15 अगस्त को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया और देश के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर चले गए. ऐसे समय BJP सांसद वरुण गांधी ने एक ग्राफ़िक शेयर की और लिखा कि ये काबुल के कोरोना वॉरियर हैं. तस्वीर में CNN न्यूज़18 का एक ग्राफ़िक दिखता है और टाइटल है, “CNN ने हमले के दौरान मास्क पहनने के लिए तालिबानियों की तारीफ़ की”. (आर्काइव लिंक)
फ़िल्म मेकर अशोक पंडित ने ये ग्राफ़िक शेयर करते हुए कहा कि CNN ने तालिबान के आतंकियों को अफगानिस्तान के निर्दोष लोगों को मारते वक़्त मास्क पहनने की वजह से फ़ाइटर कहते हुए तारीफ़ की. (आर्काइव लिंक)
विवेक अग्निहोत्री ने भी ये तस्वीर शेयर की और उन्होंने इसका क्रेडिट कॉमेडियन जो रोगन के इन्स्टाग्राम हैंडल को दिया. (आर्काइव लिंक)
और भी कई लोगों ने ये तस्वीर शेयर की है. इक्विटी इंटेलीजेंस इंडिया लिमिटेड के सीईओ पोरिंजू वेलियाथ ने ये तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा ‘तालिबान’ का मतलब अरेबिक में ‘स्टूडेंट्स’ होता है. फ़ेसबुक पर ये तस्वीर इस दावे के साथ वायरल है.
फ़ैक्ट-चेक
टाइटल के साथ शेयर हो रहे इस तस्वीर में ‘BabylonBee.com’ का बायलाइन दिख रहा है.
सर्च करने पर पता चला कि ये एक सटायर वेबसाइट है जो व्यंग्य के तौर पर आर्टिकल पब्लिश करता है. इस वेबसाइट के अबाउट सेक्शन की पहली लाइन में ही लिखा है कि ये एक मज़ाकिया वेबसाइट है.
‘द बेबीलोन बी’ के ट्विटर हैंडल से ये आर्टिकल 15 अगस्त को शेयर किया गया था. ट्विटर हैंडल के बायो में लिखा है, “ऐसी फ़र्ज़ी ख़बरें जिनपर आप भरोसा कर सकते हैं.”
इस मज़ाकिया आर्टिकल में जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है उसका रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें BBC की 2012 की एक रिपोर्ट में ये तस्वीर मिली. इसका क्रेडिट रॉयटर्स को दिया गया था. तस्वीर के कैप्शन में लिखा था, “2007 में मौलाना फज़लुल्लाह के नेतृत्व में तालिबान ने स्वात पर कब्जा कर लिया.”
यानी, एक मज़ाकिया वेबसाइट से पब्लिश किए गए आर्टिकल का स्क्रीनशॉट लोगों ने सच मानकर शेयर किया. इससे पहले भी एक बार इस वेबसाइट के एक आर्टिकल का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था. उस समय सटायर आर्टिकल की तस्वीर शेयर कर लोग कहने लगे थे कि एसोसिएटेड प्रेस का रिपोर्टर लाइव आने से पहले अपने माथे से हमास का हेडबैंड हटाना भूल गया. ये दावा ग़लत था इस बारे में ऑल्ट न्यूज़ की फ़ैक्ट-चेक रिपोर्ट यहां देखी जा सकती है.












