20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सख़्त कार्रवाई में सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इसके बाद, हिंदू रक्षा दल के प्रमुख पिंकी चौधरी और हिंदुत्व विचारधारा वाले अन्य इन्फ्लुएंसर ने कई वीडियोज़ पोस्ट किए. इन वीडियोज़ में राईटविंग समर्थकों से दिल्ली में इकट्ठा होने और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाई करने की अपील की गई. इनमें से कुछ वीडियोज़ को लाखों और कुछ को हज़ारों बार देखा गया.
हालांकि, देश और विदेश में पुलिस की इस बर्बरता की कड़ी आलोचना हुई. लेकिन 21 से 26 जुलाई के बीच पोस्ट किए गए इन वीडियोज़ में छात्र प्रदर्शनकारियों को “देश और हिंदू धर्म का दुश्मन” बताया गया. इन वीडियो में छात्र आंदोलन में शामिल लोगों को ‘राष्ट्र-विरोधी’, ‘हिंदू-विरोधी’ या आतंकवाद से जुड़ा बताकर उनके ख़िलाफ़ हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की गई. कई वीडियोज़ में तो सनातन धर्म के मानने वालों से उन्हें “सीधा करने” और “बुरी तरह पीटने” की अपील भी की गई.
कुछ वीडियोज़ पोस्ट करते हुए पिंकी चौधरी उर्फ़ भूपेंद्र चौधरी ने बार-बार कहा कि संगठन के सदस्यों और ‘सनातन योद्धाओं’ का फ़र्ज़ है कि वो “इन देश-विरोधी प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाएं.” उन्होंने हिंदी मुहावरे “उनके पिछवाड़े लाल करने” का इस्तेमाल किया जिसका मतलब है किसी की बुरी तरह पिटाई करना.
‘आज जाग जाओ, वरना कल तुम्हें कोई नहीं बचा पाएगा’
22 जुलाई को अपलोड किए गए पहले वीडियो में, भूपेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि “छात्र और सभी देश-विरोधी ताकतें जंतर-मंतर पर युवाओं का फ़ायदा उठाने और भारत की बदनामी करने के लिए इकट्ठा हुई थीं”, साथ ही उन्होंने दावा किया कि “ये देश सनातन धर्म को मानने वालों का है.” इस वीडियो को 3,31,000 बार देखा गया था. नोट करें कि पिंकी चौधरी का फ़ेसबुक अकाउंट अब हटा दिया गया है, लेकिन उनका इंस्टाग्राम अकाउंट अब भी मौजूद है और उसपर ये वीडियोज़ भी.
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उन्होंने मौजूदा छात्र आंदोलन और भारत के बंटवारे का कारण बने विरोध प्रदर्शनों के बीच समानताएं भी बताईं. उन्होंने कहा, “अगर आप आज भी उनकी मानसिकता को नहीं पहचान पाते हैं, तो कल आप शायद उसे पहचानने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे. जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे सभी हिंदुओं से मैं कहना चाहता हूं कि देश के बंटवारे के समय भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन हुआ था. उस समय सिर्फ हिंदुओं का ही नरसंहार हुआ था जो लोग आज जंतर-मंतर पर हैं, वैसे ही लोगों ने तब आग में घी डालने का काम किया था.”
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मुसलमानों को बुरा-भला कहते हुए उन्होंने कहा, “अगर आप आज नहीं जागे, तो कल आपको बचाने वाला कोई नहीं बचेगा. मैं उन हिंदुओं से पूछना चाहता हूं जो चंद्रशेखर रावण का समर्थन करते हैं: बंटवारे के समय आपने मुसलमानों का साथ दिया और देश के बंटवारे में हिस्सा लिया, फिर भी आप मुसलमानों से खुद को नहीं बचा पाए. आपने मुसलमानों के हाथों अपने ही लोगों का नरसंहार करवाया… आज भी आप उनके साथ खड़े हैं जो भगवान राम को गाली देते हैं और माता सीता का अपमान करते हैं.”
उन्होंने ये कहकर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री मोदी को मारने के लिए लगाए गए कथित नारों से पता चलता है कि प्रदर्शनकारी असली छात्र नहीं थे. “किस तरह का छात्र आंदोलन मोदी को मारने पर केंद्रित होता है? ये देश-विरोधी ताकतों की सोच को दिखाता है.” इसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी दी और कहा कि हिंदुत्व के योद्धाओं को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें इसके नतीजे भुगतने पड़ें. उन्होंने कहा, “आज उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए.”
