सोशल मीडिया पर ‘द हिंदू’ अखबार की एक कथित क्लिपिंग खूब वायरल है, इतनी ज़्यादा कि इसे पत्रकार से लेकर कुछ मीडिया चैनल ने भी शेयर कर दिया. इस क्लिप में दावा किया गया है कि 5 जून 1967 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जनता से सोना न खरीदने और ‘राष्ट्रीय अनुशासन’ बनाए रखने की अपील की थी. ये क्लिप 6 जून 1967 को ‘द हिंदू’ अखबार के फ्रंट पेज पर प्रकाशित ख़बर दिखाती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की, ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके. इस अपील के बाद राजनीतिक बयानों का का दौर शुरू हो गया और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी कि इस अपील को सरकार की विफलता का सबूत बताया और कहा कि इससे साफ पता चलता है कि सरकार ने देश को ऐसी जगह पर पहुंचा दिया है जहां लोगों को बताया जा रहा है कि क्या खरीदें और क्या नहीं.
इसी संदर्भ में भाजपा के कई नेताओं और राइट-विंग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, पत्रकार आदि ने द हिन्दू की कथित क्लिप इस तर्क के साथ शेयर की है कि नरेंद्र मोदी का कदम नया नहीं है और कांग्रेस के शासनकाल में भी ऐसा हो चुका है.
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने इस क्लिपिंग को शेयर करते हुए लिखा की कि भारत में चीज़ें जितनी ज़्यादा बदलती हैं, उतनी ही वैसी ही रहती हैं. 1967 से लेकर 2026 तक, बस इस बार हम सच में इसका दोष इंदिरा गांधी या नेहरू पर नहीं डाल सकते. बाद में उन्होंने ये ट्वीट डिलीट कर दिया. टाइम्स नाउ ने भी इस क्लिप के आधार पर एक ख़बर छापी थी लेकिन बाद में इसे अपडेट कर दिया.

भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने ‘द हिंदू’ अखबार की वायरल क्लिपिंग शेयर करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा और कहा कि 1967 में राहुल गांधी जी की दादी ने सोना ख़रीदने से भारत के लोगों को मना किया था.

अक्सर गलत जानकारी फैलाते हुए पाए जाने वाले भाजपा समर्थक गौरव प्रधान ने कथित अखबार की कटिंग को शेयर करते हुए लिखा कि मोदी जी का मज़ाक उड़ाने वालों के लिए, ये 5 जून 1967 की अखबार क्लिपिंग है.

भाजपा नेता प्रोफेसर गौरभ बल्लभ ने वायरल क्लिपिंग शेयर करते हुए लिखा कि विपक्ष का दायित्व हर बात का विरोध करना नहीं, बल्कि देशहित में दिए गए सार्थक सुझावों का समर्थन करना होता है.

फ़ैक्ट-चेक
हमने 1967 में द हिंदू अखबार का फॉर्मेट जानने के लिए इससे संबंधित की-वर्ड्स सर्च किया. हमें कलेक्टिबल्स बेचने वाली वेबसाइट ‘बिड क्यूरियस’ पर मौजूद 1967 में छपी द हिंदू अखबार की क्लिप मिली. इस मूल अखबार से वायल क्लिपिंग को मिलान करने पर उसमें कुछ विसंगतियां पाई गईं. उदाहरण के लिए ‘द हिंदू’ अखबार उस समय भी 8 कॉलम के फॉर्मेट में छपता था, जबकि वायरल क्लिपिंग में केवल 5 कॉलम थे, जो आमतौर पर टैब्लॉयड अखबारों में होते हैं. इसके अलावा, अखबार की टैगलाइन में भी अंतर था. जहां असली टैगलाइन ‘India’s National Newspaper’ है, वहीं फ़र्ज़ी क्लिपिंग में ‘Indian National Newspaper’ लिखा हुआ है.

‘द हिंदू’ ग्रुप ने स्वयं एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 6 जून 1967 की यह फ्रंट पेज इमेज पूरी तरह से डिजिटल रूप से छेड़छाड़ की गई है और उनके आर्काइव का हिस्सा नहीं है.
📢 A digitally altered image purporting to be a front page of The Hindu from June 6, 1967, is currently circulating on social media. We wish to clarify that this is not an authentic page from our archives. The Hindu urges readers to exercise caution and verify before sharing.
— The Hindu (@the_hindu) May 12, 2026
‘द हिंदू’ की राजनीतिक एडिटर निस्तुला हेब्बार ने भी असली और फर्जी पन्नों की तुलना शेयर करते हुए लिखा कि ‘द हिंदू’ अखबार का 6 जून, 1967 का वायरल फ्रंट पेज फ़र्ज़ी है, जिसे शायद AI से बनाया गया है. असल में उस दिन फ्रंट पेज की हेडलाइन अरब-इज़राइल युद्ध थी.
The front page of @the_hindu dated June6, 1967 being posted on SM over gold controls is fake, likely AI generated. The actual front page on that day was headlined by the Arab-Israel war. Both posted below. Thank u for your attention to this matter! pic.twitter.com/whSADF5bXB
— Nistula Hebbar (@nistula) May 12, 2026
कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि इंदिरा गांधी के नाम पर फैलाया जा रहा ‘द हिंदू’ अखबार की क्लिपिंग पूरी तरह फ़र्ज़ी है. हालांकि, यह ऐतिहासिक तथ्य है कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान देश में सोने को लेकर बेहद कड़े नियम लागू हुए थे. भारत में स्वर्ण नियंत्रण के इतिहास को देखें तो इसकी नींव इंदिरा गांधी के कार्यकाल से पहले ही पड़ चुकी थी. 1962 के भारत-चीन युद्ध के कारण जब विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा, तो तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने सोने के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया था, जिसके तहत बैंकों द्वारा दिए गए स्वर्ण ऋणों को वापस लेने और सोने के वायदा कारोबार पर रोक लगाने जैसे कड़े कदम उठाए गए थे. उसके बाद सरकार द्वारा 1963 में 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले सोने के आभूषणों के उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. जब इन सभी उपायों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिला तो आखिरकार इंदिरा गांधी के कार्यकाल में, तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 1968 में ‘गोल्ड कंट्रोल एक्ट’ लागू किया, जिसके तहत नागरिकों के लिए सोने की सिल्लियाँ और सिक्के रखना प्रतिबंधित कर दिया गया था. सोने के सिक्कों और सिल्लियों के रूप में मौजूद सभी भंडार को गहनों में बदलने और अधिकारियों के सामने उसकी घोषणा करने को अनिवार्य कर दिया गया था. बाद में, भारत में सोने के बाज़ार को खोलने के लिए और वैश्विक अर्थव्यवस्था से तालमेल बिठाने के उद्देश्य से, 1990 में इस कानून को निरस्त कर दिया गया था.
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