जैसे-जैसे CJP विरोध प्रदर्शनों ने ज़ोर पकड़ा, उनमें शामिल कुछ महिलाओं के ख़िलाफ़ ऑनलाइन एक समानांतर अभियान शुरू हो गया. प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने वाले अकाउंट्स ने उनके वीडियोज़ फैलाए, उन्हें गालियां दीं और संवेदनशील निजी जानकारी वाले स्क्रीनशॉट पब्लिश किए जिससे ऑनलाइन ट्रोलिंग सीधे तौर पर ‘डॉक्सिंग’ (निजी जानकारी सार्वजनिक करना) में बदल गई.
निशाना बनाई गई कई महिलाओं ने या तो विरोध प्रदर्शनों के दौरान मीडिया से बात की थी या सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए रील्स और अन्य कंटेंट पोस्ट किए थे. कई राईटविंग हैंडल्स ने उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक करते हुए उन्हें लगातार ट्रोल किया और गालियां दीं.
सबसे चिंताजनक मामला नोएडा की एक युवा महिला का था. दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान मोदी के ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसका एक क्लिप वायरल हो गया जिसके बाद दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मृति सिंह चंदेल ने उसके ख़िलाफ़ ‘ज़ीरो FIR’ दर्ज कराई. इसमें मानहानि और “शांति भंग करने के इरादे से अपमान” के आरोप लगाए गए.
स्मृति सिंह चंदेल ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर FIR शिकायत का एक फ़ोटो भी पोस्ट की जिसमें आरोपी महिला का घर का पता दिख रहा था. उन्होंने गौतम बुद्ध नगर पुलिस स्टेशन के बाहर कुछ पुरुषों का एक वीडियो भी पोस्ट किया जिनके हाथ में शिकायत की कॉपी थी और वो दावा कर रहे थे कि उन्हें उस महिला की निजी जानकारी मिल गई है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें “भरोसा” दिलाया था कि उसे कुछ ही दिनों में गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.
युवा महिला प्रदर्शनकारियों को सबसे ज़्यादा खामियाजा भुगतना पड़ा
महिला की उम्र (क्या वो नाबालिग है या नहीं) और उसके नाम को लेकर भ्रम ने मामले को और उलझा दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक वीडियो पोस्ट करने के बाद, जिसमें उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें गाली देने वाले सभी लोगों को वो “माफ़” करते हैं. एक युवती प्रदर्शनकारी ने माफ़ी का एक वीडियो पोस्ट किया. उसने अपनी ग़लती मानी और प्रधानमंत्री और देश से माफ़ी मांगी. उसने दावा किया कि वो PM के ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले दूसरों से “प्रभावित” थी.
जब ऐसी रिपोर्टें आने लगीं कि प्रदर्शनकारी असल में नाबालिग है, तो नाबालिग की डॉक्सिंग के आरोपों का जवाब देते हुए ट्रोलर्स ने दावा किया कि माफ़ी वाले वीडियो में दिख रही लड़की वायरल वीडियो वाली लड़की नहीं है. कई राईटविंग इन्फ्लुएंसर्स ने X पर दावा किया कि असल 25 साल के प्रदर्शनकारी को बचाने के लिए एक नाबालिग लड़की का इस्तेमाल किया जा रहा है. ताकि POCSO के तहत मामले दर्ज किए जा सकें. कुछ लोगों ने तो ये भी दावा किया कि वो सहानुभूति पाने के लिए अपनी छोटी बहन का इस्तेमाल कर रही थी. जबकि कुछ यूज़र्स ने अपनी बात साबित करने के लिए चेहरे की बनावट की तुलना तक कर दी.
ये मामला तब और बढ़ गया जब मेनस्ट्रीम मीडिया ने नेशनल टेलीविज़न पर उसका कथित नाम और चेहरा दिखाया. टाइम्स नाउ ने इस दावे को और हवा दी कि प्रदर्शनकारी 25 साल की महिला रुचिका सिंह थी. NDTV के शिव अरूर ने भी यही दावा किया और उसका चेहरा व पहचान उजागर कर दिया.
