21 जुलाई को मीडिया आउटलेट ‘रिपब्लिक’ के एक न्यूज़ बुलेटिन में दावा किया गया कि बांग्लादेशी इस्लामीक राजनीतिक पार्टी, जमात-ए-इस्लामी ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध-प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया था. साथ ही, इसे कथित “भारत-विरोधी टूलकिट” से भी जोड़ा गया.
बुलेटिन में रिपोर्टर ने युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए पूछा, “क्या ये उस भारत-विरोधी टूलकिट की सोची-समझी कोशिश थी…?” उन्होंने आरोप लगाया कि शाहीन बाग, लाल किला और अन्य विरोध-प्रदर्शनों के दौरान भी इसी “टूलकिट” का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा, एंकर ने दावा किया कि CJP के “गुंडों” और “बदमाशों” ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिससे कई “बेगुनाह” अधिकारी घायल हो गए.
#CJPGoons Exposed | Bangladesh’s Jamaat-E-Islami openly backs CJP Protests
Tune in to watch the #latest updates: https://t.co/qvBEwD05Rz#CJPProtest #CJP #JantarMantar #ParliamentChalo #NEETProtest #StonePelting #PoliceAttack #DelhiProtest #StudentMovement #RepublicTV… pic.twitter.com/cj0LHjHkpb
— Republic (@republic) July 21, 2026
इस बुलेटिन में भारत में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में जमात-ए-इस्लामी की ओर से कथित तौर पर जारी एक “लेटर” या “औपचारिक नोट” का ज़िक्र किया गया है. सोशल मीडिया पर एक तस्वीर बड़े पैमाने पर शेयर की जा रही है, जिसमें कथित तौर पर जमात-ए-इस्लामी का 21 जुलाई, 2026 की तारीख वाला वो “लेटर” दिख रहा है, जिसमें भारत में छात्र आंदोलन के लिए समर्थन का दावा किया गया है.
मीडिया आउटलेट News18 ने एक लेटर की वायरल तस्वीर के साथ एक आर्टिकल छापा, जिसका टाइटल था ‘क्या बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी ने दिल्ली के प्रदर्शनकारियों को ‘समर्थन पत्र’ भेजा? इंटेलिजेंस सूत्रों से एक्सक्लूसिव जानकारी.’ रिपोर्ट की हेडलाइन में लिखा था, “एजेंसियां लेटर की सच्चाई की जांच कर रही हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अगर इसमें किसी विदेशी राजनीतिक या वैचारिक समूह की भूमिका है, तो इसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए.”

इसी तरह, NewsX ने अपने बुलेटिन में वायरल तस्वीर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और दावा किया कि CJP विरोध-प्रदर्शन के अंतरराष्ट्रीय संबंध हैं.
21 जुलाई को, BJP समर्थक कई X हैंडल्स ने ये दावा करते हुए वो लेटर शेयर किया कि जमात ने CJP का समर्थन किया है. इनमें Megh Updates (@MeghUpdates), The Jaipur Dialogues (@JaipurDialogues), Kreately.in (@KreatelyMedia) और Rishi Bagree (@rishibagree) वगैरह शामिल हैं.
गौर करने वाली बात ये है कि इन X हैंडल्स — MeghUpdates, The Jaipur Dialogues, Rishi Bagree और Kreately Media — को पहले भी कई बार ग़लत जानकारी और सांप्रदायिक प्रोपेगैंडा शेयर करते हुए पाया गया है.
फ़ैक्ट-चेक
बारीकी से जांच करने पर, ऑल्ट न्यूज़ को उस कथित लेटर में कई कमियां मिलीं. सबसे पहले, हेडर में ‘Bangladesh’ की स्पेलिंग ग़लत लिखी है – इसे “Bangladeshe” लिखा गया है.

इसके अलावा, लेटरहेड पर बना लोगो जमात-ए-इस्लामी पार्टी के लोगो से मेल नहीं खाता है.

इसके अलावा, हमने देखा कि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के ऑफ़िशियल X अकाउंट ने एक बयान जारी कर उस लेटर की असलियत को पूरी तरह से नकार दिया और उसे फ़र्ज़ी बताया. उनके बयान में कहा गया, “बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी सोशल मीडिया पर फैल रहे फ़र्ज़ी लेटर की निंदा करती है और दुर्भावनापूर्ण प्रचार को तुरंत रोकने की मांग करती है.”
उन्होंने बताया कि डॉक्यूमेंट में उनका आधिकारिक रजिस्टर्ड पता या रेफरेंस नंबर नहीं था, जो पार्टी द्वारा जारी किसी भी आधिकारिक पत्र-व्यवहार के लिए ज़रूरी होते हैं. बयान में ये भी कहा गया कि पत्र का कुल फ़ॉर्मैट और डिज़ाइन बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लेटरहेड से मेल नहीं खाता था.
Bangladesh Jamaat-e-Islami denounces forged letter circulating on social media; demands immediate halt to malicious propaganda
Bangladesh Jamaat-e-Islami’s Assistant Secretary General and party’s central media and publicity affairs secretary Advocate Ahsanul Mahboob Zubair… pic.twitter.com/obPSdPsjCX
— Bangladesh Jamaat-e-Islami (@BJI_Official) July 21, 2026
इसके अलावा, ऑल्ट न्यूज़ ने उस इमेज को SightEngine, Hive Moderation और TruthScan जैसे कई AI-डिटेक्शन टूल्स से भी जांचा. सभी नतीजों से पता चला कि वो लेटर शायद AI से बनाया गया था.
कुल मिलाकर, ये दावे ग़लत हैं कि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने CJP के नेतृत्व में भारत में चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया है. इस दावे के सबूत के तौर पर सोशल मीडिया पर जो लेटर शेयर की जा रही है, वो नकली है. रिपब्लिक, न्यूज़ 18 और न्यूज़X जैसे न्यूज़ संगठनों ने बिना पुष्टि किए इन दावों को ग़लत तरीके से रिपोर्ट किया और उन्हें और आगे बढ़ाया.