‘जंतर-मंतर पर मौजूद हर कोई सनातन के खिलाफ है’
23 जुलाई को भूपेंद्र चौधरी ने हिंदू रक्षा दल के अन्य सदस्यों के साथ एक वीडियो अपलोड किया. “आज जंतर-मंतर पर जमा हुए सभी लोग सनातन धर्म के खिलाफ हैं. वो कोई ऐसा मुद्दा ढूंढ रहे थे जिसके जरिए वो भारत पर हमला कर सकें और दुनिया के सामने हमारे देश को बदनाम कर सकें.”
भूपेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन में शामिल महिलाएं अश्लीलता फैला रही थीं और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रही थीं जिसे उन्होंने “अस्वीकार्य” बताया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हिंदू देवी-देवताओं को अपशब्द कहने और उनका अनादर करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने एक बार फिर HRD सदस्यों और अन्य ‘धार्मिक योद्धाओं’ से 16 जुलाई को दोपहर में जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने का आग्रह किया, ताकि “प्रदर्शनकारियों को सबक सिखाया जा सके.”
“आज मैं इस देश के सभी धार्मिक योद्धाओं और HRD के योद्धाओं से एक बात कहना चाहता हूं: अब उनसे निपटने और उन्हें करारा जवाब देने का समय आ गया है… 26 तारीख को दोपहर 12 बजे हम जंतर-मंतर पहुंचेंगे. हम न तो अपनी पुलिस का मनोबल टूटने देंगे और न ही अपनी सशस्त्र सेनाओं का… हम उन्हें बुरी तरह पीटकर ही लौटेंगे; वरना, हम घर वापस नहीं आएंगे.” इस वीडियो को 16 लाख (1.6 मिलियन) बार देखा गया था.
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हिंदू रक्षा दल के सदस्य विपिन राजपूत ने उसी सभा का एक वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया. इस वीडियो में भूपेंद्र चौधरी और शिवम राजपूत समेत ग्रुप के कई सदस्यों ने धमकी दी कि वे 26 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचेंगे और प्रदर्शनकारियों की पिटाई करेंगे.
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वीडियो में स्कार्फ़ से अपना चेहरा ढके हुए एक सदस्य ने कई अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारियों को गालियां दीं और कहा, “HRD रविवार, 26 जुलाई को जंतर-मंतर आ रहा है. अब हम देखेंगे कि [प्रदर्शनकारियों] में असल में कितना दम है. हम देखेंगे कि तुम हमें लाठियों से कैसे मारते हो, और तुम देखना कि हम तुम्हें लाठियों से कैसे मारते हैं. हम तुम्हारी अक्ल इतनी अच्छी तरह ठिकाने लगा देंगे… कि तुम इसे ज़िंदगी भर याद रखोगे. तुम कभी नहीं भूलोगे कि विरोध-प्रदर्शन क्या होता है.”
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‘जिहादी गतिविधियां, कम्युनिस्ट विचारधारा’
24 जुलाई को भूपेंद्र चौधरी ने एक लोकल मीडिया आउटलेट के साथ हुए इंटरव्यू के कुछ हिस्से पोस्ट किए. जब उनसे पूछा गया कि क्या HRD सदस्यों की मौजूदगी से टकराव हो सकता है, तो उन्होंने कहा, “टकराव तो होना ही चाहिए… तभी वो सुधरेंगे. वरना, उन्होंने सारी हदें पार कर दी हैं.”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी ‘जिहादी’ गतिविधियों में शामिल हैं और कम्युनिस्ट विचारधारा को मानते हैं. उन्होंने उन पर ‘भारत विरोधी’ नारे लगाने, जैसे “भारत तेरे टुकड़े होंगे” और राम का अपमान करने का आरोप लगाया. “इसे खत्म करने के लिए अकेले HRD ही काफी है और HRD पूरी ताकत के साथ वहां जाएगा.”
जब पूछा गया कि क्या पुलिस उन्हें आगे बढ़ने की इजाज़त देगी, तो चौधरी ने दावा किया कि पुलिस “अभी बैकफुट पर है” और चिंता जताई कि अगर पुलिस का रवैया ऐसा ही रहा तो इसके क्या नतीजे होंगे. उन्होंने कहा, “इस देश की चिंता में, हिंदुत्व के योद्धा एकजुट होंगे और जंतर-मंतर जाएंगे.” इस वीडियो को 45 हज़ार बार देखा गया था.
