2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू हो गई है. इस दौरान, बहुजन समाज पार्टी ब्राह्मण समुदाय को आकर्षित करने के लिए ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन कर रही है. 23 जुलाई को अयोध्या में ब्राह्मण सम्मेलन की शुरुआत हुई है. इस दौरान, सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल है. तस्वीर में कुछ लोग सड़क पर एक पोस्टर लिए खड़े हैं. पोस्टर पर लिखा है, “बहुजन क्रांति मोर्चा” और “ब्राह्मण कौम विदेशी है, इनके घर में एसी है”.

ट्विटर यूज़र जेनिश पटेल ने ये तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा, “आज यूपी मायावती की पार्टी ब्राह्मण सम्मेलन कर रही है,लेकिन जब सत्ता में थी तब ब्राह्मणों के खिलाफ़ उनकी क्या सोच थी इस तस्वीर में साफ़ दिख रहा है.”

फ़ेसबुक पेज ‘BMW – The Untold Stories’ ने ये तस्वीर पोस्ट की है.

पीता नहीं क्यों देशी है…. ब्राम्हण कौम विदेशी है

Posted by BMW – The Untold Stories on Saturday, 24 July 2021

एक ट्विटर यूज़र ने ये तस्वीर शेयर करते हुए अखिलेश यादव के घर की तस्वीर भी शेयर की. यूज़र ने लिखा कि अखिलेश यादव के घर में एसी है तो क्या वो भी विदेशी है?

फ़ेसबुक और ट्विटर पर ये तस्वीर वायरल है.

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फ़ैक्ट-चेक

फ़ेसबुक पर की-वर्ड्स सर्च करने पर ऑल्ट न्यूज़ को ऐसा ही एक पोस्टर साल 2018 में पोस्ट किया हुआ मिला. इस पोस्टर पर लिखा है – “ब्राह्मण कौम विदेशी है, इसका DNA यूरेशी है”.

बहुजन क्रांति मोर्चा

Posted by India News on Sunday, 14 January 2018

14 जनवरी 2018 को फ़ेसबुक यूज़र विनोद कुमार ने ये तस्वीर प्रोफ़ाइल पिक्चर में लगाते हुए लिखा था, “जिला भिवानी हरियाणा में भीमा कोरेगांव महाराष्ट्र में हुई घटना के विरोध मे प्रदर्शन करते बामसेफ,बहुजन क्रान्ति मोर्चा,डासफी,नफ,बाल्मिकी महासभा के लोग।”.

इसके अलावा, एक और फ़ेसबुक यूज़र ने भिवानी हरियाणा में हुए इस विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें शेयर की थीं. प्रदर्शन की तस्वीरों में एक जगह पर ये पोस्टर दिखता है.

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इसके अलावा, वायरल तस्वीर में एक और प्लैकार्ड दिखता है जिसपर “एक तीर एक कमान सब मूलनिवासी एक समान” लिखा है. ये प्लैकार्ड विरोध प्रदर्शन की एक और तस्वीर में भी दिखता है. साथ में वायरल तस्वीर और विरोध प्रदर्शन की तस्वीरों में समान झंडे भी दिखते हैं.

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कीवर्ड्स सर्च से हमें दैनिक जागरण में 15 जनवरी 2018 को छपी एक रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट में इस प्रदर्शन की एक तस्वीर भी शेयर की गयी है जिसमें “ब्राह्मण कौम विदेशी है, इसका DNA यूरेशी है” नारे वाली एक पोस्टर भी दिख रही है..

बता दें कि 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में पेशवा बाजीराव और अंग्रेज़ों के बीच हुए युद्ध के 200 साल पूरे हुए थे. हर साल 1 जनवरी को दलित समुदाय से बड़ी संख्या में लोग उन दलितों को श्रद्धांजलि देने के लिए भीमा कोरेगांव जाते हैं जो 1818 में पेशवा की सेना के ख़िलाफ़ लड़ते हुए शहीद हुए थे. 1 जनवरी 2018 को भी बड़ी संख्या में दलित समुदाय के लोग वहां पहुंचे थे. इस दौरान भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की थी जिसमें 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी.

गौर करें कि ब्राह्मण समुदाय के विदेशी होने का दावा 2001 की एक स्टडी के आधार पर किया गया है. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने इस बारे में एक रिपोर्ट भी पब्लिश की थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सवर्ण जातियों का DNA यूरोपियन लोगों से मिलता है. यूरेशी शब्द का अर्थ है जो लोग यूरोप और एशिया से जुड़े हो. इस आधार पर ब्राह्मण समुदाय के लोगों के DNA को यूरेशी कहा गया है. आज तक के फ़ैक्ट-चेक रिपोर्ट में बहुजन समाज मोर्चा के एक कार्यकर्ता ने भी यही बात बताई है.

कुल मिलाकर, 2018 में भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के विरोध में कुछ दलित संगठनों ने प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान दिखाए गए एक पोस्टर की तस्वीर एडिट कर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे के साथ शेयर की गई.


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