भाजपा दिल्ली के मीडिया हेड नवीन कुमार ने 28 अप्रैल को एक वीडियो ट्वीट किया. इसमें वो बता रहे हैं कि कैसे दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत के बीच एक ऑक्सीजन प्लांट को बंद करवा दिया है. वो बता रहे हैं कि इस प्लांट से रोज़ कम से कम 500 सिलिंडर की पूर्ति की जा सकती है लेकिन इसे बंद करने के बाद दिल्ली सरकार अब प्लांट के मालिक धर्मेन्द्र को NOC नहीं दे रही है. आगे वो ये भी कहते हैं, “कितनी बड़ी ये लापरवाही है कि एक व्यक्ति, जो लोगों की जान बचाने के लिए तैयार है, 500 सिलिंडर रोज़ बना सकता है, उसकी व्यवथा नहीं कर रही लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के जजों के लिए 100 कमरे 5 स्टार में बना देंगे…”

वो आगे प्लांट के मालिक धर्मेन्द्र से बात कर रहे हैं. धर्मेन्द्र को कहते सुना जा सकता है, “20 तारीख़ से कोई कोई कच्चा माल नहीं आया..इसे SDM ने अंडरटेक किया है…जो हमारे भरे सिलिंडर थे ऑक्सीजन के, वो सारे ले लिए हैं.” इसके बाद धर्मेन्द्र जैसे ही बोलना शुरू करते हैं कि खाली सिलिंडर (सामने सिलिंडर की तरफ़ इशारा करते हुए) भी उनके अंडर में थे लेकिन रिलीज़ आर्डर दे दिया गया, नवीन कुमार उनकी बात को काट देते हैं. ये ट्वीट 12,000 से ज़्यादा लोग शेयर कर चुके हैं.

इसे कोट-ट्वीट करते हुए भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने लिखा, “@naveenjindalbjp भाई, आपने दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत की सच्चाई का पर्दाफ़ाश किया है.”

भाजपा दिल्ली के सोशल मीडिया प्रभारी विनीत गोएनका समेत कई यूज़र्स ने भी इसी दावे के साथ ये वीडियो शेयर किया कि केजरीवाल सरकार ऑक्सीजन की किल्लत बढ़ाने में भूमिका निभा रही है

ये वीडियो फ़ेसबुक पर भी शेयर किया जा रहा है.

प्लांट के मालिक ने भाजपा सदस्यों का दावा बताया फ़र्ज़ी

हमने इस बारे में रिपोर्ट्स सर्च कीं और पाया कि ETV भारत ने इस पूरे मामले को कवर किया है. आउटलेट ने 21 अप्रैल, 2021 को रिपोर्ट किया था कि नज़फ़गढ़ प्रशासन को इलाके में अवैध रूप से ऑक्सीजन सिलिंडर बेचने की जानकारी मिली थी. इसके बाद SDM विनय कौशिक ने पुलिस की टीम के साथ नंगली में कई जगहों में छापा मारा था. पुलिस को अलग-अलग जगहों पर ऑक्सीजन सिलिंडर मिले जिनकी कालाबाज़ारी चल रही थी. अम्बे गैस इंटरप्राइज़ेज़ के प्लांट पर छापा मारा गया और वहां से भी सिलेंडर जब्त किये गए थे. NDTV और दैनिक जागरण ने भी ये मामला रिपोर्ट किया था.

वीडियो रिपोर्ट में नज़फ़गढ़ के SDM का बयान भी है. उन्होंने बताया कि टीम को सिर्फ़ सिलिंडर की जानकारी थी लेकिन टीम को छापा मारने के दौरान फ़िलर पॉइंट भी मिला है. विनय कौशिक ने बताया कि इस छापे में 140 ऑक्सीजन सिलिंडर बरामद हुए हैं और सभी भरे हुए सिलिंडर स्थानीय हॉस्पिटल को दे दिए जायेंगे.

