24 जुलाई को, गाज़ियाबाद के रहने वाले राष्ट्रीय हिंदू वीर सेना के प्रमुख सत्यम पंडित ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक वीडियो अपलोड किया जिसमें उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन से जुड़े दो छात्र प्रदर्शनकारियों को परेशान करते, गाली देते और पीटते हुए दिखते हैं. कैप्शन में दावा किया गया है कि वो कुछ कॉकरोचों को “इलाज” देने के लिए जंतर-मंतर गए थे जो स्पष्ट रूप से हिंसा का संदर्भ था. इसमें कहा गया है, जंतर-मंतर पर जाकर कुछ कॉकरोचों का इलाज करा जो कहते हैं करके दिखाते हैं #hindu #muslim #cockroachjantaparty #sanatan #bharat.”
बाद में टेलीविज़न इंटरव्यूज में उपस्थित होकर, सत्यम पंडित ने CJP आंदोलन को राष्ट्र-विरोधी और हिंदू-विरोधी बताते हुए अपना बचाव किया.
16 साल के आयुष रंजन (जिन्हें सत्यम पंडित और उनके साथियों ने परेशान किया था) ने इस घटना के बारे में बात की. आयुष ने बताया कि वो 23 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों के समर्थन में शामिल होने के लिए यूपी के बरेली से दिल्ली के जंतर-मंतर आए थे. रात में पास के एक गुरुद्वारे में रुकने के बाद, वो अगली सुबह अपने दोस्त राहुल पाल के साथ जंतर-मंतर वापस जा रहे थे, तभी राष्ट्रीय हिंदू वीर सेना के सदस्यों ने उन्हें रोक लिया. आयुष का दावा है कि सत्यम पंडित के साथ पांच और लोग थे जिन्होंने उन्हें परेशान किया, उनका वीडियो बनाया और उनके दोस्त की पिटाई भी की. उन्होंने कहा कि वो पास मौजूद पुलिस के पास नहीं जा सके, क्योंकि उन्हें डर था कि पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करेगी.
इस घटना के बाद, सत्यम पंडित के कानून को हाथ में लेने की इस हरकत की कड़ी निंदा की गई.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X पर घटना का वीडियो शेयर किया और आरोपी की गिरफ़्तारी की मांग की.
देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी… pic.twitter.com/DASFibVr11
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 25, 2026
आप नेता संजय सिंह ने भी इस क्लिप को आगे बढ़ाया और सवाल उठाया कि ऐसे “गुंडे” राष्ट्रीय राजधानी में खुलेआम कैसे घूम रहे हैं.
अरे ये कौन चिरकुट है भाई?@Uppolice कहाँ सो रही है?
ये गुंडे खुलेआम देश की राजधानी में कैसे घूम रहे हैं? @DelhiPolice ये कहाँ की घटना है? https://t.co/pymVOCZJBG— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) July 25, 2026
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने 29 जुलाई को पुलिस में शिकायत दर्ज़ कराई. उन्होंने कहा कि सत्यम पंडित के खिलाफ़ आधिकारिक शिकायत का इंतज़ार करने के बजाय पुलिस खुद ही इस घटना का संज्ञान ले सकती थी.
CJP आंदोलन देश-विरोधी और हिंदू-विरोधी: सत्यम पंडित
‘आज तक‘ के एक इंटरव्यू में सत्यम पंडित ने अपनी हरकतों के लिए कोई पछतावा नहीं दिखाया. उनके मुताबिक, CJP आंदोलन न सिर्फ़ देश-विरोधी नारों और गतिविधियों का अड्डा बन गया था, बल्कि इसमें “हिंदू-विरोधी” भावनाएं भी शामिल हो गई थीं. एक मौके पर उन्होंने ग़लत दावा किया कि हिंसक प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी की मौत हो गई थी जिसे बाद में बातचीत करने वाले व्यक्ति ने सुधारा. वायरल क्लिप रिकॉर्ड होने से पहले क्या हुआ था, इस बारे में बात करते हुए सत्यम पंडित ने कहा कि उन्होंने उस दिन जंतर-मंतर के पास कुछ युवाओं को हिंदू देवता राम के बारे में आपत्तिजनक बातें करते हुए सुना था. कुछ देर बाद उसी जगह लौटने पर उन्होंने उन युवाओं को वहीं पाया और उनसे पूछा कि वो ऐसी बातें क्यों कह रहे थे? इसके बाद जो कुछ हुआ, उसे पंडित ने खुद रिकॉर्ड करके अपलोड किया.
सत्यम पंडित को अपने काम पर बहुत गर्व महसूस हो रहा था. आज तक के इंटरव्यू में, वो अपनी सतर्कता के लिए कानूनी आरोपों का सामना करने की संभावना का स्वागत करते हुए कहते हैं: “अगर देश-विरोध गतिविधि कहीं भी होंगे, तो हम तैयार हैं. हम हर चीज के लिए तैयार हैं.”
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों से मारपीट के आरोपों में घिरे सत्यम पंडित ने आज तक से बातचीत में अपनी सफाई दी। सत्यम ने दावा किया कि प्रदर्शन में आपत्तिजनक नारे लगाए जा रहे थे और इसी वजह से उसने विरोध किया।#JantarMantar #DelhiProtest #ReporterDiary | @arvindojha pic.twitter.com/Oa0Ur9eSAB
— AajTak (@aajtak) July 26, 2026
27 जुलाई को ANI के साथ एक इंटरव्यू में सत्यम पंडित ने कहा कि जो कोई भी हिंदू देवी-देवताओं राम, सीता, प्रधानमंत्री मोदी या यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपमान करते हुए पाया जाएगा, उसे भी इसी तरह का “सबक” सिखाया जाएगा. उन्होंने उस विवादित वीडियो को लेकर बिना किसी पछतावे के कहा कि हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने वालों को सज़ा देने के लिए कानून अपने हाथ में लेने पर उन्हें कोई अफ़सोस नहीं है.
