बीते दिनों कई राज्यों में अलग-अलग जगहों पर हिंदू उत्सव राम नवमी या हनुमान जन्मोत्सव के दौरान धार्मिक जुलूस निकाले गए. हिंदुत्व समूहों ने कुछ ऐसे पोस्टर्स, नारे और प्रतीक का इस्तेमाल करते हुए झांकियां (tableaux) सड़कों पर उतारी, जिससे एक खास समूह पर निशाना साधा गया. दावा किया गया कि ये झांकियां समाज में “जागरूकता” फैलाने के लिए हैं. लेकिन, इन झांकियों को गहराई से देखने पर स्पष्ट होता है कि इनका इस्तेमाल खासकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत और डर का माहौल बनाने के लिए किया जा रहा है. डिजिटल दुनिया के दौर में ये झांकियां सिर्फ़ ऑफ़लाइन तक सीमित नहीं रहती बल्कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इन झांकियों के वीडियोज़ और पोस्ट शेयर किए जाते हैं.

पहले भी हिंदू उत्सवों या त्योहारों में धार्मिक जुलूस निकाले जाते रहे हैं जिनमें जुलूस के दौरान धारदार हथियार (तलवार, भाला, चाकू) लहराते हुए मुस्लिम विरोधी नारे लगाना लगभग आम बात सी हो गई थी. लेकिन बीते कुछ वर्षों से देखें तो जुलूस के दौरान “लव जिहाद” नामक थीम पर झांकी निकालते हुए, पूरे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ नफरत को बढ़ावा दिया जाने लगा है.

पढ़ें : मुंगेर शिवरात्रि शोभायात्रा में ‘लव ज‍िहाद’ झांकी: इस्लामोफ़ोबिया और नफरत ने धर्मपरायणता को कुचल दिया?

ऑल्ट न्यूज़ ने इस आर्टिकल में बीते एक महीने के दौरान अलग-अलग राज्यों में आयोजित धार्मिक जुलूस और इनमें दिखाई गई ऐसी झांकियों के माध्यम से एक विशेष समुदाय के खिलाफ बनाई जा रही नकारात्मक छवि को सामने लाया है.

धार्मिक झांकियों में धर्म से हटकर हिंसा और नफरत

धार्मिक जुलूस में झांकियों के जरिए ऐसे दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं जिनमें कथित तौर पर मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को बहलाने-फुसलाने, जबरन धर्म परिवर्तन कराने या हिंसा करने वाले के रूप में दिखाया गया. कई झांकियों में प्रतीकात्मक तरीके से डरावने दृश्य भी हैं जिसमें ख़ून से लथपथ डमी डॉल के शरीर के टुकड़े कभी फ्रिज के अंदर तो कभी सूटकेस बैग के अंदर भरा हुआ या तो टुकड़े हवा में लटके हुए दिखाए जाते हैं. झांकियों में हथियारों के जरिए हिंसा का संकेत, “धर्म बदलने” और ‘मुस्लिम युवक से प्यार या शादी करने पर अंज़ाम’ जैसे मुस्लिम विरोधी संदेश दिए जाते हैं. झांकियों और पोस्टर बैनर में भी मुस्लिम समुदाय पर “लव जिहाद” जैसे साजिश सिद्धांत (conspiracy theory) का आरोप लगाकर मुस्लिम पुरुषों को संगठित तरीके से हिंदू महिलाओं को निशाना बनाने वाला दिखाया जाता है.

यहां, फ्रिज़ के अंदर लड़की जैसी दिखने वाली डमी डॉल के शरीर के टुकड़ों को रखने का संदर्भ, मई 2022 में श्रद्धा वॉकर हत्याकांड से है. दरअसल, मई 2022 में श्रद्धा वॉकर नामक हिन्दू लड़की की हत्या उसके मुस्लिम प्रेमी आफताब पूनावाला ने की और उसके शरीर के करीब 35 टुकड़े कर फ्रिज़ में रख दिए. तब से लेकर अभी तक इस मामले को हिंदुत्व समूह “लव जिहाद” के उदाहरण के रूप में इस्तेमाल कर पूरे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देते हैं.