जब नवीन कुमार ने वीडियो बनाकर वायरल किया और दिल्ली सरकार पर ऑक्सीजन प्लांट बंद करने का आरोप लगाया तो ETV ने इस मामले का फ़ॉलो-अप लेते हुए दोबारा SDM और अम्बे गैस एंटरप्राइज़ेज़ के मालिक धर्मेन्द्र से बात की. 30 अप्रैल की रिपोर्ट में मामले के ताज़ा घटनाक्रम से अवगत कराया गया है जिसके मुताबिक, महामारी की स्थिति देखते हुए प्रशासन ने धर्मेंद्र को दोबारा ऑक्सीजन प्रोडक्शन की इजाज़त दे दी.

SDM विनय कौशिक ने बताया, “दिल्ली की जो एनलिस्टेड रीफ़िलिंग यूनिट्स हैं उनमें इनका (अम्बे गैस) नाम नहीं था. ये पानीपत के कपिल एंटरप्राइज़ेज़ से लिक्विड ऑक्सीजन लाया करते थे… अभी उच्च अधिकारियों ने रीफ़िलिंग यूनिट्स की सूची बनाई है, उसमें इनका नाम नहीं है तो इनको यहां से भी ऑक्सीजन नहीं मिल रही… धर्मेन्द्र भी लिक्विड ऑक्सीजन पानीपत से दोबारा मंगवाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन डिप्टी कमिश्नर, पानीपत ने सप्लाई रोक दिया है. धर्मेन्द्र और हम लोग भी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि रीफ़िलिंग का काम जल्दी शुरू हो पाए.” जब उनसे पूछा गया कि वायरल वीडियो में क्या सच्चाई है तो विनय कौशिक ने कहा कि ये राजनीतिक प्रोपगेंडा है और हमारी इसपर कोई राय नहीं है.

नवीन कुमार द्वारा किये गये दावे को ग़लत बताते हुए धर्मेन्द्र ने कहा, “NOC का कोई मसला ही नहीं है हमारा. वो (नवीन कुमार) अपने तरीके से वीडियो डाल रहे हैं.” उन्होंने आगे बताया कि SDM हर तरीके से हमारी मदद कर रहे हैं.

ऑल्ट न्यूज़ ने धर्मेद्र कुमार से संपर्क किया और इस मामले के बारे में पूछा. उन्होंने हमें बताया, “मैं इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन का पहले से ही उत्पादन करता आ रहा हूं जिसका मेरे पास पूरा लीगल लाइसेंस है और GST भी देता हूं. लेकिन कोविड आने के बाद दिल्ली सरकार ने हमारे सिलिंडर उठा लिये और वीडियो वायरल कर दिया कि अवैध चल रहा था, और इल्लीगल तौर से लिक्विड मंगाया जा रहा था. जो हमारे पास लिक्विड था, वो हमने दे दिया. जैसा कहा गया. उसके बाद से आजतक हमें लिक्विड नहीं मिला और न हॉस्पिटल अटैच हुआ है, न लिक्विड एलोकेट हुआ है.”

और जहां तक बात है फ़िलिंग पॉइंट में सूचित होने की, उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता फ़िलिंग पॉइंट को लिस्ट करने का कोई सिस्टम है. और अगर है तो मैं खुद कह रहा हूं कि मैं फ़ॉर्मेलिटी के लिए तैयार हूं. मुझे भी इन्लिस्ट कर दिया जाये.” उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रोडक्शन की अनुमति हमें नहीं थी तो हमने 20 अप्रैल को ही कड़कड़डूमा जाकर 1 महीने की अनुमति ली थी. हालांकि अभी तक उन्हें लिक्विड ऑक्सीजन नहीं मिला है. न पानीपत से और न ही दिल्ली सरकार से.

इस मामले में अपडेट आने पर इस रिपोर्ट में हम उसे जोड़ते जायेंगे. लेकिन जहां तक बात भाजपा सदस्यों के दावे की है, उनके दावे निराधार हैं और मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश की गयी. ये भी बता दें कि दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट जजों और अधिकारियों को अशोका होटल में कोविड केयर सुविधा देने का अपना फ़ैसला वापस ले लिया है. हालांकि ये फैसला हाई कोर्ट के ये कहने के बाद वापस लिया गया कि उन्होंने ऐसी कोई मांग रखी ही नहीं थी.


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