ABP न्यूज़ ने भी पंडित का इंटरव्यू लिया था जिसमें उन्होंने फिर कहा कि अगर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया, तो वो कानून की उचित प्रक्रिया का इंतज़ार नहीं करेंगे. इस इंटरव्यू में उन्होंने मुसलमानों के लिए कई अपशब्दों और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. साथ ही, उन्होंने ये भी कहा कि CJP आंदोलन में छात्र नहीं, बल्कि आतंकवादी शामिल थे जो देश के टुकड़े-टुकड़े करना चाहते थे.
टाइम्स नाउ के पत्रकार प्रियांक त्रिपाठी ने एक और इंटरव्यू में सत्यम पंडित पर दबाव डालते हुए उनसे पूछा कि क्या उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा है जिस पर राष्ट्रीय हिंदू वीर सेना प्रमुख ने जवाब दिया: “हमें गर्व है हमने ये काम किया. मलाल किस बात का होगा?”
TIMES NOW Confronts Satyam Pandit
Who gave the protesters the right to attack police, media personnel, and RAF?… I have no regret about what I have done; I am proud of my actions: Satyam Pandit, who assaulted protesters tells @priyanktripathi pic.twitter.com/h6taJ5CZyO
— TIMES NOW (@TimesNow) July 26, 2026
27 जुलाई को पंडित ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल (@satyam.pandat) पर एक वीडियो अपलोड किया जिसमें उन्होंने वायरल वीडियो में दिख रही घटनाओं से पहले क्या हुआ था, ये बताने की कोशिश की. उन्होंने दावा किया कि वो युवक शराब के नशे में थे. सत्यम पंडित के मुताबिक, जंतर-मंतर के आस-पास घूमते समय उन्होंने कुछ युवकों के एक समूह को शराब पीते और हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अभद्र बातें करते देखा. उन्होंने उन्हें वहां से चले जाने को कहा, लेकिन कुछ देर बाद जब वो वापस उस जगह पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि वो युवक नशे में धुत थे और अब भी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कर रहे थे. इसी घटनाक्रम के कारण पंडित ने हिंसक प्रतिक्रिया दी.
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विवादों से पुराना नाता
ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि हिंदुत्व नेता के तौर पर सत्यम पंडित का इतिहास FIR और गिरफ़्तारियों से भरा रहा है.
अगस्त 2024 में, देश से “रोहिंग्या बांग्लादेशियों” को निकालने की मांग करने के बाद उन्हें गिरफ़्तार किया गया था.

फ़रवरी 2026 में उन्हें एक मुस्लिम-ओन्ड नॉन-वेजिटेरियन रेस्टोरेंट को एक मिनट के अंदर बंद न करने पर उसे जलाने की धमकी देने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया. वो मंगलवार का दिन था जिसे कई उत्तर भारतीय हिंदू का पवित्र दिन मानते हैं.
In Ghaziabad, at Kaila Bhatta in Uttar Pradesh, a Hindutva goon named Satyam Pandit threatens an elderly Muslim man, ordering him to shut down his non vegetarian eatery every Tuesday, or he would set the shop on fire.
How is it that any random vigilante can openly intimidate… pic.twitter.com/gZDu2RdOXf— Mohammed Zubair (@zoo_bear) February 26, 2026
हाल ही में 20 जुलाई को सत्यम पंडित ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करके विवाद खड़ा कर दिया था कि मुस्लिम पुलिस अधिकारियों और दूसरे सरकारी कर्मचारियों को कांवड़ यात्रा के दौरान मौजूद रहने की इजाज़त न दी जाए; उनके मुताबिक, ये यात्रा सिर्फ़ हिंदुओं के लिए एक पवित्र आयोजन है.
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सत्यम पंडित के अपराधों का इतिहास एक ही बात की ओर इशारा करता है. सत्यम, अक्सर नफ़रत फैलाने वाली बातें और भड़काऊ भाषण देते हैं, और अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा को बढ़ावा देते हैं. पहले भी, उन्होंने हिंदू अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने के बहाने नफ़रत फैलाने के लिए अपने प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया है. और अक्सर उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. जंतर-मंतर की घटना जिसमें वो खुलेआम छात्र प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाते और मारते-पीटते दिख रहे हैं, इसी बेखौफ़ रवैये का नतीजा है.
साथ ही, ये ध्यान देने वाली बात है कि उत्पीड़न और मारपीट की घटना को खुद हमलावरों ने ही रिकॉर्ड किया और ऑनलाइन शेयर किया. ज़्यादातर मामलों में, ऐसा फ़ुटेज — जिसमें साफ़ तौर पर आपराधिक हरकतें दिख रही हों — शामिल लोगों के खिलाफ सबूत का काम कर सकता है. अगर इससे उन्हें कोई डर नहीं लगा, तो ये दिखाता है कि सत्यम पंडित और उनके साथी कानूनी कार्रवाई से बचने को लेकर आश्वस्त थे. इससे एक बड़ा सवाल उठता है — क्या ऐसी बेबाकी इस सोच से आती है कि सरकार उनके खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करेगी, या शायद उनके पक्ष में ही होगी? आपराधिक न्याय प्रणाली इस बात पर टिकी है कि सरकार पीड़ितों के पक्ष में होती है और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की कोशिश करती है.