CNN-News18 ने भी उसका चेहरा दिखाते हुए यही दावा किया; 31 जुलाई को चैनल ने रिपोर्ट किया कि कैसे उन्होंने नोएडा में उस लड़की को उसकी सोसाइटी में ढूंढ निकाला जहां से वो कथित तौर पर भाग गई थी. पुलिस और अजनबियों के बार-बार आने-जाने के कारण, उस अकेली माँ और बेटी को कथित तौर पर अपना किराए का घर छोड़कर कहीं और जाना पड़ा.
मामला और तब बिगड़ गया जब 31 जुलाई को CNN-News 18 ने दावा किया कि उन्हें युवती प्रदर्शनकारी की ज़िंदगी से जुड़ी ऐसी “एक्सक्लूसिव जानकारी” मिली है जो “किसी और के पास नहीं है.” प्राइवेसी के उल्लंघन का एक साफ़ मामला तब सामने आया जब इस ऑर्गनाइज़ेशन का एक रिपोर्टर उस “ब्यूटी सैलून” पहुंचा जहां लड़की ने कथित तौर पर जून महीने तक नेल आर्ट सीखा था.
रिपोर्टर ने नेल सैलून के मालिक से लंबी बातचीत की और सैलून के साथ लड़की के जुड़ाव के बारे में पूछताछ की. मालिक ने बताया कि लड़की का नाम रुचिका सिंह नहीं था. जैसा कि मीडिया में दावा किया जा रहा था. उसने ये भी दावा किया कि अपनी पहचान की जानकारी, खासकर आधार कार्ड, बार-बार न दे पाने की वजह से मैनेजमेंट ने कथित तौर पर लड़की से दोबारा न आने के लिए कहा था.
ABP News के साथ एक इंटरव्यू में, डॉक्सिंग की इस घटना की शिकार महिला ने साफ़ किया कि उनका नाम रुचिका सिंह नहीं है और न ही वो 25 साल की हैं.
15 साल की बताई जा रही इस लड़की को पड़ोस के लोगों से लगातार परेशान किया जा रहा था और धमकियां मिल रही थीं जिनमें “हत्या और रेप” की धमकियां भी शामिल थीं. ABP के इंटरव्यू में दिखी लड़की की माँ ने लोगों से अपील की कि उनकी बेटी के साथ हो रही लगातार बदसलूकी बंद की जाए.
इस लड़की की माँ ने बताया, “PM द्वारा (बेटी को) माफ़ कर दिए जाने” के बावजूद, असामाजिक तत्वों और पुलिस का उनके घर आना-जाना लगा हुआ था. आखिर में, अपनी प्राइवेसी और ज़िंदगी पर बढ़ते खतरे को देखते हुए उन्हें घर छोड़ना पड़ा. लड़की की माँ ने पूछा, “एक बच्ची को परेशान करके आपको क्या मिलेगा?” साथ ही, उन्होंने अपनी बेटी को “जीवनदान” देने के लिए मोदी का शुक्रिया भी अदा किया. उन्होंने बार-बार मोदी और आम लोगों से गुज़ारिश की कि “उन्हें शांति से रहने दें और अपने घर लौटने दें.”
गौर करने वाली बात है कि स्मृति सिंह चंदेल ने खुद माना था कि उन्हें उस लड़की का नाम और जानकारी सोशल मीडिया यूज़र्स से मिली थी. पुलिस की शिकायत और FIR में लड़की की उम्र 25 साल बताई गई थी. जबकि लड़की और उसकी माँ का कहना था कि वो 15 साल की है. लड़की की माँ ने ‘द प्रिंट’ से कहा, “कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि माफ़ी उसकी छोटी बहन ने मांगी है; वो कह रहे हैं कि मैंने अपनी बेटी को छिपा रखा है. ये अजीब बात है; कोई माँ अपने बच्चे को धमकियों के इस बुरे चक्र में क्यों डालेगी?”
