सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें मास्क पहनी हुई एक महिला भारी भीड़ के बीच एक आदमी के कंधे पर बैठकर डांस करती हुई दिख रही है. भीड़ भी तेज़ संगीत पर डांस कर रही है. क्लिप में बाद में एक आदमी पीछे से उसका मास्क हटा देता है और उसके आस-पास के पुरुष उसे ग़लत तरीके से छूते हुए दिखाई देते हैं.
कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने ये वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया कि ये घटना दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई थी. उन्होंने ये भी कहा कि छात्रों के लिए न्याय की मांग के साथ शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन अपना मकसद खो चुका है और मौज-मस्ती और पार्टी करने का ज़रिया बन गया है.
विनय पंडित नामक एक X यूज़र ने 26 जुलाई को ये क्लिप शेयर की और कैप्शन लिखा: “दिल्ली : जंतर मंतर पर लुटा रही अपनी ही इज्जत और बात कर रही पेपर लीक होने की ? जब चेहरे से मुखौटा हटा तो शरमा रही है उसके पहले ? ?”
इस पोस्ट में न सिर्फ़ महिला के चरित्र पर सवाल उठाए गए, बल्कि विरोध प्रदर्शन के मकसद और “शालीनता” पर भी सवाल खड़े किए गए. ये फ़ैक्ट-चेक आर्टिकल लिखे जाने तक इसे 85 हज़ार से ज़्यादा बार देखा और 277 से ज़्यादा बार शेयर किया गया. (आर्काइव)
राईटविंग ग्रुप राजपूत करणी सेना के नेता विष्णु राजपूत ने 26 जुलाई को इंस्टाग्राम पर वही वीडियो पोस्ट किया. इस पोस्ट को 10 हज़ार से ज़्यादा लाइक्स मिलें.
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पोस्ट के ओवरलेप कैप्शन में लिखा है: “यदि यह वास्तव में एक छात्र/छात्रा है, तो यह गंभीर चिंतन का विषय है कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान, चरित्र निर्माण और सभ्य संवाद है या अशोभनीय नारों एवं अभद्र भाषा का प्रदर्शन. लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन विरोध की भाषा और व्यवहार में मर्यादा, शालीनता और सम्मान भी उतना ही आवश्यक है. ईश्वर सभी बेटियों और बेटों को उत्तम संस्कार, विवेकपूर्ण सोच तथा सम्मानजनक अभिव्यक्ति की प्रेरणा दें.”
ऑल्ट न्यूज़ के व्हाट्सऐप हेल्पलाइन पर कथित क्लिप की सच्चाई जानने के लिए कुछ रिक्वेस्ट भी मिलीं.
फ़ैक्ट-चेक
वीडियो की सच्चाई का पता लगाने के लिए, ऑल्ट न्यूज़ ने वायरल क्लिप के कुछ फ़्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें 5 जुलाई को पोस्ट किया गया ओरिजिनल वीडियो मिला.
ये वीडियो ‘tunseaevents’ नामक इंस्टाग्राम पेज पर अपलोड किया गया था. हालांकि, ये साफ़ नहीं है कि ये वीडियो कहां का है, लेकिन वीडियो का कैप्शन 2026 FIFA मेन्स फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ा है.
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इसे ध्यान में रखते हुए छानबीन करने पर हमें वही वीडियो 27 जून को इंस्टाग्राम पेज ‘flowmexicanoofficial’ की पोस्ट में दिखा. स्पैनिश में लिखे कैप्शन का मतलब है: “अरे, जैसे जब कोई आपकी सीक्रेट पहचान का खुलासा कर दे.”
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इसके बाद, हमें वही वीडियो एक और पोस्ट में मिला, जिसे 30 जून को ‘@entertainingfox5006’ नामक यूट्यूब अकाउंट से अपलोड किया गया था. यहां वीडियो की लोकेशन साफ़ तौर पर मेक्सिको की बताई गई थी और वीडियो के हैशटैग में भी मेक्सिको, वर्ल्ड कप 2026 और CDMX का ज़िक्र था. CDMX का मतलब है ‘सिउदाद दे मेक्सिको’ या मेक्सिको सिटी — जो मेक्सिको की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है.
वीडियो की लोकेशन मेक्सिको होने का पता चलने के बाद हमें इस वीडियो का संदर्भ मालूम हुआ — मेक्सिको ने 25 जून, 2026 को चेकिया के खिलाफ अपना आखिरी ग्रुप स्टेज मैच जीता था. चूंकि ये मेक्सिको का आखिरी ग्रुप स्टेज मैच था और इस जीत के बाद नेशनल टीम नॉकआउट में पहुंच गई, इसलिए पूरे देश में जश्न का माहौल बन गया. ये जश्न अगले महीने भी जारी रहा, क्योंकि 1 जुलाई को मेक्सिको ने राउंड ऑफ़ 32 में इक्वाडोर को हराकर नॉकआउट में जीत का 40 साल का गैप खत्म कर दिया.
अपलोड किए गए वीडियो की क्रोनोलॉजी से पता चलता है कि वायरल वीडियो ऐसे ही किसी समारोह के दौरान कैप्चर किया गया था, और इसे अलग-अलग सोशल मीडिया एकाउंट्स के माध्यम से कई बार शेयर किया गया था जो मेक्सिको में जश्न दिखाता है.
वायरल वीडियो में महिला ने जो मास्क पहना है, उसे लूचाडोर मास्क कहा जाता है जिसका मेक्सिको में गहरा सांस्कृतिक महत्व है.
कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर भारतीय अकाउंट्स से जो वायरल वीडियो शेयर किया गया, वो असल में मेक्सिको में वर्ल्ड कप से जुड़े एक जश्न का है न कि दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन का. इसलिए, विरोध-प्रदर्शन का मकसद खोने और उसके तौर-तरीकों पर सवाल उठाने वाले दावे बेबुनियाद और गुमराह करने वाले हैं.





