कार्डबोर्ड के बक्सों में लिपटे शवों की तस्वीरें सोशल मीडिया में इस दावे के साथ प्रसारित की जा रही हैं कि ये उन पुलिसकर्मियों के शरीर हैं जो हाल ही महाराष्ट्र में हुए नक्सली हमले में मारे गए थे।

ट्विटर पर कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने ये तस्वीरें शेयर की हैं।

मारे गए पुलिसकर्मियों के कथित अपमान पर पीएम मोदी को निशाना बनाने के लिए, तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

दो साल पुरानी तस्वीरें

गूगल पर एक साधारण रिवर्स-सर्च से यह खुलासा हो गया कि सोशल मीडिया पर चलने वाली ये तस्वीरें 2017 में हुई एक घटना से संबंधित हैं, जब तवांग में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सात सैन्यकर्मी मारे गए थे।

उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एचएस पनाग उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने तस्वीरों को ट्वीट किया था।

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इस घटना को लेकर ट्वीट किया था।

गढ़चिरौली के शहीदों का अंतिम संस्कार

महाराष्ट्र के नक्सली हमले में 15 पुलिसकर्मियों की मौत की खबरें मीडिया में व्यापक रूप से दी गई थीं। अंतिम संस्कार की तस्वीरें मारे गए सुरक्षाकर्मियों को दिए गए राजकीय सम्मान को दिखलाती हैं। उनके शरीर कार्डबोर्ड बॉक्स में नहीं लिपटे थे, जैसा कि सोशल मीडिया में दावा किया गया था।

असंबंधित घटनाओं का चित्रण करने वाली तस्वीरें या वीडियो अक्सर बदले हुए संदेश के साथ सोशल मीडिया में प्रसारित किए जाते हैं। हाल ही के श्रीलंका के ईस्टर बम विस्फोटों और फरवरी में भारतीय सेना के बालाकोट हवाई हमले के बाद भी इसी तरह का पैटर्न देखा गया था।

ग़लत
दावा:
माओवादी हमले में मारे गए पुलिसकर्मियों को कार्डबोर्ड बक्सों में लपेटा गया

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