योगी का राम बाण..जिहादियों का काम तमाम” – DD न्यूज़

“लव- लैंड जिहाद पर CM योगी जमकर गरजे” – ज़ी न्यूज़

“जिहादियों को योगी ने दिया राम कथा में संदेश” – भारत समाचार

“जिहादियों का योगी करेंगे खात्मा” – रिपब्लिक भारत

“लैंड जिहाद पर योगी की वार्निंग, जिहादियों का होगा खर-दूषण जैसा हाल!” – इंडिया टीवी

“जिहादियों को CM योगी का अल्टीमेटम ! लव जिहाद, लैंड जिहाद पर सख्त चेतावनी” – ज़ी उत्तर प्रदेश – उत्तराखंड

“CM Yogi ने श्री राम का उदाहरण देकर LOVE जिहादियों को मिटाने का किया ऐलान, हिला देगा बयान” – वन इंडिया हिन्दी

कुछ प्रमुख मीडिया के खबर की ये हेडलाइंस थीं. ये सब इसीलिए प्रॉब्लेमेटिक है क्यूंकि इनमें कहीं भी कोट का इस्तेमाल नहीं किया गया है. इन मीडिया चैनलों ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2020 में लाए गए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और अवैध संपत्तियों पर की जा रही ‘बुलडोज़र कार्रवाई’ को ‘योगी का रामबाण’ और ‘अल्टीमेटम ‘कहकर प्रचारित किया.

आम लोगों के टैक्स से चलने वाली देश की सरकारी मीडिया संस्थान डीडी न्यूज़ ने 9 जून को ‘5 की पंचायत’ नामक कार्यक्रम में “योगी का राम बाण..जिहादियों का काम तमाम” हेडलाइन रखी. ये कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ योगी आदित्यनाथ के सार्वजनिक भाषण पर केंद्रित था.

इस कार्यक्रम की एंकर रीमा पाराशर कहती हैं, “योगी सरकार ने ‘जिहादी मानसिकता’ के खिलाफ़ निर्णायक युद्ध छेड़ दिया है. क्या लैंड जिहाद, लव जिहाद, धर्मांतरण इन सभी मुद्दों पर अब कोई नरमी नहीं होने वाली और सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि क्या कार्यक्रम में विपक्ष के पास इन मुद्दों पर कोई स्पष्ट जवाब है.”

डीडी न्यूज़ की एंकर रीमा पाराशर समेत चर्चा पैनल में समाजवादी पार्टी प्रवक्ता पूजा मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला, भाजपा प्रवक्ता आनंद दुबे और राष्ट्रीय लोक दल प्रवक्ता रोहित अग्रवाल के साथ उक्त सभी विषयों पर करीब 1 घंटा तक कार्यक्रम चला. 5 की पंचायत के इस पूरे कार्यक्रम के दौरान चलने वाले न्यूज़ टिकर में “योगी का राम बाण..जिहादियों का काम तमाम” टेक्स्ट चलाया गया. (आर्काइव लिंक)

दरअसल, उत्तर प्रदेश के लखनऊ ने आयोजित कथित जगद्गुरु रामभद्राचार्य की राम कथा के आखिरी दिन यानी 9 जून को कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ योगी आदित्यनाथ पहुंचे थे. जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामायण काल और आधुनिक काल की घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करते हुए कहा, “रावण और उसके राक्षस जो करना चाहते थे, उत्तर भारत में भी घुस चुके थे आर्यावत में उनकी घुसपैठ थी, पूरा दंडकारण्य खर और दूषण के आतंक से त्रस्त था, बस्तर तक ताडका पहुंच गई थी, मारीच और सुबाऊ पहुंच गए थे. वहां के सुंदर वनों को नगरों को उन्होंने उजाड़ करके तहस-नहस कर दिया था, उजाड़ कर दिया था. याद करना जब भी नकारात्मक ताकतें वर्चस्व में आएंगी ऐसी ही उजाड़ करेंगे. ऐसे ही तहस-नहस करेंगे जो रावण के समय में करते थे, शिक्षण संस्थानों को शोध के केंद्रों को वैसे ही पंजड़ करेंगे जैसे खर और दूषण और ताड़का के द्वारा उस कालखंड में किया जाता था.”

आगे, उन्होंने कहा, “माता जानकी का अपहरण रावण ने किया, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने इसके लिए अपने स्तर पर पूरा प्रयत्न किया. उत्तर और भारत को उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ा, नारी गरिमा की रक्षा कैसे करनी है? इसका उदाहरण है याद करना लव जिहाद की घटनाओं को रोकने के लिए एक आदर्श उदाहरण आप सबके सामने हो सकता है. हमें आश्चर्य होता है उच्च न्यायालय केरला ने 2009 और 2011 में इस पर चिंता व्यक्त की, कि रिलीजियस डेमोग्राफी को चेंज करने की साजिश का एक हिस्सा है, लेकिन तब भी हम उस पर ध्यान नहीं दिए. हमने 2020 में उत्तर प्रदेश के अंदर इसके लिए सख्त कानून बनाया, तब भी इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता किए जाने की आवश्यकता है. हमें सचेत रहना होगा.

