भारतीय जनता पार्टी ने 17 अगस्त को नए पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में अपने राष्ट्रीय स्तर की टीम में बड़े पैमाने पर फेरबदल की घोषणा की. इसमें एक नाम भाजपा हरियाणा के सोशल मीडिया हैंडलर रह चुके अरूण यादव का भी शामिल है. हरियाणा भाजपा के आईटी सेल प्रमुख के पद से निलंबित हो चुके अरुण यादव को अब नितिन नवीन के कोर टीम में सोशल मीडिया राष्ट्रीय सह-संयोजक के रूप में नियुक्त किया गया है.

अरुण यादव वही व्यक्ति हैं जिन्हें जुलाई 2022 में इस्लाम पर की गई एक भद्दी टिप्पणी के कारण हरियाणा भाजपा के आईटी सेल प्रमुख के पद से निलंबित कर दिया गया था. उनके एक पुराने विवादित पोस्ट का स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद पार्टी को यह सख्त कदम उठाना पड़ा था.

जिस पोस्ट के लिए 2022 में निलंबन हुआ था

अरुण यादव के विवादित बयानों का इतिहास काफी पुराना है. 2017 में उन्होंने मक्का स्थित काबा और व्हिस्की के गिलास की तस्वीर साझा करते हुए एक आपत्तिजनक पोस्ट करते हुए लिखा था कि उन्हें ‘शराब के पेग में पैगंबर दिखाई देते हैं.’ इस बयान को लेकर सालों तक सवाल उठते रहे. आखिरकार, लगातार बढ़ते दबाव के बीच 8 जुलाई 2022 को हरियाणा बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष ओ.पी. धनखड़ ने अरुण यादव को राज्य के आईटी सेल प्रमुख के पद से निलंबित कर दिया.

इस निलंबन की टाइमिंग भी बेहद अहम थी. यह कार्रवाई ठीक उस समय हुई थी जब एक महीने पहले ही तत्कालीन भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के कारण देश और दुनिया में भारी हंगामा हुआ था. एक टीवी डिबेट के दौरान भाजपा प्रवक्ता ने अपमानजनक टिप्पणी की थी. इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया था.

भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच, भाजपा ने अपने प्रवक्ता को ‘फ्रिंज एलिमेंट’ करार देते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसी हंगामे के अगले महीने, अरुण यादव के पुराने आपत्तिजनक पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. ऐसे संवेदनशील माहौल में, भाजपा ने किसी भी तरह का नया कूटनीतिक जोखिम न उठाते हुए तुरंत उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था. वर्ष 2022 में अरुण यादव का निलंबन एक तरह से इस बात की मौन स्वीकृति थी कि उनका एक पोस्ट उस मर्यादा को लांघ चुका था, जिसका सार्वजनिक तौर पर बचाव करने के लिए पार्टी उस समय तैयार नहीं थी.

हाल ही में पार्टी के भीतर अरुण यादव को सौंपी गई यह नई और बड़ी ज़िम्मेदारी एक गंभीर राजनीतिक संदेश देती है कि जिस अमर्यादित और भड़काऊ आचरण के कारण कभी उनकी ही पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था, वही आचरण अब संगठन में एक ऊँचा पद और बड़ी जिम्मेदारी हासिल करने में कोई रुकावट नहीं बना है.

विवादित बयानों का इतिहास

पिछले कुछ सालों में अरुण यादव की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नज़र डाली जाए तो उसमें एक पैटर्न साफ नजर आता है, जिसमें विपक्षी नेताओं पर अभद्र और नस्लभेदी टिप्पणियां करने, महिलाओं का चरित्र हनन करने और मुस्लिम अल्पसंख्यकों को सीधे तौर पर टारगेट कर सांप्रदायिक रूप से उकसाने के कई स्पष्ट उदाहरण मौजूद हैं.

“भारत से खुदा की विदाई तक खुदाई जारी रहेगी, खोदते रहो”

मई 2022 में अरुण यादव ने इस्लाम धर्म पर एक और आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘भारत से खुदा की विदाई तक खुदाई जारी रहेगी, खोदते रहो.’ ये पोस्ट ठीक उसी वक्त किया गया था जब ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था. उस दौरान हिंदू पक्ष दावा कर रहा था कि मस्जिद परिसर में ‘शिवलिंग’ मौजूद है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष द्वारा दायर मुकदमे को ट्रायल कोर्ट से हटाकर एक अधिक वरिष्ठ और अनुभवी ज़िला जज को सौंप दिया. ऐसे तनावपूर्ण कानूनी और सामाजिक माहौल के बीच, अरुण यादव का यह बयान केवल एक भड़काऊ पोस्ट या एक धर्म विशेष को अपमानित करना नहीं था, बल्कि यह देश भर में मस्जिदों वाली जगहों की ‘खुदाई’ को एक सुनियोजित अभियान के रूप में पेश करने की एक कोशिश थी.

“भूरी काकी की फसल”

अरुण यादव के निशाने पर राजनीतिक विरोधी भी रहे हैं. जनवरी 2023 में किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भाषण का एक वीडियो शेयर करते हुए उनके लिए “भूरी काकी की फसल” जैसे शब्दों का प्रयोग किया. यह टिप्पणी न केवल एक बेहद अपमानजनक व्यक्तिगत हमला थी, बल्कि स्पष्ट रूप से नस्लभेदी मानसिकता को भी दर्शाती है. इसका सीधा इशारा राहुल गांधी की माँ, सोनिया गांधी के इटालियन मूल की तरफ था. हालांकि, भाजपा नेताओं में यह कोई अपवाद नहीं है, अक्सर भाजपा नेताओं द्वारा राजनीतिक विरोध के नाम पर सोनिया गांधी के विदेशी मूल को निशाना बनाते हुए ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते देखा गया है.

