क्या राहुल गांधी ने दावा किया कि गाँधी जी की अहिंसा इस्लाम से प्रेरित थी? क्लिप्ड वीडियो वायरल

हाल के दुबई यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक भाषण का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल है। 10 सेकंड के इस क्लिप में राहुल गांधी को यह कहते सुना जा सकता है, “महात्मा गांधी ने अहिंसा का विचार प्राचीन भारतीय दर्शन से, इस्लाम से लिया।”-(अनुवादित) इस वीडियो में महात्मा गांधी की अहिंसा के स्रोत के रूप में इस्लाम का उल्लेख, सोशल मीडिया में, खासकर दक्षिणपंथी सोशल मीडिया यूजर्स में, बड़े पैमाने पर आक्रोश का विषय बना हुआ है। नकली समाचार वेबसाइट पोस्टकार्ड न्यूज़ के संस्थापक, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ट्विटर पर फॉलो करते हैं, उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने यह वीडियो शेयर किया है।

यह वीडियो पाकिस्तानी-कनाडाई लेखक तारेक फ़तह ने भी शेयर की है।

सच क्या है?

सोशल मीडिया में प्रसारित क्लिप एक लंबे वीडियो से लिया गया छोटा संस्करण है। राहुल गांधी ने जो कहा, उसका पूरा संदर्भ जानने के लिए, ऑल्ट न्यूज़ ने इस पूरे वीडियो को देखा, जिसमें कहा गया है:

“हिंसा के, गुस्से के, इस वातावरण में, और आप यह हर जगह देखते हैं, आप इसे संयुक्त राज्य (अमरीका) में देखते हैं, आप इसे यूरोप में देखते हैं, आप इसे मध्य-पूर्व में देखते हैं। गुस्से के इस वातावरण में, जवाब भारत के पास है। भारत के पास, न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे ग्रह (पृथ्वी) के लिए जवाब देने का खाका है। अहिंसा हमारे डीएनए में अंतर्निहित है। और यह कोई 50 साल से अंतर्निहित नहीं है। महात्मा गांधी अहिंसा के महान प्रतिपादक थे। लेकिन महात्मा गांधी जी ने अहिंसा का यह विचार हमारे महान धर्मों, हमारे महान गुरुओं से लिया। महात्मा गांधी ने अहिंसा का यह विचार प्राचीन भारतीय दर्शन से, इस्लाम से, ईसाई धर्म से, यहूदी धर्म से, प्रत्येक उस महान धर्म से लिया, जिनमें यह स्पष्ट लिखा है कि हिंसा से यहां किसी को कुछ भी हासिल होने में मदद नहीं मिलेगी।” – (अनुवादित)

राहुल गांधी के भाषण के इस प्रसंग का वीडियो 23:37वें मिनट से नीचे दिए गए वीडियो में देखा जा सकता है।

इस वीडियो से स्पष्ट है कि राहुल गांधी भारत की महिमा का बखान कर रहे थे, जब उन्होंने यह कहा कि दुनिया की नाक में दम किए हिंसा और गुस्से का समाधान अहिंसा के भारतीय दर्शन में है। उन्होंने कहा कि अहिंसा दुनिया के हर महान धर्म से प्रेरित थी। कहीं भी उन्होंने किसी एक धर्म का जिक्र नहीं किया, जैसा सोशल मीडिया में प्रसारित क्लिप्ड वीडियो और उसके साथ का संदेश में दावा किया गया है।

ऑल्ट न्यूज़ ने भ्रामक सूचनाओं के कई उदाहरण बताए हैं, जिनमें, राजनीतिक दलों/व्यक्तियों को — जो बीजेपी के विरोध में हैं — इस्लाम धर्म के पक्ष में और इस प्रकार हिंदू-विरोधी दिखलाने के प्रयास किए गए हैं। हाल ही एक भ्रामक वीडियो में दावा किया गया कि विधानसभा चुनावों के बाद राहुल गांधी इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे। एक अन्य क्लिप वीडियो इस दावे से प्रसारित हुआ कि कन्हैया कुमार ने लोगों से इस्लाम में परिवर्तित होने की अपील की। तारेक फ़तह ने फोटोशॉप की हुई एक तस्वीर प्रसारित करके उसमें — एक मदरसा शिक्षक द्वारा इस्लाम को हिन्दू धर्म से श्रेष्ठ दिखलाते हुए — होने का दावा किया। फ़तह ने एक झूठी कहानी भी प्रसारित की और दावा किया कि मुस्लिमों ने कांग्रेस की जीत को मनाने के लिए पाकिस्तानी झंडा लहराया।

इस सूचना को सोशल मीडिया में शेयर करने वाले अन्य लोग

दक्षिणपंथी हैंडल्स के कई अन्य ट्वीट कहते हैं कि राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के अहिंसा के दर्शन की प्रेरणा के रूप में सिर्फ इस्लाम का जिक्र किया था।

 

कई दक्षिणपंथी पेजों ने यह वीडियो इसी दावे के साथ शेयर किए।

इंटरव्यू और भाषणों के वीडियो को क्लिप करना और उन्हें असली संदर्भ से अलग रूप में प्रस्तुत करना, भ्रामक सूचनाओं को बढ़ावा देने का आसान तरीका है। ऑल्ट न्यूज़ ने ऐसे कई उदाहरणों को खारिज किया है, जिनमें, किसी लंबे वीडियो में से एक तस्वीर निकाल कर किसी व्यक्ति के बारे में — वास्तव में उसने जो वीडियो में कहा, उससे अलग — एक भ्रामक तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए, उसे शेयर किया जाता है। सोशल मीडिया यूजर्स को ऐसे क्लिप्ड वीडियो, जिनमें वक्ता के कथन का पूरा प्रसंग न हो, पर विश्वास करने को लेकर सावधान रहना चाहिए।

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