27 अप्रैल, 2026 की सुबह बरेली कैंट थाना क्षेत्र के पालपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास को रेलवे ट्रैक पर एक क्षत-विक्षत शव पाया गया. जांच में पुलिस को मृतक के पास मिले मोबाइल और आधार कार्ड से उसकी पहचान बिहार के किशनगंज ज़िले के 35 वर्षीय मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना तौसीफ रज़ा मजहरी के रूप में हुई. तौसीफ रजा मूल रूप से बिहार के किशनगंज ज़िले के पाठामारी थाना क्षेत्र के बाखोटोली गांव के रहने वाले थे और एक मदरसे में शिक्षक थे. वो बरेली में आयोजित ‘उर्स-ए-ताजुश्शरिया’ में भाग लेने आए थे. कार्यक्रम खत्म होने के बाद 26 अप्रैल को वे 04314 योगनगरी ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर स्पेशल ट्रेन से वापस घर लौट रहे थे.

शुरुआत में, बरेली पुलिस ने इसे एक सामान्य दुर्घटना मानते हुए कहा, “मौके की परिस्थितियों, शव के निरीक्षण एवं प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह तथ्य प्रकाश में आया कि अत्यधिक गर्मी के कारण मृतक ट्रेन के गेट पर बैठने के दौरान झपकी आने से असंतुलित होकर नीचे गिर गया, जिससे सिर, पैर, कमर व चेहरे पर गंभीर चोटें आने के कारण उसकी मृत्यु हुई. घटनास्थल अथवा अन्य किसी स्रोत से मृतक के साथ किसी प्रकार के झगड़े, मारपीट या धक्का देकर गिराए जाने का कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है. मृतक की तलाशी में उसका मोबाइल फोन, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड व अन्य सामान सुरक्षित प्राप्त हुआ. प्रकरण में किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश/हमले की पुष्टि नहीं हुई है. परिजनों द्वारा किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई आरोप नहीं लगाये गये है.”

हालांकि, मौलाना की पत्नी तबस्सुम खातून ने मीडिया को दिए बयान में बताया कि 26 अप्रैल की रात लगभग 10:30 बजे उनके पति का कॉल आया था, जिसमें वे काफी डरे हुए थे. मौलाना ने अपनी पत्नी को बताया था कि ट्रेन में नशे में धुत कुछ लोग चोरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट कर रहे हैं. इस घटना का एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें मौलाना मदद की गुहार लगाते सुनाई दे रहे थे. रिकॉर्डिंग में वो कहते हैं “हैलो तबस्सुम, ट्रेन में एक शराबी ने मुझे पकड़ लिया है और उल्टा-सीधा बोल रहा है और मुझे मार रहा है. पुलिस को कॉल कर दो…” इसके साथ ही वो लोगों से मदद की गुहार लगाते हुए भी सुनाई देते हैं.

ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी, नगीना के चंद्रशेखर आजाद, किशनगंज के सांसद मोहम्मद जावेद समेत कई नेताओं और संगठनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की. 30 अप्रैल को एसपी सिटी, बरेली, मानुष पारीक ने मीडिया को दिए बयान में कहा की मृतक के परिजनों द्वारा ट्रेन में मारपीट की आशंका जताई जा रही है, पुलिस ने परिजनों से बात कर तहरीर प्राप्त करने पर मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया. 4 मई को मौलाना की पत्नी तबस्सुम खातून ने बरेली पहुंचकर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई.

रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जीआरपी ने मामले की सघन जांच शुरू की. इस मामले में जीआरपी एसएचओ सुशील कुमार वर्मा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित की गई, मुरादाबाद अनुभाग जीआरपी के एसपी आशुतोष शुक्ला ने भी टीम के साथ जाकर घटनास्थल का निरीक्षण किया. एसपी शुक्ला के निर्देश पर पुलिस ने बरेली जंक्शन पर लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज खंगालना शुरू किया.

ऑल्ट न्यूज़ ने इस मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे जीआरपी एसएचओ सुशील कुमार वर्मा से बात की. उन्होंने हमें इस मामले की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को मृतक मौलाना तौसीफ़ रज़ा बरेली में एक उर्स में शामिल होने के बाद करीब 9 बजे योग नगरी एक्सप्रेस में सवार हो गए थे. उनके पास जनरल का टिकट था, लेकिन वह स्लीपर कोच में चढ़ गए थे. उसी कोच में मुरादाबाद के मुगलपुरा का रहने वाला पंकज राजपूत नाम का एक युवक भी सफर कर रहा था, जो अपनी बहन की ससुराल में शादी समारोह में शामिल होने के लिए बरेली आ रहा था. युवक अत्यधिक नशे में था, जिसके कारण उसे बरेली स्टेशन पर उतरने का ध्यान ही नहीं रहा. ट्रेन जब बरेली से आगे बढ़ी, तो युवक ने मौलाना पर आरोप लगाया कि उसने उसका मोबाइल फोन चुरा लिया है.

