एक हाथी को ट्रक में ले जाने का 1 मिनट 31 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया में काफ़ी शेयर किया जा रहा है. वीडियो में इस हाथी को बीच रास्ते ही ट्रक से उतर कहीं जाते हुए देखा जा सकता है. तमिलनाडु की दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी इंदु मक्कल काच्चि ने ये वीडियो ट्वीट करते हुए PETA इंडिया पर हाथी के साथ ज़बरदस्ती करने का आरोप लगाया. आपको बता दें कि PETA एक अमेरिकन पशु-अधिकार संगठन है जो कि भारत में PETA इंडिया के रूप में कार्यरत है. आर्टिकल लिखे जाने तक इस वीडियो को 58 हज़ार से ज़्यादा बार देखा और 3,700 बार रीट्वीट किया जा चुका है (ट्वीट का आर्काइव लिंक)

फ़ेसबुक पेज ‘The Sanghi Millenial’ ने 8 अगस्त को ये वीडियो इसी दावे से पोस्ट किया. पोस्ट में इस वीडियो को पिछले साल (2019) का बताते हुए दावा किया गया कि PETA इंडिया इसी तरह मंदिरों से जानवर ले जाते हैं. आर्टिकल लिखे जाने तक इस वीडियो को 1,800 से ज़्यादा बार देखा गया है. (पोस्ट का आर्काइव लिंक)

Video from Last year.

This is how PETA India took away kanchi mutt elephants.

The elephant did not want to go, it jumped out of the truck, and the torture PETA did to take her away.

Now they want to take Lakshmi Elephant from Puducheri temple but Thanks to the efforts of Indu Makkal Katchi the temple has somehow managed to retain their elephant for now.

PETA has filed a PIL in Madras highcourt to take away Lakshmi From Temple authorities . BJP MP Menika Gandhi is leading this movement.

#ASK Yourself Do we really need these #Fake_Gandhis in BJP??

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Posted by The Sanghi Millenial. on Friday, 7 August 2020

PETA इंडिया पर आरोप लगाते हुए ये वीडियो ट्विटर और फ़ेसबुक पर काफ़ी शेयर हो रहा रहा है. ऑल्ट न्यूज़ के ऑफ़िशियल मोबाइल ऐप पर इस वीडियो के वेरीफ़िकेशन के लिए कुछ रीक्वेस्ट भी आई हैं.

फ़ैक्ट-चेक

आश्चर्य की बात है कि इंदु मक्कल काच्चि ने 30 जून को बगैर PETA इंडिया के ज़िक्र के ये वीडियो ट्वीट किया था. ट्वीट में हथिनी का नाम संध्या बताया गया है. ट्वीट में दावा किया गया है, “कुछ सालों पहले संध्या को एक NGO ले गया था. जब एक महिला ने संध्या को आवाज़ दी तो संध्या ट्रक से नीचे उतर गई. इस वजह से उसको चोट भी लगी.” इस ट्वीट थ्रेड में 12 जुलाई 2016 के यूट्यूब वीडियो का एक लिंक शेयर किया गया है जिसमें हाल में शेयर हो रहे वीडियो के दृश्य देखें जा सकते हैं.एक फ़ेसबुक ग्रुप में भी ये वीडियो 30 जुलाई 2016 को शेयर किया गया था जिसमें हथिनी का नाम संध्या बताया गया है.

सर्च करने पर मालूम हुआ कि संध्या नाम की हथिनी तमिलनाडु के प्रसिद्ध कामाक्षी मंदिर में रहती थी. संध्या के अलावा और भी 2 हथिनियां मंदिर में उसके साथ रहती थी और मठ के कामों में मदद करती थीं. 13 मई 2016 की डेक्कन हेरल्ड की रिपोर्ट में इन हथिनियों का नाम क्रमशः संध्या (उम्र 43), इंदु (उम्र 34) और जयति (उम्र 22) बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर ने इन तीनों हथिनियों को मरक्कनम कैम्प भेजने का फ़ैसला किया था. अपने इस फ़ैसले के पीछे का कारण मंदिर ने जगह की कमी और अप्राकृतिक फ़र्श बताया. इसकी वजह से 30 सालों से मंदिर में रह रही हथिनियों को उनके घर (जंगल के नज़दीक) भेजने का फ़ैसला किया गया. मंदिर अधिकारी विश्वनाथ शास्त्री ने बताया, “इनके देखभाल का ज़िम्मा तीन महीनों तक ट्री फ़ाउंडेशन को दिया गया है. और जल्द ही हम इनके लिए सुविधाओं की व्यवस्था करेंगे जिसमें इन्हें पर्याप्त जगह से लेकर प्राकृतिक फ़र्श मुहैया करवाया जाएगा.” रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र भी किया गया है कि इन तीन हथिनियों में से संध्या नामक हथिनी रास्ते में ही ट्रक से उतर गई थी और उसे वही पास के गांव में कुछ दिनों तक रखा गया था. कुछ दिनों बाद वापस उसे अपनी दो साथी हथिनी इंदु और जयति के पास मरक्कानम कैम्प ले जाया गया.

