छत्तीसगढ़ के रायपुर में श्री गुजराती इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में काजल शिंगला उर्फ काजल ‘हिंदुस्तानी’ ने स्कूली छात्राओं से “दुर्गा बन, तू काली बन, कभी न बुर्के वाली बन” और “धर्म की रक्षा कौन करेगा? “हम करेंगे, हम करेंगे” जैसे नारे लगवाए.

इस आयोजन का एक वीडियो काजल शिंगला ने अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट किया. 16 सितंबर को किये गए इस फ़ेसबुक पोस्ट में काजल ने कहा, “लव जिहाद-मुक्त भारत” अभियान ने अब काफी तेज़ी पकड़ ली है और यह स्कूलों और कॉलेजों तक भी फैल रहा है. रायपुर (छत्तीसगढ़) के एक स्कूल में हिंदू छात्राओं के लिए एक खास सेशन आयोजित किया गया, जिसमें हमने उन्हें ‘लव जिहाद’ नाम की इस्लामिक षड्यंत्र से अवगत करवाया तथा समाधान पर भी चर्चा की. हमारा संकल्प- लव जिहाद मुक्त भारत”

जिस स्कूल में यह विवादित कार्यक्रम हुआ, वह रायपुर के देवेंद्र नगर इलाके में स्थित श्री गुजराती इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल है, जो शहर के पुराने प्राइवेट स्कूलों में गिना जाता है. इस स्कूल का संचालन श्री गुजराती शिक्षण संघ द्वारा किया जाता है और इसकी पहचान गुजराती समाज की शैक्षणिक संस्था के रूप में भी रही है.

इस वीडियो के सामने आने के बाद कई लोगों के सोशल मीडिया पर इसको लेकर आपत्ति दर्ज कराई और स्कूल के बच्चों के मन में एक समुदाय के प्रति नफरत भरने को लेकर इसकी आलोचना भी की.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में हुसैनी सेना ने गुजराती स्कूल प्रबंधन और काजल हिंदुस्तानी दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. हुसैनी सेना के जिला अध्यक्ष मोहम्मद आमिर ने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम छात्रों को बाहर निकाल दिया गया था और छात्र-छात्राओं से इस्लाम धर्म और मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नारे लगवाए गए.

एक शैक्षणिक संस्थान के अंदर, स्कूल यूनिफॉर्म पहने नाबालिग छात्राओं से इस तरह के सांप्रदायिक नारे किसकी अनुमति और निगरानी में लगवाए गए, अब तक इसको लेकर कोई स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है. ना ही स्कूल प्रबंधन की तरफ से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है कि यह कार्यक्रम किस मौके पर, किस अनुमति के साथ और किसके निमंत्रण पर आयोजित किया गया था.

अगर विद्यालय प्रशासन ने स्वयं ऐसे आयोजन की अनुमति दी, तो यह सीधे तौर पर शिक्षा संस्थानों के अंदर एक समुदाय के प्रति नफरत को बढ़ावा देती है, इसके साथ ही यह बाल संरक्षण के सिद्धांतों का उल्लंघन भी है. ऑल्ट न्यूज़ ने श्री गुजराती इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल प्रशासन से इस मामले को लेकर संपर्क किया लेकिन हमें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.

IBC24 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल के अध्यक्ष पटेल ने कहा कि इस आयोजन में कुछ भी गलत नहीं था और किसी को इसमें कोई आपत्ति होनी भी नहीं चाहिए.

छोटे बच्चों पर बुरा असर

साल 2022 में अलाप्पुझा में हुई एक घटना में ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया’ की एक रैली में एक नाबालिग लड़के को एक व्यक्ति के कंधों पर बिठाकर दूसरे धार्मिक समुदायों के ख़िलाफ़ भड़काऊ और नफ़रत भरे नारे लगवाए गए. इस मामले की सुनवाई के दौरान, केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पी. गोपीनाथ ने छोटे बच्चों पर इस तरह की विचारधारा थोपने से होने वाले मानसिक नुकसान पर कहा था, “क्या वे ऐसी नई पीढ़ी तैयार नहीं कर रहे हैं जो मन में इसी धार्मिक नफ़रत के साथ बड़ी होगी? मैं बस यही सोच रहा था कि जब यह बच्चा बड़ा होकर बालिग़ होगा, तो उसका मन पहले से ही इस तरह की बातों का आदी हो चुका होगा. बच्चों को ऐसी घटनाओं से बचाना चाहिए जो उनके कोमल मन पर बुरा असर डाल सकती हैं, इसके कभी न बदलने वाले और लंबे समय तक रहने वाले नतीजे हो सकते हैं.”

ये वीडियो लगभग 2 हफ्तों से ऑनलाइन है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इस मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं.

पूर्व में मध्य प्रदेश के विदिशा में एक स्कूल में “जय श्री राम” जैसे धार्मिक नारे लगाने पर छात्रों को दंडित किए जाने के मामलों में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया था और जिला प्रशासन को नोटिस भी भेजा था. लेकिन जब बात किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाले नारे नाबालिग छात्राओं से लगवाने की आती है, तो अब तक न तो एनसीपीसीआर और न ही छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की ओर से रायपुर की इस घटना पर कोई स्वतः संज्ञान या नोटिस सामने आया है. जबकि यह वीडियो सार्वजनिक तौर पर आरोपी के प्रोफ़ाइल पर मौजूद है.