इतना ही नहीं, पोस्टर और बैनर में कई नारे भी लिखे हैं, जैसे “अपने धर्म से प्रेम करें ताकि आपको दिल में जगह मिले फ्रिज़ में नहीं“,

हर हिन्दू बहनों से निवेदन है – तू दुर्गा बन, तू काली बन या झांसी की रानी बन जा पर लव जिहाद का शिकार मत बन

“तू दुर्गा बन, तू काली बन, पर कभी ना बुरखे वाली बन”

इन झांकियों में मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए बॉलीवुड प्रॉपपेगेंडा मूवी ‘द केरला स्टोरी’ के साथ कई अख़बार के कटिंग्स पोस्टर के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं. गौर करने वाली बात ये भी है कि इन जुलूसों और झांकियों का आयोजन बड़े पैमाने में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू रक्षा दल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) जैसे हिंदू संगठन करते हैं. इतना ही नहीं, इन जुलूसों में अक्सर केंद्र में स्थित सत्ताधारी पार्टी भाजपा के नेता भी शामिल होते हैं.

राजस्थान अजमेर में 19 मार्च को हिंदू नववर्ष पर ‘सेवा परमो धर्म” समिति द्वारा पंडाल में “लव-जिहाद” की झांकी के रूप मुस्लिम विरोधी मानसिकता को प्रस्तुत किया. इस झांकी में डमी डॉल को हिन्दू महिला के रूप में फ़्रिज में दिखाया गया जिसमें डॉल के लहू-लुहान टुकड़े दिखाए गए. साथ ही पोस्टर में अख़बार के कटिंग का इमेज लगाकर मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़की की ऐसी दुर्दशा करने का डर दिखाया गया.

 

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महाराष्ट्र, पुणे के अंबेगांव में 19 मार्च को विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल द्वारा आयोजित हिंदू नव वर्ष और गुड़ी पड़वा के जुलूस के दौरान “लव जिहाद” नामक झांकी प्रदर्शित की गई. इस झांकी में भी फ़्रिज और डमी डॉल के टुकड़े को एक हिंदू महिला की दुर्दशा के रूप में प्रदर्शित किया गया. केवल जुलूस में प्रदर्शित झांकी ही नहीं बल्कि उस दौरान दिखाए गए पोस्टर में लिखा था, “तू दुर्गा बन, तू काली बन पर कभी ना बुरखे वाली बन”. साथ ही ‘द केरला स्टोरी’ जैसे राजनीतिक प्रॉपगेंडा बॉलीवुड मूवी के पोस्टर भी नज़र आ रहे थे. 

 

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महाराष्ट्र, पुणे के धायरी में 26 मार्च को राम नवमी की जुलूस के दौरान “लव जिहाद जनजागृती रथ” नाम की एक झांकी निकाली गई थी जिसके पोस्टर में “लव का लबादा, जिहाद का इरादा?” और “एक अभिशाप लव जिहाद” नारे लिखे थे. इस झांकी में भी टुकड़ो में कटी हुई डमी डॉल को फ्रिज़ और सूटकेस बैग में भरा हुआ दिखाया गया. इसके अलावा झांकी में कथित मुस्लिम समुदाय को हिंदू लड़की को 4 अलग-अलग पड़ाव के ज़रिए बहला फुसलाकर हत्या करने वाले हत्यारे के रूप में भी दिखाया गया.

झांकी के आयोजक में अखिल नरवीर तानाजी मालुसरे श्रीराम नवमी उत्सव समिती, सरकार प्रतिष्ठान शामिल थे. शोभायात्रा के दौरान, बैनर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पुणे लोकसभा क्षेत्र से सांसद को-ऑपरेशन और सिविल एविएशन के राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, भाजपा नेत्री व पुणे महौपार मंजुषा नागपुरे और भाजपा के कोथरूड विधायक व महाराष्ट्र सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा एवं संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल की तस्वीरें शामिल थीं. जानकारी के लिए बता दें कि इन तीनों नेताओं की जड़े राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी है.

ये झांकी भी समाज में “जागरूकता” फैलाने के नाम पर सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत बढ़ाने का काम कर रही है.

राजस्थान के जैसलमेर में हिंदुत्व समूह द्वारा 26 मार्च को राम नवमी के जुलूस में “लव जिहाद” नामक मुस्लिम विरोधी झाँकी में बाक़ी झांकियों के जैसे ही टुकड़ो में कटी डमी डॉल दिखाई गई थीं. साथ ही गाड़ी में बने उस झांकी में जीती-जागती युवती अपने हाथ बाँधकर और ख़ून से सने सफेद कपड़े पहने हुए एक पीड़िता का किरदार निभाते नज़र आ रही थी. सभी झांकी के समान ही इस झांकी में भी मुस्लिम के ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ाने वाले पोस्टर लगाएं और “हर हिन्दू बहिनों से निवेदन है – तू दुर्गा बन, तू काली बन या झांसी की रानी बन जा पर लव जिहाद का शिकार मत बन” नारे लिखे थे.