ध्यान दें योगी आदित्यनाथ केरल हाई कोर्ट का जो ज़िक्र कर रहे हैं उस जजमेंट की कॉपी के मुताबिक, न्यायमूर्ति के.टी. शंकरण ने 29 सितंबर, 2009 को एक ईसाई और एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन कर उससे शादी करने के आरोपी दो मुस्लिम लड़कों, शाहन और सिराजुद्दीन की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर एक लंबा आदेश पारित किया. उन्होंने कहा, “यह सर्वविदित है कि लव जिहाद या रोमियो जिहाद के रूप में जाना जाने वाला एक मूवमेंट था.”

उन्होंने केरल के DGP को एक हलफ़नामा दायर करने का निर्देश दिया जिसमें आठ सवालों के जवाब मांगे गए कि क्या ऐसे मूवमेंट (रोमियो जिहाद) मौजूद थे, भारत और विदेश में कौन से संगठन शामिल थे, मूवमेंट को कहां से पैसे मिल रहे, क्या इसका अखिल भारतीय आधार है, कितने छात्रों का धर्मांतरण किया गया था, पिछले तीन वर्षों में इस्लाम, और क्या ‘लव जिहाद आंदोलन’ और जालसाजी, तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों के बीच कोई संबंध है.

केरल के DGP ने 18 अक्टूबर, 2009 को एक विस्तृत हलफ़नामा दायर किया जो प्रत्येक ज़िला पुलिस अधीक्षक की 14 रिपोर्टों और CID, पुलिस खुफिया, विशेष सेल और अपराध शाखा के प्रमुखों की चार रिपोर्टों पर आधारित थी.

29 सितंबर, 2009 को न्यायमूर्ति द्वारा पूछे गए सभी आठ सवालों के जवाब, कोर्ट में नकारात्मक पेश हुए. स्पष्ट रूप से ये बताया गया कि कोई संगठित गतिविधि या साजिश नहीं थी. इतना ही नहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी 1 दिसंबर 2009 को दायर हलफ़नामा में बताया कि कोई ‘लव जिहाद’ आंदोलन या संगठन अस्तित्व में नहीं था.

आगे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, “याद रखना नकारात्मक ताकते हर कालखंड (समय) मे आएंगी लेकिन समाज की सज्जन शक्ति को मिलकर के इसका मुकाबला करने के लिए तैयार होना होगा, और यही स्थिति हम सबको उस लैंड जिहाद से जुड़े हुए लोगों के प्रति भी रखना पड़ेगा. जो भगवान राम ने, आखिर खर और दूषण क्या कर रहे थे? मारीच और सुभाव क्या कर रहे थे? वे भी सब यहां लैंड जिहाद के ही अभियान के साथ जुड़े हुए थे. जबरन कब्ज़ा कर लेना. जबरन किसी भी ज़मीन को खाली देखा उसमे अपना तबू गाड़ दिया, यह सब अब बंद हो जाना चाहिए. साथ ही कहा कि भारत की धरती उन आक्रांताओं के लिए जिनकी भारत के प्रति आस्था नहीं है जो भारत के प्रति निष्ठा नहीं रखते, भारत के संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते उन लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती हैं.”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के इन्हीं बयानों पर डीडी न्यूज़ ने 5 की पंचायत कार्यक्रम में “योगी का राम बाण..जिहादियों का काम तमाम” हैडलाइन के साथ शो चलाया,  इस कार्यक्रम के क्लिप्स, डीडी न्यूज़ ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर “योगी का रामबाण… जिहादियों का काम तमाम” वाले कैप्शन के साथ कुल 10 अलग-अलग पोस्ट्स किए. इनमें 5 पोस्ट  @DDNewslive (इंग्लिश) में और 5 @DDNewsHindi में शेयर किए गए. (आर्काइव लिंक -1, लिंक -2, लिंक -3, लिंक -4, लिंक -5, लिंक -6, लिंक -7, लिंक -8, लिंक -9, लिंक -10)

इसके अलावा, DD News UP (उत्तर प्रदेश) के क्षेत्रीय समाचार केंद्र के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी “योगी का राम बाण..जिहादियों का काम तमाम” हैडलाइन के साथ खबर चलाई गई. (आर्काइव लिंक)

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देश के बाक़ी निजी मीडिया संस्थानों ने भी इस मामले पर खबर प्रकाशित की. हेडलाइन में बिना किसी कोट के ‘जिहादी’ शब्द का इस्तेमाल करने वालों की लिस्ट में ज़ी न्यूज़, ज़ी उत्तर प्रदेश – उत्तराखंड, इंडिया TV, वनइंडिया हिंदी, भारत समाचार, रिपब्लिक भारत शामिल हैं.

