“जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में “पंचर बनाने वाले” और “ताला बनाने वाले” लोग ज़्यादा थे.”

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य रमेश बिधूड़ी ने ये बातें दिल्ली के तुगलकाबाद में आयोजित ‘Gen-Z समिट’ के दौरान कही. उनका ये बयान जंतर-मंतर में नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन में शामिल होने वालों को लेकर था. भारत में “पंचर बनाने वाले” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कई बार मुस्लिम समुदाय के लिए अपमानजनक या सांप्रदायिक संदर्भ में किया जाता रहा है. उन्होंने कहा, “आपको पता ही है, पंचर और चाबी बनाने वाले कौन हैं.”

भाजपा द्वारा 2 अगस्त 2026 को दक्षिण दिल्ली के तुगलकाबाद ग्राउंड में Gen-Z सम्मेलन आयोजित किया गया था, कार्यक्रम में दिल्ली के गृह, विद्युत और शिक्षा मंत्री आशीष सूद मुख्य अतिथि थे, जबकि रमेश बिधूड़ी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया. इस कार्यक्रम में रमेश बिधूड़ी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल हुए छात्रों पर और प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणियों पर ये कहा, “देश की आबादी इतनी है कि बरगला कर, बहका कर वहां (जंतर-मंतर) पर 20-50 हज़ार बच्चों को वो, जो बेरोजगार पंचर लगाने वाले वहां पर ज्यादा थे, ताला बनाने वाले वहां पर ज्यादा थे. पंचर लगाने वाले मालूम ही है आपको, वो लोग वहां पर ज्यादा थे और छात्र लोग वहां पर कम थे ये भी मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं.”

आगे रमेश बिधूड़ी कहते हैं, “क्या भारत की बेटी या भारत का बेटा मोदी जी के बारे में उनके परिवार के बारे में इस प्रकार की बातें कर सकते हैं क्या? वो पंचर लगाने वाले की ही औलादे होंगी, पंचर लगाने वालों के ही खानदान होंगे, जो मोदी जी के बारे में इस प्रकार की बातों का उपयोग कर रहे थे.”

रमेश बिधूड़ी का यह बयान 31 जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक और एक्स पर पोस्ट किए एक वीडियो के संदर्भ में सामने आया. वीडियो में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती बच्चों ने उन्हें और उनकी दिवगंत माँ को भद्दी गालियां और अपशब्द कहे और उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवा लड़कियों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को एक कल्चरल शॉक (सांस्कृतिक आघात) बताते हुए उन गुमराह युवाओं को सही राह दिखाने और माफ करने की अपील की.

‘जंतर-मंतर प्रदर्शन में मिसगाइडेड Gen-Z’

रमेश बिधूड़ी ने मीडिया को बयान देते हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन के छात्रों को भटका हुआ और मिसगाइडेड Gen-Z बताया और कहा, “उसको तथ्यों से अवगत नहीं कराया गया था और उन बच्चों को 15 साल 16 साल के बच्चों को मिसगाइड करके वहां पर लाया गया था. जो नीट के नाम से अगर वह वहां पर धरना रखने की कोशिश की गई थी, तो वहां पर जो मृत बच्चों की फोटो लगाई गई थी वो इमोशनली पेरेंट्स को और सबको ब्लैकमेल करके वहां पर बुलाया गया था, लेकिन जब उनकी जो मांगे थी वो मांगे क्या थी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो, नीट के बारे में क्या किया जाए वो उनकी कोई मांग नहीं थी.”

आगे उन्होंने कहा, “देश के प्रधानमंत्री ने उनकी मांगों को स्वीकार किया कि देश भटकाव की तरफ ना चला जाए आंदोलन गलत आंदोलन गलत लोगों के हाथों में ना चला जाए जिस नियत मानसिकता से आंदोलन रख लेने की उन्होंने कहा था, उस नियत से आंदोलन नहीं रखा गया था वो विपक्ष के सहयोग लेकर भारत में अव्यवस्था फैलाने के लिए आंदोलन था.”

‘बिना टोपी के कलावा बांधकर लाए गए लोग’

टाइम्स नाउ के पत्रकार ने 2 अगस्त को जब रमेश बिधूड़ी से पंचर लगाने वाले बयान पर सवाल किया तो जवाब में उन्होंने कहा, “वो लोग सीलमपुर, जाफराबाद, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से लाए हुए ऐसे लोग थे जिनको कहा गया था कि टोपी पहनकर भी नहीं आएंगे, कलावा बांधकर आएंगे और वहां पर वह छात्र तो केवल 15-20% थे. वह मैं पहले दिन से कह रहा था.” उन्होंने आगे कहा “जेन्युइन स्टूडेंट थे, कम थे. जेन्युइन स्टूडेंट थे, उन्होंने उसका अपोज भी किया और कैमरे पर बोल कर गए थे, हम नीट के लिए आए हैं यहां पर हिंदुओं को क्यों गाली दी जा रही है.”

संसद में बतौर सांसद “कटुवा” और “मुल्ले” शब्द का प्रयोग

यह पहली बार नहीं है जब रमेश बिधूड़ी अपने किसी बयान को लेकर विवादों में आए हों, इससे पहले भी वे कई मौकों पर आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं, जैसे कि सितंबर 2023 में संसद में एक बहस के दौरान, तत्कालीन भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने तत्कालीन विपक्षी बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कुंवर दानिश अली (2024 में कांग्रेस में शामिल हुए) को “कटुवा” और “मुल्ले” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियों के साथ “उग्रवादी” और “आतंकवादी” कहा था.

इतना ही नहीं, ऊपर दिए गए वीडियो के अंत में रमेश बिधूड़ी कुंवर दानिश अली को स्पष्ट रूप से धमकी देते हुए कहते है, “इसकी बातें नोट करते रहना, मैं बाहर देखूंगा इस मुल्ले को.”

हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2015 में लोकसभा की पांच महिला सांसदों ने ⁠रमेश बिधूड़ी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और लिंगभेदी भाषा का उपयोग करने की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष के पास दर्ज कराई थी.

किसानों को दलाल कहा

इसके अलावा, दिसंबर 2020 में किसान आंदोलन के दौरान भी रमेश बिधूड़ी ने सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने किसानों की संख्या पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन कर रहे किसानों को ‘दलाल’ कहा और आरोप लगाया कि बॉर्डर पर किसान कनाडा और पाकिस्तान से रुपये मिलने व फ्री के खाने-पीने मिलने पर आंदोलन में बैठे हुए है.

‘आतिशी ने अपना बाप बदल लिया’

5 जनवरी, 2024 को रमेश बिधूड़ी ने दिल्ली के रोहिणी में हुई भाजपा की परिवर्तन रैली में कहा था कि ‘आतिशी ने अपना बाप बदल लिया है वे मार्लेना से सिंह बन गई हैं.’ उस वक्त आम आदमी पार्टी की आतिशी दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं.

एक तरफ पीएम मोदी देश के बच्चों को लेकर रील बना देते हैं कि उन्होंने गालियां दी जो शोभा नहीं देता, वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नेता सालों से महिलाओं और मुसलमानों के खिलाफ़ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते आ रहे हैं.