 

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मध्य प्रदेश के दमोह में 27 मार्च को हिंदुत्व समूह ‘श्री राम सेवा समिति’ द्वारा राम नवमी शोभा यात्रा के दौरान भी “लव जिहाद” झांकी के नाम पर फंदे से लटकी डमी डॉल और फ्रिज व सूटकेस बैग में टुकड़ों में भारी हुई डमी डॉल दिखाई गई. लेकिन इस बार झांकी में सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए एक मेल पुतले को इस्मालिक पोशाक पहने और हाथों में फूल लिए दिखाया गया. साथ ही गौहत्या के विरोध में एक दूसरी झांकी भी प्रदर्शित की गई, लेकिन उस झांकी में भी दो पुतले, मुस्लिम व्यक्ति की तरह दिखाए गए जिसमें एक पुतले के हाथ में धारदार हथियार था तो दूसरे पुतले के हाथ में डमी गाय के रस्सी थी, इस पूरे जुलूस के वीडियो में मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वाली कई पोस्टर, बैनर देखने को मिलते हैं.

 

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बिहार के वैशाली में 27 मार्च राम नवमी की शोभायात्रा के दौरान हिंदू संगठन ने सभी झांकी के समान ही “लव जिहाद” नामक मुस्लिम विरोधी झांकी प्रदर्शित की जिसमें टुकड़ों में कटी डमी डॉल के हिस्से फ्रिज़ या सूटकेस में रखे हुए व हवा में लटके नज़र आ रहे थे. इस जुलूस की झांकियों में मुस्लिम समुदाय पर निशाने वाले कई पोस्टर और “प्यार में मोहब्बत के 35 टुकड़े“, “लड़की ने नहीं बदला धर्म तो लड़के ने उतारा मौत के घाट” व “Save Hindu Girls” जैसे नारे वाले बैनर लगाए गए थे.

 

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राजस्थान, हनुमानगढ़ ज़िले के रावतसर में 30 मार्च को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, मातृशक्ति, दुर्गा वाहिनी एवं समस्त हिंदू समाज समिति द्वारा “रामोत्सव धर्मयात्रा” के नाम से जुलूस आयोजित किया गया था, इस जुलूस में भी बाकी झांकियों के समान ही मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली “लव जिहाद” नामक झांकी निकाली गई. लेकिन ये झांकी तब बाकी झांकियों से अलग बन गई जब भाजपा के पीलीबंगा के पूर्व विधायक धर्मेंद्र कुमार ने उन झांकी व जुलूस का भव्य रूप से स्वागत करते हुए उसमें भाग लिया.

 

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धर्मेंद्र कुमार के जुलूस में भाग लेने और उनका स्वागत करने से कई सवाल उठता हैं. क्या भाजपा पूर्व विधायक धर्मेंद्र कुमार एक मुस्लिम विरोधी लीडर हैं? अगर नहीं तो क्या उन्हें एक समुदाय विशेष के खिलाफ निकाले गए उस झांकी को रुकवा नहीं देना चाहिए था? या झांकी रुकवाने से धर्मेंद्र कुमार के हिंदू वोटर नाराज होने का उन्हें डर था?

वैसे भाजपा पूर्व विधायक धर्मेंद्र कुमार ने ख़ुद इन जुलूस और झांकी के वीडियो को अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया हैं.

बिहार, अररिया ज़िले के जोगबानी में 27 मार्च को विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने भी राम नवमी की शोभायात्रा के दौरान “लव जिहाद” थीम पर मुस्लिम विरोधी एक झांकी निकाली. इसमें भी एक फ्रिज़ और सूटकेस पर टुकड़ों में डमी डॉल शामिल दिखाई गई. जुलूस निकलने के कुछ देर बाद पुलिस ने झांकी को आगे बढ़ने से रोक दिया. वीडियो में झांकी के रोके जाने के कारण हिन्दुत्व समूह आक्रोशित नज़र हो गए.

 

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मध्य प्रदेश के पांढुर्ना में भी 2 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा के दौरान बाक़ी झांकियों के समान ही “लव जिहाद” नामक मुस्लिम विरोधी झांकी प्रदर्शित की गई थी.