‘इन महिलाओं को गिरफ़्तार करो’: ऑनलाइन भीड़ का न्याय
ये कोई अकेली घटना नहीं थी. X (ट्विटर) पर कई राईटविंग अकाउंट्स महिला प्रदर्शनकारियों की पहचान करने और उनका पता लगाने में लगे हुए थे. रिटायर्ड IAS अधिकारी संजय दीक्षित (जो हिंदुत्व का प्रचार करने वाला पेज ‘जयपुर डायलॉग्स’ चलाते हैं) ने खास तौर पर उन महिला प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जिन्होंने कथित तौर पर मोदी के ख़िलाफ़ अपशब्द कहे थे. अपनी एक पोस्ट में उन्होंने ऐसी बारह महिलाओं का एक कोलाज शेयर किया और दिल्ली पुलिस से उन्हें “गिरफ़्तार करने” की अपील की.
Delhi Police
Here are the faces who Abused PM Modi
Protest is fine but such abuses and Anti India stand is not acceptableArrest Them! @DelhiPolice pic.twitter.com/kSIfZbgByC
— The Jaipur Dialogues (@JaipurDialogues) July 24, 2026
जयपुर डायलॉग्स ने नोएडा में प्रदर्शन कर रही महिला का वीडियो शेयर किया था और दावा किया था कि वो नाबालिग नहीं, बल्कि 25 साल की है.
राईटविंग विचारधारा वाले लोकप्रिय इन्फ्लुएंसर अकाउंट ‘@KreatelyMedia’ ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें तीन बच्चे इंस्टाग्राम रील में मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए दिख रहे हैं. ये बच्चे 5-7 साल से ज़्यादा उम्र के नहीं लग रहे हैं. ये वीडियो, जिसमें ओरिजिनल अपलोडर की इंस्टाग्राम आईडी भी दिख रही है, दस दिनों से ज़्यादा समय से ऑनलाइन मौजूद है.

एक और हैंडल ‘@BesuraTaansane’ ने विरोध प्रदर्शन में शामिल एक युवा लड़की का वीडियो पोस्ट किया. प्रदर्शनकारियों ने व्यंग्य करते हुए मोदी की ‘तेहरवीं’ (अंतिम संस्कार के बाद की शोक सभा) आयोजित की थी जिसे उसने अपने इंस्टाग्राम पर अपलोड किए गए वीडियो में दिखाया था. बाद में, इन अकाउंट्स ने उसके अन्य वीडियो को भी ट्रैक किया और आगे बढ़ाया.

उसी हैंडल ने विरोध-प्रदर्शन के दो मिलते-जुलते वीडियो को और ज़्यादा फैलाया. दोनों वीडियो में युवा लड़कियां (जो शायद नाबालिग थीं) नारेबाज़ी करती दिख रही थीं. इस पोस्ट का मकसद साफ़ तौर पर उन वीडियोज़ में दिख रही नाबालिग लड़कियों की पहचान करना और उन्हें निशाना बनाना था. पोस्ट में लिखा था: “छोटे बच्चों (ज़्यादातर लड़कियों) को पीएम मोदी और उनकी गुज़र चुकी माँ के लिए भद्दी गालियां देते हुए देखना—और उसे खुशी-खुशी रिकॉर्ड करके वायरल करना—ये दिखाता है कि एक समाज के तौर पर हम कितने गिरते जा रहे हैं… इन चेहरों को सोशल मीडिया पर हर जगह फैला देना चाहिए ताकि उनके कॉलेज को पता चल सके कि वो क्या कर रही हैं.”

पहले वीडियो में दिख रही लड़कियों में से एक की पहचान कर ली गई थी और उसे माफ़ी भी मांगनी पड़ी — इस बात का राईटविंग हैंडल्स ने स्वागत किया.

