सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें कुछ टोपी पहने व्यक्ति और बुर्का पहनी एक महिला को पुलिस ले जा रही है. वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति इन लोगों से दक्खनी या डेक्कनी में बार-बार पूछता है कि उन लोगों ने नाबालिग को अगवा करने का दुस्साहस कैसे किया.

बीजेपी समर्थक प्रोपेगैंडा आउटलेट सुदर्शन न्यूज़ ने ये क्लिप ट्वीट करते हुए लिखा, “बेंगलुरु में ‘कपड़ों’ से पहचान सकते हैं?? शिवाजी नगर बस स्टॉप पर बच्चों के अपहर्ताओं को रंगे हाथ पकड़ा गया. शहर में बच्चों के “अपहरण” करने का जमावड़ा, सभी जागरूक रहें …” कैप्शन की पहली लाइन में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ, 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई एक टिप्पणी की ओर इशारा किया गया है. ये टिप्पणी उन्होंने तब की थी जब 2019 में CAA-NRC का विरोध चरम पर था.

अक्सर सोशल मीडिया पर ग़लत जानकारी शेयर करने वाले, अमिताभ चौधरी ने ये क्लिप ट्वीट करते हुए लिखा कि अगर आरोपी ‘अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या’ निकले तो उन्हें कोई आश्चर्य नहीं होगा. उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम तुष्टिकरण और बंदोबस्त के कारण बेंगलुरु लंबे समय से ‘टाइम बम’ पर बैठा हुआ है.

इसी तरह की कैप्शन्स के साथ ये क्लिप कई यूज़र्स ने @ExSecular, @Sudhir_mish, @ashishvyas__, और @Siingh777 ने ट्वीट की हैं.

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 तेलंगाना की भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रवक्ता, गायत्री बंडारी ने ये क्लिप इसी दावे के साथ ट्वीट की.

फ़ैक्ट-चेक

ऑल्ट न्यूज़ ने इस वीडियो की जांच लोकेशन वेरिफ़िकेशन के साथ शुरू की. सुदर्शन न्यूज़ के ट्वीट में ज़िक्र किया गया है कि कथित आरोपी को शिवाजी नगर बस स्टैंड से पकड़ा गया है. इसे ध्यान में रखते हुए,हमने शिवाजी नगर बस स्टैंड को गूगल मैप्स पर ढूंढा. और हमें पता चला कि वीडियो में दिख रही जगह, शिवाजी नगर बस स्टैंड से मेल खाती है.

इसके बाद, हमने DCP ईस्ट बेंगलुरु डॉ. भीमाशंकर एस गुलेड से बात की. उन्होंने कहा कि वीडियो में पानी की बोतल पकड़े दाढ़ी वाला व्यक्ति इस मामले का आरोपी है. DCP ने सुदर्शन न्यूज़ द्वारा किए गए दावों को साफ तौर पर ग़लत बताया.

भीमाशंकर ने बताया, “आरोपी का नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस (NIMHANS) में इलाज चल रहा था, और उस दिन नियमित जांच के बाद वो अपने मां -बाप के साथ उस जगह (शिवाजी नगर) में आया था. उसने बच्चे को नहीं छीना, उसने बच्चे को तब छुआ जब बच्चा अपने मां-बाप के पास में था. ये कहना ग़लत है कि उसने बच्चे को छीनने की कोशिश की लेकिन ये भी स्पष्ट नहीं है कि उसने बच्चे को क्यों छुआ. हम जो पुष्टि कर सकते हैं वह ये है कि वो दिमागी मरीज था. हम ये भी पुष्टि कर सकते हैं कि सोशल मीडिया पर जो पेश किया जा रहा है, उससे अलग दोनों एक ही धर्म के थे.”

उन्होंने कहा, “एक बार जब पुलिस को घटनाक्रम से अवगत कराया गया तो उन्होंने तुरंत मामले का संज्ञान लिया. पुलिस ने NIMHANS में उसके रिकॉर्ड की जांच की और एक बार जब ये सब उस बच्चे के मां-बाप को दिखाया गया, तो उन्होंने शिकायत दर्ज नहीं की. मुझे भी इस मामले से अवगत कराया गया था और मैंने व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड की जांच की और पुलिस के बयान को वेरिफ़ाई किया.”

इसके आलावा, ऑल्ट न्यूज़ ने कॉमर्शियल स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से बात की जिन्होंने हमें बताया कि आरोपी 15/16 अप्रैल की सुबह अपने परिवार के साथ शिवाजी नगर आया था और वो मानसिक रूप से बीमार था. गुस्से में आकर पीड़ित परिवार ने वीडियो रिकॉर्ड किया था. लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड की जांच करने के बाद उन्होंने शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया.

ग़लत
दावा:
बेंगलुरू में मुसलमानों ने शिवाजी नगर बस स्टॉप पर बच्चे को अगवा करने की कोशिश की

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