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जिहाद/जिहादी शब्दों का सामान्यीकरण और राजनीतिक नैरेटिव

कथित ‘लव जिहाद’ एक ऐसा शब्द है जिसे दक्षिणपंथी वर्ग किसी मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला के वैवाहिक संबंध को परिभाषित या उल्लेखित करने के लिए करते हैं. हालांकि, भारत की कानूनी प्रणाली या आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड्स में “लव जिहाद” को कोई मान्यता नहीं दी गई है, योगी आदित्यनाथ सरकार ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल सामाजिक-राजनीतिक नैरेटिव के लिए करती है जिसमें मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को बहला-फुसलाकर उनसे शादी करने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर करते हैं, कथित ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 भी लाया गया. लेकिन उस अधिनियम में कहीं भी ‘लव जिहाद’ को कानूनी भाषा के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है.

हाल के दिनों में न्यूज़ रूम्स में ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘थूक जिहाद’, या ‘वोट जिहाद’ जैसे मनगढ़ंत कहानियां खूब परोसी जाती हैं, इस तरह के शब्दों का अंधाधुंध इस्तेमाल समाज में एक खास समुदाय के खिलाफ अविश्वास और नफरत का माहौल तैयार करने का काम कर रहा है.

इस तरह की भाषा और शब्दों का सबसे खतरनाक पहलू यह भी है कि यह मुख्यधारा के समाज में ‘इस्लामोफोबिया’ को सामान्य बना देती है; जब दिन-रात टीवी स्क्रीनों पर इस शब्द को किसी नकारात्मक संदर्भ में बार-बार दोहराया जाता है, तो आम जनता के मन में उस समुदाय के प्रति पहले से ही एक राय बनने लगती है कि वह समुदाय किस तरह का है, जिसका सीधा असर आपसी भाईचारे, व्यापारिक संबंधों और सामाजिक ताने-बाने व सांस्कृतिक विविधताओं पर पड़ता है.

‘थूक जिहाद’ वाले मामले पर NBDSA का निर्णय

शिकायतकर्ता उत्कर्ष मिश्रा ने 20 दिसंबर, 2024 को न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) को एनडीटीवी द्वारा दिसंबर, 2024 में प्रकाशित “थूक जिहाद” वाले एक सेगमेंट के संबंध में शिकायत की थी. 19 मई 2026 को NBDSA ने ब्रॉडकास्टर NDTV को भविष्य में सावधान रहने और आचार संहिता के सिद्धांतों के अनुरूप ऐसे व्यापक सामान्यीकरणों से बचने की चेतावनी दी.

NBDSA ने आदेश में कहा कि विवादित प्रसारण में भोजन में थूकने वाले एक व्यक्ति की मेरठ की घटना/वीडियो निस्संदेह चौंकाने वाली और निंदनीय थी, और घटना के ब्रॉडकास्टर के कवरेज पर कोई आपत्ति नहीं उठाई जा सकती थी. समस्या इस अलग-थलग घटना के संदर्भीकरण और चरित्र-चित्रण में है. इस घटना को ‘थूक जिहाद’ के रूप में व्यापक रूप से सामान्यीकरण करना और यह सुझाव देना कि यह एक अलग घटना नहीं थी, बल्कि एक व्यापक घटना थी, इसे प्रमाणित किए बिना, आचार संहिता, विशेष रूप से नस्लीय और धार्मिक रूढ़िवादिता के खिलाफ दिशानिर्देशों का उल्लंघन था.

लेकिन भारत के टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के कुछ वर्ग लगातार ‘लव जिहाद’, लैंड जिहाद’, ‘थूक जिहाद’, ‘वोट जिहाद’ और ‘मेहंदी जिहाद’  या जिहाद’ और उससे जुड़े राजनीतिक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. जून 2022 में न्यूज़18 इंडिया को ‘थूक जिहाद’ की साजिश को बढ़ावा देने वाले एक फ़र्जी वीडियो को हटाने के लिए कहा गया था जिसे 2021 में प्रसारित किया गया था.

सवाल ये है कि जब मीडिया किसी अलग-थलग घटना या राजनीतिक आरोप को ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘थूक जिहाद’ या ‘जिहादी’ जैसे शब्दों के माध्यम से प्रस्तुत करता है, तो ये क्या केवल रिपोर्टिंग कर रहा होता है या फिर एक विशेष नैरेटिव या खास राजनीतिक धारणा को भी आगे बढ़ा रहा होता है? यदि मीडिया स्वयं ही किसी समुदाय के बारे में व्यापक सामान्यीकरण करने लगे, तो लोकतांत्रिक समाज में निष्पक्ष पत्रकारिता, सामाजिक सौहार्द और नागरिकों के बीच आपसी विश्वास की रक्षा कौन करेगा?

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाली मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी भाषा होती है और भाषा व शब्द केवल सूचना नहीं देते, बल्कि वो समाज की सोच का निर्माण भी करते हैं. लेकिन हाल के कुछ वर्षों में भारतीय न्यूज़ मीडिया के एक बड़े हिस्से में ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘थूक जिहाद’ और ‘जिहादी’ जैसे शब्दों का प्रयोग तेजी से बढ़ा है. इन शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक और सामाजिक नैरेटिव को स्थापित करने के लिए किया जा रहा है जिसने पत्रकारिता की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.