‘हम तुम्हें मार डालेंगे, तुम्हारा रेप करेंगे’
एक और मामला जिसने लोगों का ध्यान खींचा, वो योग इंस्ट्रक्टर श्रद्धा सिंह का है. उन्होंने विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) के जवानों को निशाना बनाते हुए एक वीडियो बनाया था. उन्होंने जो इंस्टाग्राम रील पोस्ट की थी, उसमें एक सफाई वाले प्रोडक्ट के विज्ञापन का साउंडट्रैक इस्तेमाल किया गया था. उसमें, जब नैरेटर कहता है, “नीला रंग टॉयलेट के लिए है,” तो वो नीले रंग की वर्दी पहने RAF जवानों की ओर इशारा करती हैं. जब आवाज़ बदलती है और कहा जाता है, “लाल रंग बाथरूम के लिए है,” तो वो अपनी लाल टी-शर्ट की ओर इशारा करती हैं.
वीडियो वायरल होने के बाद, उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें “सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से रेप और जान से मारने की धमकियां” मिलीं. जबकि उन्होंने एक घंटे के अंदर ही वीडियो डिलीट कर दिया था और माफ़ी भी मांग ली थी. BBC हिंदी के साथ एक इंटरव्यू में, श्रद्धा सिंह ने बताया कि सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने के बाद भी बदसलूकी नहीं रुकी; हालात इतने खराब हो गए कि उनके दोस्तों और माँ को भी सोशल मीडिया और उसके बाहर परेशान किया गया. इतने ज़्यादा विरोध के बाद उन्होंने समाज में “फ़िट न हो पाने” का डर भी ज़ाहिर किया.
मीडिया आउटलेट ‘स्क्रॉल’ को दिए अपने बयान के मुताबिक, BJP समर्थकों को उनकी एक बहुत पुरानी पोस्ट मिली जिसमें उनकी कार की नंबर प्लेट दिख रही थी. उन्होंने उस नंबर प्लेट का इस्तेमाल करके उनका मोबाइल नंबर और अड्रेस का पता लगा लिया. उन्होंने आरोप लगाया, “कुछ लोगों ने फ़ोन करके कहा, ‘जैसे ही हम तुमसे मिलेंगे, तुम्हें मार डालेंगे, तुम्हारा रेप करेंगे.”
एक और मामले में, यूज़र ‘@CommanMan777589′ ने एक युवा लड़की का वीडियो शेयर किया. उनका दावा था कि लड़की लगभग 10-12 साल की है, नाबालिग है. वीडियो में लड़की कहती है कि मोदी को गालियां देने के बजाय चप्पल मारी जानी चाहिए.
इस वीडियो को शेयर करते हुए और एक नाबालिग लड़की की पहचान (उसका नाम और वह किस शहर में रहती है) सार्वजनिक मंच पर उजागर करते हुए, यूज़र ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग किया. उन्होंने मंत्री से “सोशल मीडिया पर मौजूद बच्चों” को ब्लॉक करने और ऐसे वीडियो बनाने वाले बच्चों के माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की. पोस्ट में ये भी कहा गया कि “सोशल मीडिया की वजह से Gen Z (आज की युवा पीढ़ी) भटक रही है” और प्रधानमंत्री से इसे “ठीक करने” की अपील की गई.

मुंबई की रहने वाली रिया अहीर जिन्होंने शिवाजी पार्क में CJP के एकजुटता प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को ले जा रही पुलिस वैन को रोककर सबका ध्यान खींचा था (उनके वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गई थीं), ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार ऑनलाइन परेशान किया जा रहा है.
विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, उन्होंने मीडिया से अपनी बात कहने का तरीका बदलने और उन्हें उस महिला के तौर पर नहीं जिसने “पुलिस वैन रोकी थी”, बल्कि उस महिला के तौर पर पहचानने की अपील की, जिसने “20 बच्चों की गैर-कानूनी हिरासत को रोका था.”
