झारखंड के रहने वाले 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने हाल ही में CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में टेंडर की अनियमितताओं को उजागर करते हुए एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए बताया कि कैसे टेंडर के नियमों में बदलाव करके ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ (Coempt Eduteck Pvt Ltd) नामक कंपनी को ठेका दिया गया. इसके बाद कई न्यूज़ आउटलेट्स और पत्रकार ने यह दावा किया कि सार्थक सिद्धांत की इस प्रतिभा से प्रभावित होकर आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने उन्हें अपने संस्थान में नौकरी ऑफर की है.
दैनिक जागरण ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि सीबीएसई को इक्स्पोज़ करने वाले सार्थक सिद्धांत को आईआईटी कानपुर के निदेशक की ओर से जॉब ऑफर मिला है. (आर्काइव लिंक)

लाइव हिंदुस्तान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि आईआईटी कानपुर ने सीबीएसई व्हिसलब्लोअर 17 वर्षीय सार्थक सिद्धांत की प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें नौकरी का प्रस्ताव दिया है. बाद में लाइव हिंदुस्तान ने इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया. (आर्काइव लिंक)

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘दी लल्लनटॉप’ के राजनीतिक संपादक पंकज झा ने पोस्ट करते हुए लिखा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग में गड़बड़ी का खुलासा करने वाले सार्थक सिद्धांत को आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने अपने संस्थान में नौकरी का प्रस्ताव दिया है. (आर्काइव लिंक)
CBSE के OSM ऑन स्क्रीन मार्किंग में गड़बड़ी का खुलासा सार्थक सिद्धांत ने किया था. उम्र बस 17 साल. CBSE के दावों की उन्होंने पोल खोल दी थी. अब IIT कानपुर के डायरेक्टर मनींद्र अग्रवाल ने अपने संस्थान में उन्हें नौकरी का प्रस्ताव दिया है
— पंकज झा (@pankajjha_) June 11, 2026
इसी प्रकार कई अन्य मीडिया आउटलेट्स ने भी इसी दावे के साथ रिपोर्ट पब्लिश की, इनमें ‘परख खबर‘ और ‘पूर्वांचल 24‘ जैसे न्यूज़ पोर्टल्स शामिल हैं.
फ़ैक्ट-चेक
सार्थक सिद्धांत ने खुद सामने आकर इस खबर का खंडन करते हुए पत्रकार पंकज झा के ट्वीट को कोट कर स्पष्ट किया कि आईआईटी कानपुर द्वारा उन्हें नौकरी दिए जाने की यह जानकारी सच नहीं है.
this is not true. https://t.co/0uMEGZQV7e
— Sarthak Sidhant (@sidhant_sarthak) June 11, 2026
सार्थक ने एनडीटीवी से बात करते हुए बताया कि ये सभी रिपोर्टें पूरी तरह से झूठी हैं और उन्हें आईआईटी से ऐसा कोई ऑफर नहीं मिला है. सार्थक ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि नौकरी का यह प्रस्ताव उन्हें नहीं, बल्कि एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी को दिया गया था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे गलत समझ लिया और मेरा नाम छापना शुरू कर दिया.

हमें मामले से जुड़ी कई अन्य रिपोर्ट मिली जिसमें बताया गया है कि असल में आईआईटी कानपुर ने 19 वर्षीय साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर निसर्ग अधिकारी को नियुक्त किया है. निसर्ग अधिकारी ने सीबीएसई के OSM पोर्टल में सुरक्षा खामियों को उजागर किया था. आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने निसर्ग अधिकारी की नियुक्ति की पुष्टि करते हुए उन्हें महत्वपूर्ण क्षमता वाला एक प्रतिभाशाली युवा इंजीनियर बताया. निसर्ग ने भी अपने लिंक्डइन प्रोफाइल में भी ये जानकारी शेयर की है कि वह OSINT और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में आईआईटी कानपुर के साइबरसिक्योरिटी इनोवेशन हब में नियुक्त हुए हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निसर्ग अधिकारी को आईआईटी कानपुर के टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब ‘C3iHub’ में नियुक्त किया गया है. रिपोर्ट में आईआईटी कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल के हवाले से बताया गया है कि उन्होंने 22 मई को प्रकाशित निसर्ग के उस पोस्ट को पढ़ने के बाद उनसे संपर्क किया था जिसमें सीबीएसई पोर्टल की कमजोरियों का जिक्र था. मनिंद्र अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि निसर्ग अधिकारी को उनकी साइबर सुरक्षा टीम में एक इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया गया है.

कुल मिलाकर, आईआईटी कानपुर ने तकनीकी खामियां खोजने वाले साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर निसर्ग अधिकारी को नौकरी दी है, न कि टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले सार्थक सिद्धांत को. मीडिया द्वारा बिना सत्यता जांचे सार्थक सिद्धांत को नौकरी मिलने का दावा पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है, जिसका खुद सार्थक सिद्धांत ने खंडन किया है.





