JNU छात्रों के फीस बढ़ोतरी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया में व्यापक रूप से एक तस्वीर प्रसारित है। तस्वीर में एक लड़की को पुलिसकर्मी लाठी से मार रहे है।
ये पड़ा धोनी का 6 और गेंद स्टेडियम से बाहर 😆😂😂😝😝😝
#JNUPosted by Anup Singh on Monday, 18 November 2019
जैसा कि देखा जा सकता है उपरोक्त पोस्ट में #JNU का इस्तेमाल किया गया और छात्रा का मज़ाक उड़ाते हुए लिखा है कि –“ये पड़ा धोनी का 6 और गेंद स्टेडियम से बाहर” तस्वीर को ट्विटर पर भी पोस्ट किया गया है।
ये पड़ा धोनी का 6 और गेंद स्टेडियम से बाहर 😆 pic.twitter.com/kVCuXRvMxy
— गब्बर सिंह ( रामगढ़ वाले ) (@IntolerantMano2) November 19, 2019
वहीं इस तस्वीर को सरकार पर सवाल उठाने के लिए भी साझा किया गया है। तस्वीर के साथ संदेश के अनुसार, “देश को शर्मसार करती वीभत्स सच्चाई, जहां पूरी दुनिया अपने युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वही भारत में उच्च शिक्षा को सब के लिए सुलभ एवं सस्ती बनाने के लिए संघर्ष कर रही लड़कियों को, जिन्हे संस्कृति के नाम पर शताब्दियों तक घर में कैद करके रखा गया, आज निर्दयता से पीटा जा रहा है. पुलिस एवं इनके राजनैतिक आकाओं को शर्म आनी चाहिए.”
देश को शर्मसार करती वीभत्स सच्चाई,
जहां पूरी दुनिया अपने युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वही भारत…Posted by Raj Kumar on Tuesday, 19 November 2019
2012 के निर्भया प्रदर्शन की तस्वीर
साझा की जा रही तस्वीर हाल की नहीं है जिससे साफ है कि यह तस्वीर जेएनयू के प्रदर्शन को भी नहीं दर्शाती है। इस तस्वीर को कई मीडिया संगठनों ने दिसंबर 2012 में प्रकाशित किया था। यह ध्यान देने योग्य है कि यह वही समय है जब 16 दिसंबर, 2012 को निर्भया के बलात्कार के बाद निर्मम हत्या कर दी गई थी और इसी दौरान देश की राजधानी में व्यापक रूप से विरोध प्रदर्शन किया गया था। ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर की जांच करने के लिए इसे गूगल पर रिवर्स सर्च किया।

यह तस्वीर रायसीना हिल की है, जहां कई लोग व्यापक रूप से इक्क्ठा हुए थे, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया था। ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर को हिंदुस्तान टाइम्स और इंडिया टुडे के लेख में प्रकाशित किया हुआ पाया। ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर को रॉयटर्स की वेबसाइट पर भी पाया। इसे 22 दिसंबर 2012 को अदनान आबिदी ने खिंचा था।

यह ध्यान देने लायक है कि प्रसारित की गई तस्वीर जेएनयू के हालिया विरोध प्रदर्शन को नहीं दर्शाती है। यह दिसंबर 2012 में निर्भया मामले को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन की तस्वीर है। एक अन्य उदाहरण में, सीपीआई नेता एनी राजा की तस्वीर को जेएनयू छात्रा का बताकर शेयर किया गया। इसके अलावा, इंटरनेट पर मौजूद लड़कियों की तस्वीरों को जेएनयू छात्राओं का बताकर सोशल मीडिया में इस विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया गया।