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उसी दिन बाद में, पिंकी चौधरी ने एक और वीडियो अपलोड किया जिसमें प्रदर्शनकारियों के छात्र होने पर सवाल उठाया गया. उन्होंने कहा कि जो लोग हिंदू धार्मिक हस्तियों का अपमान करते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचना करते हैं, खास धार्मिक नारे लगाते हैं और कुछ राजनीतिक मुद्दों का समर्थन करते हैं, उन्हें “छात्र नहीं माना जाना चाहिए.” इस वीडियो में भी उन्होंने HRD सदस्यों से प्रदर्शनकारियों का सामना करने को कहा और बार-बार धमकी दी कि 26 जुलाई को उन्हें “करारा जवाब” दिया जाएगा और “बुरी तरह पीटा” जाएगा. इस वीडियो को 5,48,000 बार देखा गया था.
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‘अश्लीलता की हदें पार कीं’
25 जुलाई को, जिस दिन पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दिया, चौधरी ने वैसी ही धमकियां दोहराते हुए एक और वीडियो जारी किया. उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर “अनैतिकता का अड्डा” बन गया है और कहा कि भले ही सरकार पीछे हट गई हो, लेकिन HRD पीछे नहीं हटेगा.
इसके अलावा, छात्रों के साथ मारपीट करने की धमकी देने के बाद, उन्होंने कहा कि ये “लड़ाई” भारत की संस्कृति और मूल्यों की रक्षा के लिए है. उन्होंने कहा, “जिस तरह से वो जंतर-मंतर पर हंगामा कर रहे हैं और जिस हद तक उन्होंने अश्लीलता की सीमाएं पार की हैं, उससे पूरी दुनिया में भारत की छवि खराब हुई है. हम ऐसे लोगों को सीधा करेंगे, चाहे नतीजा कुछ भी हो. लेकिन हम ये पक्का करेंगे कि भारत मूल्यों और संस्कृति वाला देश बना रहे.” फ़ेसबुक पर पोस्ट किये इस वीडियो को 40 हज़ार बार देखा गया था.
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‘सनातनियों को एक दिन के लिए पुलिस बनने दें’
चौधरी की तरह ही, इंस्टाग्राम पर 1,36,000 फ़ॉलोवर्स वाले ‘सनातन इन्फ़्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज ने कई वीडियोज़ अपलोड किए. इनमें उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि कट्टर हिंदुत्ववादी लोगों को एक दिन के लिए पुलिस टीम में शामिल होने दिया जाए और उन्हें प्रदर्शनकारियों पर “ज़बरदस्त कार्रवाई” करने की छूट दी जाए.
21 जुलाई को भारद्वाज ने एक रील अपलोड की जिसमें फ़ाइबर का एक डंडा (बैटन) दिखाया गया था; ये वैसा ही था जैसा 20 जुलाई को लाठी-चार्ज के दौरान पुलिस ने इस्तेमाल किया था. इस वीडियो को 4,86,000 बार देखा गया और इसके कैप्शन में लिखा था: “मुझे लाठी-चार्ज करने का मौका दें.”
अगले दिन, भारद्वाज ने एक और वीडियो पोस्ट किया जिसमें वो दिल्ली पुलिस की एक क्षतिग्रस्त वैन के सामने खड़े थे और उनके हाथ में फ़ाइबर का डंडा था. वीडियो में उन्होंने कहा, “मेरे सभी सनातनी भाइयों जिन्हें आप छात्र कह रहे थे, वो असल में आतंकवादी निकले. यहां दिल्ली पुलिस की गाड़ी में तोड़-फोड़ करने के लिए छात्र नहीं, बल्कि सीलमपुर, मौजपुर, बाबरपुर और जाफ़राबाद से कई आतंकवादी आए थे.” इस वीडियो को 22 लाख (2.2 मिलियन) लोगों ने देखा.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “दिल्ली प्रशासन से हमारी बस एक ही मांग है: बस एक दिन के लिए, हम जैसे कट्टर सनातनियों को दिल्ली पुलिस में भर्ती किया जाए. जब हम जैसे कट्टर सनातनी यहां आ गए हैं, तो सिविल पुलिस या वर्दी वाली पुलिस की क्या ज़रूरत है… बिना सिविल कपड़ों और बिना किसी वर्दी के, अगर हमने उन्हें डंडों से सीधा नहीं किया, तो मेरा नाम स्वतंत्र भारद्वाज नहीं.”
