है और यह नोएडा का न होकर किसी अन्य स्थान का लगता है.

पुलिस का दावा ग़लत

न्यूज़ वेबसाइट ‘स्क्रॉल’ के पत्रकार आयुष तिवारी ने वायरल वीडियो को लेकर एक विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट किया. पुलिस का वीडियो AI-जनेरेटेड और नोएडा का नहीं होने का अनुमान गलत साबित हुआ. वायरल वीडियो में ऐसे कई एलिमेंट्स मौजूद हैं जो नोएडा के एक निश्चित जगहों को दिखाते हैं जिसे आयुष ने ग्राउन्ड पर जाकर पुष्टि की. उन्हें वायरल वीडियो में मौजूद एलिमेंट्स घटनास्थल पर ज्यों के त्यों मौजूद मिले. ये जगहें नोएडा के सेक्टर 6 में ब्लॉक A और ब्लॉक B में हैं.

पहला एलीमेंट

वायरल वीडियो की शुरुआत में नीले-हरे रंग के बाहरी हिस्से वाली एक इमारत दिखाई देती है, जिसके कांच से दो एयर कंडीशनर बाहर की तरफ निकले हुए दिखते हैं. स्क्रॉल के पत्रकार को जमीनी पड़ताल में कोहिनूर इंटरनेशनल के कार्यालय के ठीक उलटे दिशा में बिल्कुल वही नीले-हरे रंग की इमारत मिली, जो वीडियो में दिखाई गई इमारत के डिजाइन और बनावट से पूरी तरह से मेल खाती थी. नीचे वायरल वीडियो और स्क्रॉल के ग्राउंड रिपोर्ट में मौजूद तस्वीर का मिलान देखा जा सकता है.

दूसरा एलीमेंट

वायरल वीडियो में कैमरा जब बाईं ओर घूम रहा होता है तब एक बिल्डिंग पर ‘सिम्प्लेक्स’ लिखा हुआ बोर्ड देखा जा सकता है. जब रिपोर्टर ने घटनास्थल का मुआयना किया, तो उन्हें सड़क पर नीले-हरे रंग की इमारत से मात्र बीस मीटर की दूरी पर सिम्प्लेक्स पैकेजिंग लिमिटेड का कार्यालय और उसका वही साइनबोर्ड मिला. इसके विपरीत दिशा में केसरिया रंग के शेड वाली एक इमारत भी मिली, जिससे यह भी स्पष्ट हो गया कि वीडियो संभवतः उसी केसरिया शेड वाली इमारत से शूट किया गया था. नीचे वायरल वीडियो और स्क्रॉल के ग्राउंड रिपोर्ट में मौजूद तस्वीर का मिलान देखा जा सकता है.

तीसरा एलीमेंट

वायरल वीडियो में जब कैमरा जूम होता है, तब बिजली के खंबे पर एक सफेद रंग का कटआउट देखा जा सकता है, जिसपर एक माला लटकी हुई है. जब आयुष तिवारी नोएडा के सेक्टर 6 स्थित कोहिनूर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय के सामने पहुंचे, तो उन्हें ठीक वही खंभा और उसी प्रकार माला पहनाया गया सफेद कटआउट वहां मौजूद मिला. नीचे वायरल वीडियो और स्क्रॉल के ग्राउंड रिपोर्ट में मौजूद तस्वीर का मिलान देखा जा सकता है.

वायरल वीडियो में मौजूद इन सभी एलिमेंट्स का स्क्रॉल के पत्रकार की ज़मीनी पड़ताल में मिलान होना, उस वीडियो के नोएडा के सेक्टर 6 में कोहिनूर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय के पास शूट होने का एक पुख्ता प्रमाण है. इसके अलावा घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि यह वीडियो किसी भी प्रकार से एआई-जेनरेटेड या मॉर्फ्ड नहीं है. प्रत्यक्षदर्शियों ने आयुष तिवारी को अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि वीडियो में बिल्कुल वही दृश्य कैद हैं जो उन्होंने अपनी आंखों से पुलिस द्वारा महिलाओं पर किए गए हमले के दौरान देखे थे. इसलिए, नोएडा पुलिस द्वारा इस घटना को नोएडा का ना होकर, किसी अन्य स्थान का प्रतीत होता बताना या AI द्वारा बनाया गया बताना भ्रामक है.

स्क्रॉल की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है.

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