सोशल मीडिया पर एक छोटी बच्ची का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बच्ची सजे हुए माहौल में नए कपड़े और फूलों की माला पहने हुए बैठी है. मौका किसी धार्मिक रस्म जैसा है. बच्ची के ठीक पीछे एक व्यक्ति बैठा है, जबकि सामने एक मौलवी कुछ पढ़ रहे हैं जिसे बच्ची दोहरा रही है. इस वीडियो को शेयर करते हुए यह दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम बच्ची का ‘निकाह’ कराया जा रहा है. कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इस्लाम और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए बेहद अपमानजनक और इस्लामोफोबिक टिप्पणियां की हैं.
सोशल मीडिया पर अक्सर गलत जानकारी फैलाती हुई पाई जाने वाली यूज़र कल्पना श्रीवास्तव ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि एक 6 साल की मासूम बच्ची, फूलों की माला और शादी के कपड़ों में एक बड़े आदमी के सामने बैठी हुई है और निकाह के रस्म में शामिल है. यह कोई संस्कृति नहीं, यह तो जाहिलियत और जुल्म है.

David J Harris Jr. नाम के अमेरिकी राइट विंग इनफ़्लूएन्सर ने वायरल वीडियो फ़ेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वह सिर्फ़ 6 साल की है, फिर भी उसकी शादी हो रही है, यह बहुत ही घिनौनी बात है. हमें इस्लाम को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.
Dr. Maalouf नाम के अमेरिकी यूजर ने वायरल वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा किवह सिर्फ़ 6 साल की है, उसे तो यह भी नहीं पता कि क्या हो रहा है. कोई भी संस्कृति जो इसकी इजाज़त देती है, वह दुष्ट है. (आर्काइव लिंक)

फ़ैक्ट-चेक
वायरल वीडियो की सच्चाई और संदर्भ जानने के लिए जब हमने इसके कई फ़्रेम्स का गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया तो हमें ये वीडियो ‘लिज़ा शेख’ (@liza_sheikh_2021) नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर 7 जनवरी 2026 को अपलोड किया हुआ मिला. वीडियो के साथ लिखे गए कैप्शन में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यह बच्ची की ‘बिस्मिल्लाह’ की रस्म है.

‘बिस्मिल्लाह’ की रस्म भारत और पड़ोसी देशों के मुसलमानों के बीच मनाया जाने वाला एक पारंपरिक और सांस्कृतिक समारोह है. यह रस्म तब अदा की जाती है जब कोई बच्चा पहली बार कुरान पढ़ना शुरू करता है. इस रस्म का नाम कुरान के शुरुआती शब्द ‘बिस्मिल्लाह’ से लिया गया है. आम तौर पर यह रस्म तब की जाती है जब बच्चा ठीक चार साल, चार महीने और चार दिन का हो जाता है. इस दिन बच्चे को पारंपरिक कपड़े और गहने पहनाए जाते हैं और मौलवी द्वारा कुरान की शुरुआती आयतें पढ़वाई जाती हैं. यह अक्सर करीबी रिश्तेदारों के साथ घर पर मनाया जाने वाला एक छोटा सा पारिवारिक उत्सव होता है.
जब हमने उस इंस्टाग्राम अकाउंट की गहराई से जांच की, तो पता चला कि यह अकाउंट बच्ची लिज़ा के लिए ही बनाया गया है और इसको उसके माता-पिता, मुस्कान शेख और वसीम शेख चलाते हैं. यह अकाउंट केवल इन्हीं दो लोगों (माता-पिता) को फॉलो करता है. बच्ची की उम्र की पुष्टि के लिए हमें इसी प्रोफाइल पर 2 सितंबर 2025 को अपलोड की गई एक तस्वीर मिली, इसमें एक केक की तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है “हैप्पी बर्थडे टू मी”. आगे इस अकाउंट ने बच्ची के बर्थडे के कई तस्वीर शेयर किये हैं. 4 सितंबर 2025 को इस अकाउंट ने वायरल वीडियो में दिख रही बच्ची का केक् के साथ तस्वीर अपलोड किया, जिसमें केक पर ‘लिज़ा’ लिखा है और 4 साल दर्शाने वाली मोमबत्ती लगी है.
अगर हम ‘चार साल, चार महीने और चार दिन’ वाली पारंपरिक गणित को देखें, तो 2 सितंबर को बच्ची चार साल की हुई. इसमें चार महीने और चार दिन जोड़ने पर लगभग 6 जनवरी की तारीख आती है. बच्ची के अकाउंट पर बिस्मिल्लाह की रस्म का यह वीडियो 7 जनवरी को पोस्ट किया गया था, जो इस पूरी समयरेखा और सांस्कृतिक परंपरा से बिल्कुल मेल खाता है.

10 जनवरी 2026 को लिज़ा के अकाउंट से कुछ तस्वीरें शेयर की गई थी, जिसमें बच्ची अपने माता-पिता के साथ नज़र आ रही है. इस तस्वीर से यह पूरी तरह स्पष्ट और प्रमाणित हो जाता है कि वायरल वीडियो में बच्ची के ठीक पीछे बैठा हुआ व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि उसके पिता वसीम शेख हैं.

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा भ्रामक, झूठा और निराधार है. एक बच्ची की धार्मिक शिक्षा शुरू होने से जुड़ी ‘बिस्मिल्लाह’ की रस्म को गलत तरीके से बाल विवाह या ‘निकाह’ बताकर पेश किया गया है. कई सोशल मीडिया यूज़र्स द्वारा बच्ची के पिता और मौलवी पर बाल विवाह के झूठे आरोप लगाए गए. हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक बच्ची अपने मामा के साथ दिख रही थी लेकिन लोगों ने ये कह दिया कि मुस्लिम व्यक्ति बच्ची से निकाह कर रहा है.
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