29 सितंबर को पत्रकार पीयूष राय ने एक वीडियो शेयर किया. इसमें वाराणसी में बाबा लाट भैरव जुलूस के दौरान कुछ महिला कलाकारों को नाचते हुए देखते और रिकॉर्ड करते कई पुलिस अधिकारी दिखाई दिए.

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो की वजह से विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूज़र्स ने पुलिसकर्मियों के बर्ताव की कड़ी आलोचना की. यहां तक कि राईटविंग सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भी इस हरकत को “अश्लील और भद्दा” बताते हुए इसे “धार्मिक भावनाओं का अपमान” करने वाला करार दिया.

बढ़ते आक्रोश के बीच, काशी के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) के X हैंडल ने पीयूष राय को जवाब देते हुए दावा किया कि ये वीडियो पुलिस की छवि खराब करने के लिए AI से बनाया गया था और चेतावनी दी कि इस मामले में कार्यवाही की जाएगी.

DCP के X पोस्ट में लिखा था, “…उपरोक्त वीडियो AI जनरेटेड है जो पुलिस की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रसारित किया जा रहा है।भीड़ द्वारा बनाई जा रही मोबाइल वीडियोज में किसी भी स्क्रीन में पीछे खड़ी पुलिस नहीं दिखायी दे रही है।भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के अपराध में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जाएगी.” (आर्काइव)

एक अलग वीडियो बयान में, डिप्टी कमिश्नर गौरव बंशवाल ने कहा कि जो कोई भी “गुमराह करने वाला वीडियो” फैलाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और आदमपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. (आर्काइव)

फ़ैक्ट-चेक

पुलिस के बयान से ये साफ़ नहीं है कि उनका दावा क्या है— क्या घटना का पूरा वीडियो AI से बनाया गया है, या सिर्फ़ वह हिस्सा जिसमें पुलिसकर्मी परफ़ॉर्मेंस देखते और रिकॉर्ड करते हुए दिख रहे हैं, उसे वो AI बात रहे. लेकिन ‘ऑल्ट न्यूज़’ को पता चला कि वायरल क्लिप में मौजूद एक डांसर ने अपने इंस्टाग्राम पेज @queen__juhi_002__ पर इस इवेंट के कई वीडियोज़ पोस्ट किए थे.

डांसर द्वारा अपलोड किए गए कम से कम चार वीडियोज़ में डांसर वही कपड़े पहने दिख रही है जो पीयूष राय की X पोस्ट में दिखे थे. इन सभी वीडियोज़ में डांसरों के आस-पास पुलिसकर्मी दिख रहे हैं, जो परफ़ॉर्मेंस देख रहे हैं और कुछ उसे फ़िल्मा भी रहे हैं. हालांकि, ये आर्टिकल लिखे जाने के समय डान्सर का इंस्टाग्राम पेज हटा दिया गया था. लेकिन इससे पहले हमने उसके पोस्ट किए गए एक वीडियो की स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली थी, जिसमें सभी परफ़ॉर्मर वही कपड़े पहने हुए दिख रहे हैं.

ध्यान से देखने पर पता चलता है कि पुलिसकर्मी मंच पर और मंच के नीचे भी दिखाई दे रहे हैं. नीचे फ़ोन रिकॉर्डिंग के वे हिस्से दिखाए गए हैं जिनमें डांसर साफ़ तौर पर नज़र आ रहे हैं. एक फ़्रेम में दर्शकों में से एक व्यक्ति वीडियो कॉल पर भी दिख रहा है.

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नीचे दिए गए कोलाज में वीडियो से लिए गए कई स्क्रीनशॉट हैं जिनमें डांसर्स को रिकॉर्ड कर रहे दर्शकों के फोन स्क्रीनों पर पुलिसकर्मी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं. यह सीधे तौर पर काशी के डीसीपी के इस दावे का खंडन करता है कि मोबाइल वीडियो में कोई भी पुलिसकर्मी दिखाई नहीं दे रहा था.

डांसर और पीयूष राय द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो का बैकग्राउंड भी एक जैसा है. नीचे दो स्क्रीनशॉट दिए गए हैं जिनमें पीयूष राय के वीडियो के एक की-फ़्रेम और डांसर द्वारा पोस्ट किए गए की-फ़्रेम की तुलना की गई है.

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एक और इंस्टाग्राम यूज़र, @aman_bhu_2427, ने उसी परफ़ॉर्मेंस में उन्हीं डांसर्स का एक अलग ऐंगल दिखाया गया है. वीडियो पर लिखे टेक्स्ट से पता चलता है कि इसे लाट भैरव मंदिर में शूट किया गया था. वीडियो में स्टेज पर डांसर्स के आस-पास कई पुलिसकर्मी जमा दिख रहे हैं और उनमें से कुछ अपने फ़ोन से परफ़ॉर्मेंस को रिकॉर्ड करते हुए भी नज़र आ रहे हैं.

सुशीला सेठ नाम की एक और इंस्टाग्राम यूज़र ने भी वर्दी पहने कई पुलिसकर्मियों के बीच डांसर्स का एक वीडियो पोस्ट किया.

 

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हमें फ़ेसबुक पर एक और वीडियो मिला, जिसमें स्टेज का ढांचा साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा है और उसके पीछे एक लाल मंदिर भी दिख रहा है.

कुल मिलाकर, खुद डांसर्स और वहां मौजूद लोगों के पोस्ट किए गए वीडियो से तीन बातें साबित होती हैं:

  1. ये घटना बाबा लाट भैरव के जुलूस के दौरान हुई थी. कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इसी कार्यक्रम के अलग-अलग ऐंगल से लिए गए वीडियो पोस्ट किए थे.
  2. वर्दी पहने पुलिसकर्मी स्टेज पर और स्टेज के नीचे खड़े होकर डांसर्स की परफॉर्मेंस देख रहे थे.
  3. एक से ज़्यादा पुलिसकर्मी परफॉर्मेंस को रिकॉर्ड करते हुए देखे गए.

यानी, काशी के DCP का ये दावा ग़लत है कि वीडियो AI-जनरेटेड है.

ग़लत
दावा:
वाराणसी में बाबा लाट भैरव जुलूस के दौरान डांसर्स को रिकॉर्ड करते पुलिसकर्मियों का वायरल वीडियो

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