कपिल मिश्रा और रिपब्लिक टीवी ने 100 चीनी सैनिकों के मरने की ‘ख़बर’ बिना वेरीफ़ाई किये शेयर की

यदि सोशल मीडिया दावों को देखें तो गलवान में हुई झड़प में हताहत हुए चीनी सैनिकों की संख्या 100 है. भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने एक संदेहास्पद वेबसाइट kreately.in की एक रिपोर्ट ट्वीट की जो कहती है, “जियान्ली यैंग जो कि एक पूर्व चीनी मिलिट्री ऑफ़िसर रह चुके हैं और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता के बेटे हैं, उन्होंने ये माना कि ’15 जून की रात भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प में 100 से ज़्यादा चीनी सैनिकों की मौत हुई है.'” कपिल मिश्रा के ट्वीट को 11,000 से ज़्यादा रीट्वीट मिले हैं.

रिपब्लिक टीवी ने 7 जुलाई की एक रिपोर्ट में यही दावा दिखाया. रिपब्लिक टीवी ने लिखा, “एक बड़े दावे के अनुसार पूर्व चीनी मिलिट्री अधिकारी जियान्ली यैंग ने कहा है कि भारत और चीन के बीच 15 जून की रात LAC पर हुई हिंसक झड़प में पीपल्स लिबरेशन आर्मी के 100 से ज़्यादा सैनिक मारे गए.” माय नेशन ने भी ऐसी ही एक रिपोर्ट पब्लिश की है.

This slideshow requires JavaScript.

रिपब्लिक टीवी ने Tsai Ing-Wen नाम के ट्विटर हैंडल के एक ट्वीट को भी दिखाया जिसमें ऐसा ही दावा किया जा रहा था.

@NewsLineIFE उन अकाउंट्स में से एक है जिसने ऐसे दावे शेयर करने की शुरुआत की.

फ़ैक्ट-चेक

देखा जाए तो इस दावे के बारे में कई ऐसी बातें हैं जो कि ये ज़ाहिर कर देती हैं कि ये झूठा दावा है.

1. इस दावे को कई संदेहास्पद वेबसाइट्स और अकाउंट ने बढ़ावा दिया है

इस दावे को बढ़ावा देने वाला शुरुआती नाम है ट्विटर हैंडल @NewsLineIFE जो कि बीते दिनों में गलवान में हुई झड़प में मरने वाले चीनी सैनिकों की संख्या, बगैर किसी वेरिफ़िकेशन के बताता आया है. 2 जुलाई को इसने ये संख्या ट्वीट की थी. इसी अकाउंट ने पहले भी ये ट्वीट किया था कि झड़प में 5 चीनी सैनिक मरे हैं और 11 घायल हुए हैं. बाद में इसने ट्वीट किया कि 43 चीनी सैनिक मारे गए हैं. ये दोनों ट्वीट डिलीट किये जा चुके हैं.

This slideshow requires JavaScript.

न्यूज़ लाइन IFE ने @drapr007हैंडल को टैग करते हुए ये दावा ट्वीट किया था. इस हैंडल ने असल में यही बात 1 जुलाई को ट्वीट की थी.

kreately.in वो एक वेबसाइट है जिसने ‘100 चीनी मौतों’ के बारे में आर्टिकल पब्लिश किया था. ये एक नयी-नवेली वेबसाइट है. kreately.in के ट्विटर बायो में लिखा हुआ है, “ख़ुद का लिखा छपवाएं. बस साइन-अप करें और राइटर बन जाएं. ये इतना ही आसान है.”यानी ये वेबसाइट कोई पत्रकारिता की वेबसाइट नहीं है बल्कि यूज़र्स के कॉन्टेंट को पब्लिश करती है. इस वेबसाइट पर कोई भी पता या कोई भी ऐसा नाम नहीं लिखा है जिससे ये मालूम पड़ सके कि इसके पीछे कौन है.

Newscast-pratyaksha.com का एक आर्टिकल भी कई लोगों ने शेयर किया. इस वेबसाइट का दावा था कि भारतीय सेना ने 100 चीनी सैनिकों को मारा था. इस दौरान इन्होंने डी वाशिंगटन टाइम्स के एक आर्टिकल का हवाला दिया जो कि जियान्ली यैंग का एक ओपिनियन पीस था जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे.

2. यैंग जियान्ली का वाशिंगटन टाइम्स में आया ओपिनियन पीस

ऑल्ट न्यूज़ को मालूम चला कि कोई भी विश्वसनीय मीडिया आउटलेट ये नहीं कह रहा है कि जियान्ली ने ऐसा कुछ भी कहा है जिसके अनुसार 100 चीनी सैनिकों की मौत हुई है. मेनस्ट्रीम तो छोड़िये, किसी इंडिपेंडेंट मीडिया हाउस तक ने इस ख़बर को जगह नहीं दी.