“…उतना तो बेगम दूसरों द्वारा हलाला करने पर भी नहीं डरतीं”

मई 2022 के एक पोस्ट में अरुण यादव ने मस्जिदों के सर्वे और खुदाई का विरोध कर रही मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाते हुए उनपर भद्दी टिपण्णी की. अरूण यादव ने इसके लिए ‘हलाला’ जैसे संवेदनशील विषय का सहारा लेते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “जितना मस्जिद की खुदाई पर डर रहे हैं, उतना तो बेगम दूसरों द्वारा हलाला करने पर भी नहीं डरतीं.” भारत में ‘हलाला’ पहले से ही एक तीखी सार्वजनिक बहस का विषय रहा है. अरुण यादव के इस पोस्ट में इस शब्द का इस्तेमाल महज़ किसी टिप्पणी के तौर पर नहीं, बल्कि मुस्लिम महिलाओं को नीचा दिखाने के लिए एक ‘हथियार’ की तरह किया.

“जिनके अल्लाह दूसरों के चुराए और लूटे हुए मंदिरों में रहते हैं…”

मई 2022 में अरुण यादव ने इस्लाम और मुस्लिम समुदाय को सीधे तौर पर निशाने पर लेते हुए एक और बेहद भड़काऊ पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘जिनके अल्लाह दूसरों के चुराए और लूटे हुए मंदिरों में रहते हैं, वो जाहिल कौम कैसी होगी?’ यह महज़ मंदिर-मस्जिद विवाद पर की गई कोई आम टिप्पणी नहीं थी, बल्कि इस विवाद की आड़ में पूरे समूचे मुस्लिम समुदाय पर किया गया एक सीधा हमला था. अरूण यादव का ये पोस्ट काफी वायरल हुआ था.

“500 रुपये में नौ महीने का रिचार्ज किसने कर दिया?”

अरुण यादव द्वारा मुस्लिम महिलाओं को लगातार निशाना बनाने और उन पर ओछी टिप्पणियां करने के क्रम में सबसे शर्मनाक घटना मई 2020 में सामने आई. यह मामला जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा और एक्टिविस्ट सफूरा ज़रगर से जुड़ा था. सफूरा उस समय गर्भवती थीं और 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में UAPA के तहत जेल में बंद थीं. जब एक गर्भवती महिला को हिरासत में रखे जाने को लेकर देश-विदेश में आलोचना हो रही थी, ठीक उसी समय अरुण यादव ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए सफूरा की गर्भावस्था का भद्दा मज़ाक उड़ाते हुए उसकी तुलना मोबाइल रिचार्ज प्लान से की.

उनके चरित्र पर सीधा कीचड़ उछालते हुए यादव ने पोस्ट किया था, “500 रुपये में नौ महीने का रिचार्ज किसने कर दिया?” बात सिर्फ एक घटिया पोस्ट तक सीमित नहीं थी, अरुण यादव ने इस पोस्ट के नीचे आने वाले अन्य लोगों के अश्लील और भद्दे कमेंट्स का भी सक्रिय रूप से समर्थन किया. अरूण यादव ऐसे अकेले भाजपा नेता नहीं थे जिन्होंने सफूरा के गर्भावस्था पर ऐसी टिपण्णी की, कई भाजपा नेताओं ने सफूरा के गर्भावस्था पर ओछी टिपण्णी की थी.

भाजपा का आईटी सेल लंबे समय से गलत जानकारी फैलाने, मुस्लिम समुदायों को निशाना बनाने, रूढ़िवादी मानसिकता को बढ़ावा देने, विवादास्पद कंटेंट और ट्रोलिंग के लिए आलोचकों के नज़र में रहा है. इसी क्रम में सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले पोस्ट्स के कारण पूर्व में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके अरुण यादव को अब पार्टी के सोशल मीडिया सह-संयोजक के तौर पर पहले से भी ऊंचे पद पर नियुक्त कर दिया गया है.

नई नियुक्ति मिलते ही जब लोगों का ध्यान अरुण यादव के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड की ओर गया था, तब उन्होंने अपना X अकाउंट @BeingArun28 लॉक कर लिया था. उस समय यह अंदेशा जताया जा रहा था कि उन्होंने अपनी पुरानी विवादित बयानबाजी की जांच-पड़ताल से बचने के लिए और पुराने पोस्ट्स डिलीट करने के लिए ऐसा किया है.

अब वह आशंका बिल्कुल सच साबित हुई है. अरुण यादव ने अपना अकाउंट वापस पब्लिक तो कर दिया है, लेकिन उससे पहले उन्होंने बड़े पैमाने पर अपने पुराने पोस्ट्स डिलीट कर दिए हैं. उनके प्रोफाइल को देखने पर पता चलता है कि उन्होंने 60,000 से अधिक ट्वीट्स डिलीट कर दिए हैं. वर्तमान में उनके टाइमलाइन पर सबसे पुराना ट्वीट 19 अगस्त 2026 का ही ट्रेस किया जा सकता है, इससे पहले के सभी ट्वीट्स डिलीट कर दिए गए हैं. इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि अकाउंट को प्राइवेट करने का मुख्य उद्देश्य ही अपने पुराने विवादित पोस्ट्स को डिलीट कर ट्रैक रिकॉर्ड को साफ करना था. अकाउंट प्राइवेट करने के समय उनके टाइमलाइन पर 65.5 हज़ार पोस्ट्स थे और 22 अगस्त को चेक करने पर मात्र 2794 पोस्ट थे.