एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक ट्रक के पास पुलिसकर्मी और महिलाओं के बीच झड़प होते हुए दिख रहा है. यूज़र्स इस वीडियो को 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी महिलाओं पर पुलिसकर्मियों का हमला बताकर शेयर कर रहे हैं. उनका दावा है कि दिल्ली पुलिस के जवान महिलाओं के साथ मारपीट कर रहे हैं.

20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर “संसद चलो” मार्च का आह्वान किया था. इस दौरान देशभर से हजारों की संख्या में युवा-बुजुर्ग सभी वर्ग के समर्थकों ने प्रदर्शन करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षाबलों ने बैरिकेडिंग कर रोकने की कोशिश की. तनाव बढ़ने और हालात बिगड़ने का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किये और आँसूगैस के गोले दागने लगे. इसी बीच सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए और कई दृश्यों में महिलाओं के साथ बर्बरता दिखी.

इसी संदर्भ में पत्रकार कविश अजीज (@azizkavish) ने ये वीडियो शेयर किया. उन्होंने लिखा, “दिल्ली पुलिस के जवान लड़कियों और औरतों के साथ मारपीट कर रहे हैं”. कैप्शन में टाइम्स नाउ नवभारत की पत्रकार और एंकर रुबिका लियाकत को यह खबर नहीं दिखाने के लिए तंज कसा गया.

वायरल वीडियो एक्स समेत यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे ही दावे के साथ वायरल है.

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फैक्ट-चेक

वायरल दावे की सत्यता जानने के लिए ऑल्ट न्यूज़ ने वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया. हमें 15 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित etv bharat न्यूज़ की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें वायरल वीडियो के स्क्रीनग्रैब का इस्तेमाल किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, 14 अक्टूबर 2025 को उत्तराखंड के देहरादून ज़िले के पटेल नगर कोतवाली क्षेत्र में एक महिला ट्रक के नीचे घुसकर उसमें आग लगाने का प्रयास कर रही थी. पुलिस ने जब ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया तो महिला ने पुलिस के साथ हाथापाई शुरू कर दी थी, इसी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था. यानी, ये वीडियो लगभग 1 साल पुराना है और उत्तराखंड के देहरादून ज़िले का है.

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 10 अक्टूबर, 2025 को आशारोड़ी से देहरादून की तरफ ट्रक आ रहा था. मोहब्बेवाला क्षेत्र में ड्राइवर का नियंत्रण खो गया और बेकाबू होकर एक घर की दीवार को तोड़ते हुए अंदर घूस गया. इस हादसे में ट्रक ड्राइवर को भी काफी चोटें आईं. मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची थी. लेकिन तीन दिन से ट्रक वहीं पर खड़ा हुआ था. 14 अक्टूबर की रात को पुलिस को सूचना मिली कि घर की महिलाएं ट्रक को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं, मौके पर पहुंचकर जैसे-तैसे पुलिस ने ट्रक को आग लगाने से बचाया और मामले को शांत कराया.

रिपोर्ट में इस मामले पर एसपी सिटी प्रमोद सिंह ने बताया कि पीड़ित परिवार की एक महिला जो घटना में अपने घर की हुई क्षति को देखकर काफी भावनात्मक हो गई थी, उसने आवेश में आकर ट्रक को जलाने का प्रयास किया. लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया. ट्रक मालिक ने मकान मालिक पूरन बहादुर थापा को कुल नुकसान की रकम अदा करने कहा और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी.

ABP न्यूज़ ने भी इस मामले की रिपोर्ट की थी.

कुल मिलाकर, वायरल वीडियो हालिया ‘संसद चलो’ प्रदर्शन का नहीं है. यह अक्टूबर 2025 में उत्तराखंड के देहरादून की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें पुलिसकर्मी एक महिला को ट्रक में आग लगाने से रोक रहे थे.

ग़लत
दावा:
दिल्ली पुलिस के जवान लड़कियों और औरतों के साथ मारपीट कर रहे हैं

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