28 सितंबर 2019 का बेंगलुरू मिरर का आर्टिकल मिला. आर्टिकल के मुताबिक, 27 सितंबर 2019 को मंदिर की तीन हथिनियों को तिरुच्चिरापल्ली के MR पलायम स्थित हाथी बचाव पुनर्वास सेंटर ले जाया गया था. मद्रास हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए इन तीन हथिनियों को 2 प्राइवेट संगठनों (एनजीओ) से हाथी पुनर्वास केंद्र भेजने का आदेश दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, ये हथिनियां तक़रीबन साढ़े 3 साल तक तमिलनाडु के विल्लुपुरम ज़िले के मरक्कानम कैम्प में रही थी जहां पर इनकी देखभाल 2 एनजीओ करते थे. लेकिन हाईकोर्ट में इसके खिलाफ़ याचिका दायर कर मांग की गई कि एनजीओ के पास हथिनियों को रखने का कोई अधिकार नहीं है. इसलिए इन्हें वन विभाग द्वारा संचालित पुनर्वास सेंटर भेजा जाए. इस याचिका को जायज़ ठहराते हुए हाईकोर्ट ने इन्हें पुनर्वास सेंटर भेजने का फ़ैसला सुनाया था.

28 सितंबर 2019 की द न्यू इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर अधिकारियों की मांग पर 2016 में इन हथिनियों को मरक्कानम स्थित ट्री फ़ाउंडेशन एलीफ़न्ट केयर फ़ेसिलिटी भेजा गया था. जहां पर इनकी देखभाल ट्री फ़ाउंडेशन और वाइल्ड्लाइफ़ रेस्क्यू और पुनर्वास सेंटर (WRRC) नाम के 2 एनजीओ करते थे. 19 सितंबर 2019 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि इन हथिनियों को 4 हफ़्तों के अंदर वन विभाग को सौंपा जाए. और आख़िरकार इन तीनों हथिनियों को भारी मशक्कत के बाद त्रिची हाथी पुनर्वास केंद्र, तिरुच्चिरापल्ली ले जाया गया.

इसके अलावा, किसी भी रिपोर्ट में हथिनियों के पुनर्वास सेंटर ले जाने की घटना में PETA इंडिया के शामिल होने का कोई ज़िक्र नहीं है. PETA इंडिया ने इंदु मक्कल काच्चि के ट्वीट पर 2 अगस्त को रिप्लाइ करते हुए इस दावे को ग़लत बताया है. 7 अगस्त को PETA इंडिया ने 30 मई 2016 का एक लेटर ट्वीट किया. इस लेटर में साफ़ बताया गया है कि इन तीनों हथिनियों को मंदिर ने मरक्कानम स्थित एलीफ़न्ट केयर फ़ेसिलिटी भेजा था.

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ये पूरा घटना क्रम कुछ इस तरह है – मंदिर अधिकारियों ने 2016 में तीनों हथिनियों को मरक्कानम कैम्प में भेजा था. जहां पर ये तीनों साढ़े तीन साल तक रहीं और बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर इन्हें तिरुच्चिरापल्ली के एमआर पलायम में स्थित पुनर्वास सेंटर ले जाया गया. इस पूरी घटना का PETA इंडिया से कोई लेना-देना नहीं है. इंदु मक्कल काच्चि ने PETA इंडिया पर आरोप लगाते हुए जो वीडियो शेयर किया है वो वीडियो दरअसल 2016 में हथिनियों को मंदिर से मरक्कानम सेंटर ले जाने का है.

असत्य
दावा:
PETA इंडिया ने हथिनी के साथ ज़बरदस्ती कर उसकी पिटाई की

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