दिल्ली में 20 जुलाई को हुए मार्च में शामिल लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर कहा कि प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान पुलिस ऐसे डंडे इस्तेमाल कर रही थी जिनमें कीलें लगी हुई थीं. दिल्ली पुलिस ने इन दावों को गुमराह करने वाला और झूठा बताया. सोशल मीडिया पर ऐसे दो वीडियोज़ सामने आये जिनमें ये डंडे और प्रदर्शनकारियों को पुलिस अधिकारियों से इनके इस्तेमाल के बारे में सवाल करते हुए देखा जा सकता है. दिल्ली पुलिस ने कहा कि कीलें लगे डंडों वाले वीडियो 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन से जुड़े नहीं थे.

ऐसा ही एक वीडियो अश्विनी सोनी (@Ramraajya) नामक यूज़र ने पोस्ट किया था.

जब ये वीडियोज़ ऑनलाइन तेज़ी से फैलने लगे, तो दिल्ली पुलिस ने एक तथाकथित फ़ैक्ट-चेक के ज़रिए जवाब दिया. ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर की एक पोस्ट का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ये वीडियो 20 जून के विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित नहीं थे.

केंद्र सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भी दिल्ली पुलिस की पोस्ट का हवाला देते हुए एक फ़ैक्ट चेक जारी किया. DD न्यूज़ ने PIB का फ़ैक्ट चेक शेयर किया. राईटविंग प्रॉपगेंडा आउटलेट ऑपइंडिया ने दिल्ली पुलिस के दावे का समर्थन करते हुए एक ‘फ़ैक्ट-चेक’ आर्टिकल पब्लिश किया.

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ को पता चला कि इंस्टाग्राम यूज़र ‘@ansh.visuals_’ ने 20 जुलाई को एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें युवा प्रदर्शनकारी कील लगी लाठियों के इस्तेमाल को लेकर पुलिस अधिकारियों से सवाल-जवाब कर रहे थे. एक प्रदर्शनकारी को लाठी हाथ में लेकर कैमरे को दिखाते हुए देखा जा सकता है. जहां पुलिस अधिकारी शांत और बेफ़िक्र दिख रहे हैं, वहीं प्रदर्शनकारियों को लाठियों की ओर इशारा करते हुए ये पूछते हुए सुना जा सकता है, “आपको कैसे नहीं दिखा? हमने इसे दूर से ही देख लिया था, और आपको नहीं दिखा?”

@ansh.visuals_ ने ये वीडियो इस टेक्स्ट के साथ पोस्ट किया था: “कुछ पुलिस अधिकारियों की लाठियों में कीलें लगी थीं, ये बहुत कुछ कहता है.”

21 जुलाई को शाम लगभग 6 बजकर 40 मिनट पर, ये पोस्ट भारत में मौजूद नहीं रही. यहां इसका डाउनलोड किया गया वर्ज़न है:

रिडर्स ये ध्यान दें कि ऊपर दिया गया वीडियो वो नहीं है जिसे दिल्ली पुलिस ने अनरिलेटेड बताया था. हालांकि, नीचे की तुलना से पता चलता है कि दोनों वीडियो एक ही विवाद के हैं और एक ही जगह पर शूट किए गए थे. दोनों वीडियो में प्रदर्शनकारियों में से एक शख्स साफ़ तौर पर दिखता है.

हमने वीडियो अपलोड करने वाले व्यक्ति से भी कॉन्टेक्ट किया जिन्होंने वीडियो के मेटाडेटा की स्क्रीन-रिकॉर्डिंग शेयर की. मेटाडेटा के मुताबिक, ये वीडियो 20 जुलाई, 2026 को शाम 4 बजकर 33 मिनट पर शूट किया गया था.

उन्होंने ‘ऑल्ट न्यूज़’ के साथ उसी वीडियो का एक लंबा वर्ज़न भी शेयर किया जिसमें साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कीलें लगी लाठी विशाल तोमर नाम के एक पुलिस अधिकारी के हाथ में थी. वीडियो में 34 सेकेंड के टाइमस्टैम्प पर, काले और सफ़ेद धारीदार शर्ट पहने व्यक्ति की नज़र तोमर के हाथ में मौजूद लाठी पर पड़ती है.

हमने उस जगह का पता लगाया है जहां प्रदर्शनकारियों ने कील लगे डंडों के इस्तेमाल को लेकर पुलिस अधिकारियों से सवाल किया था. ये घटना जनपथ रोड पर ‘द इंपीरियल’ के बाहर हुई थी. नीचे गूगल मैप्स के स्ट्रीट व्यू और वायरल वीडियो के फ़्रेम की तुलना दी गई है.

हमने वहां मौजूद एक प्रदर्शनकारी से बात की. हालांकि वो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, लेकिन उन्होंने 21 जुलाई को ऑल्ट न्यूज़ को कन्फर्म किया कि वो उस ग्रुप का हिस्सा थे जिसने पिछले दिन पुलिस अधिकारियों का सामना किया था. उन्होंने कहा, “भीड़ में किसी ने देखा कि एक अधिकारी के पास कीलों वाला डंडा था. हमें पक्का नहीं पता कि उन्होंने उसका इस्तेमाल किया या नहीं, लेकिन वीडियो निश्चित रूप से कल का ही है. उस पुलिसकर्मी का नाम विशाल तोमर था. जब हमने उनसे बात करने की कोशिश की, तो सीनियर पुलिस अधिकारियों समेत सभी ने हमें नज़रअंदाज़ कर दिया. उन्होंने हमें कोई जवाब नहीं दिया.”

अश्विनी सोनी द्वारा शेयर किया गया वीडियो (जिसका दिल्ली पुलिस ने ‘फ़ैक्ट-चेक’ किया था) असल में राहुल गौर (@Gaur_95_com) नाम के यूज़र ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था. राहुल गौर ने ये दावा करते हुए वीडियो अपलोड किया था कि दिल्ली पुलिस के पास कीलों वाली लाठियां थीं. जब ऑल्ट न्यूज़ ने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने कहा, “मैंने खुद ये वीडियो रिकॉर्ड किया था. मैं खुद वहां मौजूद था.”

तो, ऊपर दिए गए सबूतों — जैसे कि ऑल्ट न्यूज़ के हासिल किए गए वीडियो, उनका मेटाडेटा, घटना वाली जगह की जियो-लोकेशन और गवाहों के बयान — से ये पक्के तौर पर साबित होता है कि 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान, दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी कीलें लगी लाठी लिए हुए देखा गया था और प्रदर्शनकारियों ने इस बारे में पुलिस अधिकारियों से सवाल भी किए थे. हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उस लाठी का इस्तेमाल असल में प्रदर्शनकारियों को मारने के लिए किया गया था.

इसीलिए दिल्ली पुलिस का ये दावा ग़लत है कि “ये वीडियो कल के विरोध प्रदर्शन के नहीं हैं.”

ग़लत
दावा:
लाठी में कील लगे वीडियो 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के नहीं हैं

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