पोस्ट में लिखा हुआ था कि जियान्ली यैंग पूर्व चीनी मिलिट्री अधिकारी हैं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना (CPC) के पूर्व नेता के बेटे हैं. ये बात सच है कि वो पूर्व CPC नेता के बेटे हैं लेकिन वो चीन की मिलिट्री में कोई अफ़सर नहीं थे. जियान्ली असल में चीन के मुखर विरोधी हैं जो कि यूनाइटेड स्टेट्स में रह रहे हैं. वो मानवाधिकार से जुड़े ऐक्टिविस्ट हैं जिन्होंने यूएस में रहकर अपनी पढ़ाई की. वो पूर्व तियानमेन स्क्वायर ऐक्टिविस्ट भी रह चुके हैं जिसे 2002 में चीनी सरकार ने गिरफ़्तार कर लिया था क्यूंकि सरकार के मुताबिक़ वो मज़दूरों को उकसाने की कोशिश कर रहे थे. जियान्ली को 2007 में रिहा किया गया.

उन्होंने द वाशिंगटन पोस्ट में हाल ही में एक ओपिनियन पीस लिखा जो कि हालिया इंडिया-चीन झड़प को ध्यान में रख कर लिखा गया था. इसमें उन्होंने बताया कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़्हाओ लिजियान ने चीनी सैनिकों की मौत के बारे में चल रहे आंकड़ों को मानने से इनकार कर दिया और 40 चीनी सैनिकों की मौत की भारतीय रिपोर्ट्स को ‘झूठी जानकारी’ बता दिया.

जियान्ली ने लिखा, “ऐसा कौन सा देश होगा जो कि अंतिम संस्कार के वक़्त इज़्ज़त बख्शने की तो छोड़िये, सरहद पर अपने सैनिकों की शहादत को भी मानने से इन्कार कर देता है.चीन असल में इस बात से डरा हुआ है कि अगर उसके हताहत हुए सैनिकों की संख्या बाहर आ गयी, जो कि उसके दुश्मन से ज़्यादा है, तो देश में गुस्सा फूट सकता है और बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है और ये चीन में CCP के वजूद के लिए खतरा बन सकता है.”

इस पूरे दौरान रिपोर्ट में एक भी जगह जियान्ली ने चीनी सैनिकों की मौत के बारे में कोई भी आंकड़ा नहीं दिया.

3. एक फ़र्ज़ी अकाउंट के ट्वीट को रिपब्लिक टीवी ने दिखाया

रिपब्लिक टीवी ने @tsaiing_wen नाम के हैंडल से किये गए एक ट्वीट को जगह दी. ये अकाउंट खुद को रिपब्लिक ऑफ़ चाइना का प्रेसिडेंट बताता है. ये वेरिफ़ाइड अकाउंट नहीं है जबकि Tsai Ing-Wen के असली हैंडल @iingwen को ब्ल्यू टिक मिला हुआ है.

4. जियान्ली की पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया

जियान्ली की जो तस्वीरें kreately.in ने इस्तेमाल की हैं वो 2013 की हैं जब वो चीन में ह्यूमन राइट्स की स्थितियों को वैश्विक मानवाधिकारों पर बनी यूएस हाउस सबकमिटी के सामने रख रहे थे.

जिन तस्वीरों का इस्तेमाल newscast-pratyakhsha.com ने किया था वो विकीपीडिया से उठायी गयी थीं. डिस्क्रिप्शन के मुताबिक़, “डॉक्टर यैंग जियान्ली की कटी हुई तस्वीर जिसमें वो अमरीकी कांग्रेस रेबर्न हाउस ऑफ़िस की बिल्डिंग में हुई 13वीं इंटरएथनिक इंटरफ़ेथ लीडरशिप कांफ्रेंस की ओपनिंग सेरेमनी में बोल रहे थे. 10 दिसंबर, 2018.”

झूठा दावा वायरल

भारतीय सेना से हुई झड़प में 100 चीनी सैनिकों के मारे जाने का दावा सोशाल मीडिया पर ख़ूब चला. जिन्होंने इसे आगे बढ़ाया, उसमें जीडी बख्शी, रमेश सोलंकी, राधारमण दास और चयन चटर्जी मुख्य नाम हैं. ज़्यादातर ने newscast-pratyakhsha.com के आर्टिकल को शेयर किया था.

This slideshow requires JavaScript.

इसके अलावा इस दावे को शेयर करने वाले मुख्य हैंडल्स थे @TheArnaw, @friendsofrss और @FrontalAssault1.

This slideshow requires JavaScript.

योगदान करें!!
सत्ता को आइना दिखाने वाली पत्रकारिता जो कॉरपोरेट और राजनीति के नियंत्रण से मुक्त भी हो, वो तभी संभव है जब जनता भी हाथ बटाए. फेक न्यूज़ और गलत जानकारी के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद कीजिये. डोनेट करिये.

Donate Now

तत्काल दान करने के लिए, ऊपर "Donate Now" बटन पर क्लिक करें। बैंक ट्रांसफर / चेक / डीडी के माध्यम से दान के बारे में जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें

Send this to a friend