 

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उत्तर प्रदेश, गाजियाबाद ज़िले के लोनी में 5 अप्रैल को हिंदू रक्षा दल द्वारा आयोजित हिंदू धर्मोदय यात्रा के दौरान “लव जिहाद” नामक मुस्लिम विरोधी झांकी प्रदर्शित की गई. इस झांकी में भी डमी डॉल के अंगों के टुकड़ों से भरा एक फ्रिज़ व ख़ून से सने कटे हुए अंगो को हवा में लटके दिखाया गया. इसके अलावा, झांकी में एक मुस्लिम व्यक्ति के भेष में एक शख्स टेबल और फ्रिज़ में रखे शव को काटने का नाटक करते हुए दिखाया गया है. बाकी झांकियों के समान ही भी इसे समाज में जागरूकता और एकता का संदेश बताया गया.

बता दें हिंदू रक्षा दल और उसके अध्यक्ष पिंकी चौधरी व उनके कार्यकर्ता पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक बातें करने एवं उनके खिलाफ़ तलवार वितरण करने पर FIR और जेल भी हुई थी. इतना ही नहीं केवल पिंकी चौधरी पर करीब 30 FIR दर्ज हो चुकी हैं जिस पर पिंकी चौधरी और उसके समर्थक अक्सर “आज जेल, कल बेल, परसों फिर वही पुराना खेल” कहते हुए कानून व्यवस्था का मज़ाक उड़ाते हैं.

उत्तर प्रदेश, गाजियाबाद के खोड़ा में 5 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव शोभा यात्रा के दौरान “लव जिहाद” के मुस्लिम विरोधी झांकी प्रदर्शित सभी झांकियों की तरह ही डमी डॉल के खून से सने अंगों को फ्रिज़ के अंदर भरे हुए और झांकी वाले वाहन में लटकते हुए प्रदर्शित किया गया. इसके अलावा पोस्टर में सच्ची घटना पर आधारित बताने वाले शीर्षक के साथ-साथ कई अख़बार के कटिंग और न्यूज़ आउटलेट के स्क्रीनग्रैब लगाये गए.

 

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इस झांकी के पोस्टर में इस्तेमाल किए गए अख़बार के कटिंग के साथ-साथ ऑल्ट न्यूज़ की एक रिपोर्ट दिखाई गई है और कहा गया है कि इसे गौर से देखिए. जबकि असल में हिंदू समूहों ने ‘लव जिहाद’ की खबर बताते हुए ऑल्ट न्यूज़ का एक फैक्ट-चेक रिपोर्ट का इस्तेमाल किया है. इसकी हेडलाइन में इंग्लिश में साफ़-साफ़ लिखा है, “Victim of ‘Love Jihad’? No, woman with bruised eye in viral pic is a Bangladeshi Muslim who met with an accident” जिसे आसान हिंदी में कहे तो सीधे तौर पर लिखा है, ” लव जिहाद कि पीड़िता? नहीं, वायरल तस्वीर में चोट के निशान वाली महिला बांग्लादेशी मुस्लिम है, जो कि एक दुर्घटना में चोटिल हुई थी”.

जागरूकता फैलाना या सुनियोजित नफरत फैलाना?

उक्त झांकियों को में पैटर्न साफ़ नज़र है, “लव जिहाद” थीम पर आधारित झांकियों में बार-बार फ्रिज़ में कटे हुए शरीर के टुकड़े, खून से सने डमी डॉल, मुस्लिम वेशभूषा में अपराध की एक्टिंग करते हुए लोगों का इस्तेमाल. इस तरह से किसी महिला के साथ हुए जघन्य अपराध को नाटकीय रूप में पेश कर हिन्दू महिलाएं और लड़कियों के बीच डर बैठाया जा रहा है कि उनके साथ भी ऐसा हो सकता है अगर वो किसी मुस्लिम व्यक्ति के साथ किसी भी तरह का संबंध रखें. चाहे वो दोस्ती हो या प्रेम संबंध. साथ ही ये हिन्दू समुदाय के लोगों के बीच मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा और नफरत बढ़ाने की पूरी कोशिश है.

ऐसी झांकियों के आयोजन करने वाले हिंदुत्व समूहों का अक्सर ये दावा होता है कि ये “जागरूकता” फैलाने के लिए है, लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या किसी एक समुदाय को अपराधी के रूप में बार-बार दिखाना जागरूकता है? या सुनियोजित नफरत फैलाने का जरिया?

ऊपर केवल एक वीडियो में पुलिस द्वारा एक झांकी को आगे बढ़ने से रोका गया था, यानी हम नहीं कह सकते कि प्रशासन इस तरह की गतिविधियों को लेकर सतर्क नहीं है. लेकिन ये भी सच है कि कई जगहों की झांकियां, पुलिस की मौजूदगी में बिना रोक-टोक के धारदार हथियार लहराते निकलती दिखीं.

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