नफरती भाषणों का जाना-माना इतिहास होने के बावजूद, स्कूल प्रसाशन द्वारा काजल हिन्दुस्तानी को नाबालिग छात्राओं से संवाद करने और उनसे शपथ दिलवाने का मंच दिया गया. स्कूल परिसर में बच्चों से “दुर्गा बन तू, काली बन, कभी न बुर्के वाली बन” जैसे नारे लगवाकर एक पूरे समुदाय की पोशाक और पहचान को नकारात्मक रूप से पेश किया गया.

ये पहली बार नहीं

काजल हिंदुस्तानी के भाषण अक्सर विवादों में घिरे रहे हैं. ज़्यादातर वह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ नफरती भाषण देती हुई पाई गई हैं. गुजरात के ऊना में रामनवमी के मौके पर दिए गए एक भड़काऊ भाषण के बाद उन्हें गिरफ़्तार किया गया था, क्यूंकि उस भाषण ने वहां सांप्रदायिक झड़पों को हवा दी थी. इसी प्रकार कई राज्यों में इनके खिलाफ नफरती भाषण देने के आरोप में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है.

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यह पहली बार नहीं है जब काजल हिन्दुस्तानी ने बच्चियों के सामने ऐसे भाषण दिए हैं, उनके फ़ेसबुक अकाउंट पर ऐसे कई वीडियोज़ मौजूद हैं जिसमें उन्हें नाबालिग लड़कियों से ऐसे शपथ दिलवाते हुए और एक समुदाय के प्रति नफरती नारे लगवाते हुए देखा जा सकता है.

महाराष्ट्र, लातूर में स्कूल की बच्चियों से लगवाए नारे

30 अप्रैल, 2026 को काजल ने ऐसे ही नफ़रती नारे लगवाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें स्कूल यूनिफ़ॉर्म में बच्चियाँ नज़र आ रही हैं. पोस्ट में लिखा है, “महाराष्ट्र के लातूर में स्कूल की बच्चियों को लव जिहाद रूपी इस्लामिक षडयंत्र से अवगत करवाया. हमने कहा, सलमा से सावधान और सलीम से दूरी, यह पाठ है बहुत जरूरी.”

महाराष्ट्र, महेश्वरी समाज की 15 से 25 साल की लड़कियों द्वारा आयोजित कार्यक्रम

23 जून, 2026 को पोस्ट किये गए एक वीडियो में काजल को स्टेज से ऐसे ही नारे लगवाते हुए देखा जा सकता है. अपने फ़ेसबुक पोस्ट में काजल खुद बताती हैं कि इस कार्यक्रम का आयोजन 15 से 25 साल की लड़कियों ने किया था. पोस्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में महेश्वरी समाज के सहयोग से, श्री महेश्वरी किशोरी मंडल द्वारा ‘लव जिहाद’ पर सेशन का आयोजन किया गया था.

जोधपुर, गीता परिवार द्वारा 10-23 वर्ष लड़कियों के लिए आयोजित कार्यक्रम

इसी प्रकार, 4 जून को काजल ने ऐसा ही एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्हें स्टेज से इसी प्रकार के नारे लगाते हुए देखा जा सकता है. इस वीडियो के कैप्शन में काजल ने बताया है कि राजस्थान के जोधपुर में गीता परिवार जोधपुर शाखा द्वारा आयोजित किशोरी व्यक्तित्व विकास शिविर में 10-23 उम्र की बच्चियों को ‘लव जिहाद’ के षडियंत्र से अवगत करवाया तथा समाधान पर भी चर्चा की. “बेटियों ने ‘लव जिहाद’ के समूल नाश की शपथ ली.”

नागपुर, परभणी में छोटी बच्चियों की मौजूदगी में नफरती नारे

इसी प्रकार काजल हिंदूतानी ने महाराष्ट्र के नागपुर और परभणी से भी ऐसे ही वीडियो पोस्ट किये जिसमें उन्हें नाबालिग बच्चियों की मौजूदगी में एक समुदाय के प्रति नफरती नारे लगवाते हुए देखा जा सकता है.

गुजरात, इंडस यूनिवर्सिटी में काजल शिंगला का ‘विशेष सत्र’

2 सितंबर को काजल ने ऐसा ही वीडियो पोस्ट किया. कैप्शन में बताया है कि गुजरात के कर्णावती में इंडस यूनिवर्सिटी ने कॉलेज की लड़कियों के लिए एक खास सेशन आयोजित किया था. उन्होंने ‘रील नहीं, रियल बनो’ विषय पर अपने विचार रखे और लड़कियों को सोशल मीडिया के बुरे असर और ‘लव जिहाद’ की ‘इस्लामिक साज़िश’ के बारे में जागरूक किया, साथ ही इसके समाधान पर भी चर्चा की. पोस्ट के मुताबिक, कॉलेज की लड़कियों ने ‘लव जिहाद’ को पूरी तरह खत्म करने की शपथ भी ली.

इंडस यूनिवर्सिटी और वेस्टर्न इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ एरनॉटिक्स ने काजल हिन्दुस्तानी के स्वागत का वीडियो अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया है.

हेट स्पीच पर नज़र रखने वाली संस्था इंडिया हेट लैब की 2025 की रिपोर्ट में काजल हिन्दुस्तानी का नाम टॉप 10 में गिना गया है. 2024 की रिपोर्ट में भी काजल हिन्दुस्तानी का नाम नफरती और खतरनाक भाषण देने वालों की लिस्ट में मौजूद रहा. वहीं, इंडिया हेट लैब की 2023 की रिपोर्ट में काजल हिन्दुस्तानी का नाम नफरती भाषण देने वालों की लिस्ट में सबसे टॉप पर था और खतरनाक भाषण देने वाली लिस्ट में उनका नाम टॉप 3 में शामिल रहा.