उसी दिन पोस्ट की गई एक और रील में, भारद्वाज ने सादे कपड़ों में प्रदर्शनकारियों पर हमला करते दिखे लोगों का बचाव किया और कहा कि वे असली पुलिस अधिकारी थे, न कि “गुंडे.” साथ ही, उन्होंने वीडियो में चेतावनी दी कि “असली गुंडे अभी-अभी आए हैं” — इस वीडियो को 73 लाख (7.3 मिलियन) बार देखा गया — और दावा किया कि सनातनी समर्थक पूरी दिल्ली में घूमकर निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने “गौरक्षकों और सनातनी समर्थकों” से सतर्क रहने को कहा.
इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के समय, ये रील इंस्टाग्राम पर मौजूद नहीं है. ये स्पष्ट नहीं है कि इसे अपलोड करने वाले ने हटाया है या प्लेटफ़ॉर्म ने.
उसी दिन पोस्ट की गई एक और रील में भारद्वाज ने सादे कपड़ों में मौजूद कई पुलिस अधिकारियों की पहचान की जो जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की बेरहमी से पिटाई करते हुए दिखे थे. उन्होंने पुलिस का समर्थन करते हुए कहा, “उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है. उन्होंने देश में गड़बड़ी फैलाने वाले आतंकवादियों पर लाठीचार्ज किया. अगर वो सादे कपड़ों में थे तो क्या हुआ? उन्होंने किसी छात्र को नुकसान नहीं पहुंचाया. पिटाई तो आतंकवादियों की हुई है.”
उन्होंने आगे दावा किया कि अगर पुलिस को ज़्यादा सख्ती से कार्रवाई करने की आधिकारिक इजाज़त होती, तो “लोग ज़िंदा नहीं बचते.” साथ ही, उन्होंने पुलिस से भविष्य के प्रदर्शनों में दखल न देने की अपील करते हुए कहा कि उनके जैसे सनातनी ही हालात संभाल लेंगे.
26 जुलाई को भारद्वाज ने एक और रील अपलोड की जिसमें कुछ लोग एक आदमी के साथ मारपीट कर रहे थे और वो इस हमले को बढ़ावा दे रहा था. उसने कहा, “उन्हें मारो, ये सब कॉकरोच हैं. वो ‘ब्राह्मणवाद से आज़ादी’ चाहते थे, उन्हें मारो और उन्हें वो आज़ादी दो.” वीडियो में एक और व्यक्ति को ये कहते हुए सुना जा सकता है, “ब्राह्मणवाद और RSS से आज़ादी यही है.” इस वीडियो को 3,39,000 बार देखा गया.
10 जून को पोस्ट किए गए एक और वीडियो में, स्वतंत्र भारद्वाज एक ऐसे व्यक्ति को थप्पड़ मारते हुए दिख रहे हैं जो PM मोदी का मज़ाक उड़ा रहा था; इस वीडियो का कैप्शन था, “एक और कॉकरोच मारा गया.”
भारद्वाज ने 1 जुलाई को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की.
ऑल्ट न्यूज़ ने इन वीडियो के कंटेंट के बारे में Meta को जानकारी दी है. उनका कहना है कि ये वीडियो प्लेटफॉर्म की ‘हिंसा और उकसावे से जुड़ी पॉलिसी‘ का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इनमें साफ़ तौर पर छात्रों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने और डराने-धमकाने की बात कही गई है और धमकी दी गई है. चूंकि इन वीडियो को बहुत ज़्यादा लोगों ने देखा है, इसलिए इनके लगातार फैलने से असल ज़िंदगी में हिंसा हो सकती है. इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की उस भूमिका पर सवाल उठते हैं जो वे नफ़रत फैलाने वाले और उकसाने वाले कंटेंट को रोकने में निभाते हैं, खासकर संकट के समय में.
नोट: अंग्रेजी में ये आर्टिकल 30 जुलाई को पब्लिश हुआ था. मेटा की ओर से हमें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला लेकिन और 3 अगस्त को मेटा ने पिंकी चौधरी का फ़ेसबुक पेज सस्पेंड कर दिया. साथ ही स्वतंत्र भारद्वाज का इंस्टाग्राम पेज भी सस्पेंड कर दिया गया है.
Also removed: Hindutva influencer Swatantra Bharadwaj’s Instagram page with 136,000 followers. One video where he called for violence against protestors at Jantar Mantar had 7.3 million views. This, too, was flagged by #AltNews. pic.twitter.com/UkPI5IMyxW
— Ankita Mahalanobish (@onkeyta_) August 3, 2026