रिया अहीर ने कहा, “मैंने जो किया, उसके कारण मुझे लगातार परेशान किया जा रहा है.” उन्होंने कहा कि वो इस दुर्व्यवहार को “उत्पीड़न और ट्रोलिंग” मानती हैं क्योंकि “ये एक अपराध है.” रिया ये भी बताया कि उन्होंने 27 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई थी. लेकिन 5 अगस्त तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई थी.
Thank you every one and @RahulGandhi sir for all the love, support, appreciation it makes all the difference ♥️and I’d say haters but what they are doing is criminal so to whoever you serve, your narrative can’t change the reality.
xx
Rhiya pic.twitter.com/ESJsj3tw5J— Rhiya (@Rhiyahir) August 5, 2026
देखते हैं उन्हें नौकरी कौन देता है: अर्नब गोस्वामी
रिपब्लिक टीवी पर अर्नब गोस्वामी की एक डिबेट में ये सवाल उठाया गया कि क्या सिर्फ़ माफ़ी मांग लेने से प्रधानमंत्री और दूसरे सरकारी अधिकारियों के ख़िलाफ़ अपशब्द और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर अपराधों की भरपाई हो जाती है.
अर्नब गोस्वामी का कहना है कि इन प्रदर्शनकारियों को सिर्फ़ माफ़ नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन पर गंभीर आरोप भी लगाए जाने चाहिए ताकि उन्हें सबक मिल सके. रिपब्लिक टीवी ने प्रदर्शनकारियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के माफ़ी मांगते हुए 10 वीडियो दिखाए. साथ ही वो वायरल क्लिप भी दिखाए जिन्हें उन्होंने “अश्लील” बताया. अर्नब गोस्वामी ने ज़ोर देकर कहा, “उन्हें क़ानून का सामना करने दें, ताकि उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी मामले इतने मज़बूत हों… देखते हैं उन्हें रोज़गार कौन देता है, उन्हें नौकरी कौन देता है, उनके साथ कौन जुड़ता है…”
रिपब्लिक भारत के एक शो में, अर्नब गोस्वामी ने हिंदी में अपनी मांगें दोहराईं: “इन्हें न नौकरी मिले, न माफ़ी मिले. इन्हें न मौका मिले, न माफ़ी मिले. इन्हें कानूनी तरीके से छोड़ा न जाए.” उन्होंने फिर कहा कि इन इन्फ्लुएंसर्स ने भले ही अपने विवादित वीडियो के लिए माफ़ी मांग ली हो. लेकिन उन्हें माफ़ नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वो “सनातन-विरोधी, मोदी-विरोधी, भारत-विरोधी” हैं और उस “टुकड़े-टुकड़े गैंग” का हिस्सा हैं, जैसा कि वो इसे कहते हैं.
रिपब्लिक भारत ने कैमरे पर एक युवक को थप्पड़ मारे जाने और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में उसकी अभद्र टिप्पणियों के लिए माफ़ी मांगने को कहे जाने का फ़ुटेज दिखाया; साथ ही, विरोध करने वालों की निजी जानकारी जिसमें उनके नाम और तस्वीरें शामिल थीं, वो भी प्रसारित कीं.
टाइम्स नाउ ने भी श्रद्धा सिंह का इंटरव्यू लिया जिसमें एंकर ने सोशल मीडिया पर उन्हें परेशान किए जाने (hounding) के मुद्दे पर कोई बात नहीं की, बल्कि इन्फ्लुएंसर पर अपनी और दूसरों की ग़लती की ज़िम्मेदारी लेने का दबाव डाला. NDTV इंडिया ने भी उनका इंटरव्यू लिया, जहां इसी तरह, उत्पीड़न और डॉक्सिंग (निजी जानकारी सार्वजनिक करने) के उनके आरोपों को खारिज कर दिया गया.