उन्होंने कहा कि शक के आधार पर युवक ने मौलाना के साथ विवाद शुरू कर दिया और उसके साथ मारपीट भी की. लोगों ने उसे समझाया और बीच-बचाव की भी कोशिश की, विवाद से बचने के लिए मौलाना आगे के डिब्बों की ओर जाने लगे, लेकिन शराबी युवक ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. वह मौलाना के पीछे-पीछे कोच नंबर 10 से 9, 9 से 8 और फिर जब मौलाना 8 नंबर से 7 नंबर कोच में जाने लगा तो युवक ने मौलाना को घेर लिया और दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और हाथापाई के दौरान शराबी युवक ने मौलाना को चलती ट्रेन से बाहर धक्का दे दिया, जिससे गिरकर मौलाना की दर्दनाक मौत हो गई.

मौलाना को धक्का दिए जाने के तुरंत बाद ट्रेन में मौजूद अन्य यात्रियों, जिनमें होमगार्ड परीक्षा देने जा रहे कई लड़के शामिल थे, उन्होंने आरोपी युवक को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की. यात्रियों के गुस्से और पूछताछ से बचने के लिए आरोपी ने अपना बचाव करते हुए अपना मोबाइल और पर्स चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया. गुमराह करने के लिए उसने यात्रियों को अपना नाम ‘अहमद’ बताया, जबकि इससे पहले उसने एक बार ‘जय श्री राम’ का नारा भी लगाया था, जिससे यात्रियों में भारी भ्रम पैदा हो गया. लोगों ने आरोपी को जमकर पीटा, चूंकि वह नशे में था तो इसलिए उसपर कोई असर ही नहीं पड़ रहा था. जब ट्रेन शाहजहांपुर स्टेशन पहुंची, तो यात्रियों ने उसे जीआरपी के हवाले करने के लिए नीचे उतारा, लेकिन तभी ट्रेन चल दी. यात्री अपनी ट्रेन छूटने के डर से वापस डिब्बों में चढ़ गए और इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर आरोपी शाहजहांपुर स्टेशन से भाग गया. यह एक ‘ब्लाइंड मर्डर’ केस था, लेकिन घटना के वक्त मौलाना ने अपनी पत्नी को फोन भी मिलाया था, जिसमें यह ऑडियो रिकॉर्ड हो गया था कि एक शराबी व्यक्ति उन्हें मार रहा है और परेशान कर रहा है. मौलाना ने पत्नी से पुलिस से मदद मांगने को भी कहा था. इसी ऑडियो के आधार पर स्पष्ट हुआ कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है, जिसके बाद 4 मई को हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया. पुलिस के लिए यह मामला सुलझाना एक बड़ी चुनौती बन गया था क्योंकि आरोपी ने मोबाइल रास्ते में ही फेंक दिया था, शाहजहांपुर प्लेटफॉर्म पर कोई सीसीटीवी कैमरा भी नहीं था और पुलिस को कोई आरोपी का हुलिया बताने वाला या आरोपी की पहचान या तस्वीर भी पुलिस के पास नहीं थी.

इस मामले की जांच करते हुए एसएचओ सुशील कुमार वर्मा और उनकी टीम ने मुखबिरों और सर्विलांस सेल की मदद से ये जानकारी जुटाई कि कितने यात्री कहां से सवार हुए और किन-किन स्थानों पर उतरे. इसके लिए बरेली और मुरादाबाद से लेकर शाहजहांपुर और सीतापुर तक के पूरे रूट पर मोबाइल डाटा डंप निकलवाकर सर्विलांस की मदद ली गई. पुलिस ने विशेष रूप से उन यात्रियों को ट्रेस करना शुरू किया, जो शाहजहांपुर में उतरे थे. तकनीकी जांच के दौरान उन सभी मोबाइल नंबरों का डेटा छांटा गया, जो शाहजहांपुर तक सक्रिय थे लेकिन उसके बाद अचानक बंद हो गए या जिनकी लोकेशन आगे नहीं बढ़ी. पुलिस टीम ने उन सभी व्यक्तियों के फोन नंबर निकाले और उनसे संपर्क किया. पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की ताकि मामले से जुड़ा कोई सुराग हाथ लग सके. हालांकि, जांच टीम को इन लोगों से कोई भी अहम जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी.

इसके बास पुलिस ने रेलवे को पत्र लिखकर कोच नंबर 8, 9 और 10 के यात्रियों की सूची और उनके मोबाइल नंबर मंगवाया. एसएचओ के नेतृत्व में टीम ने करीब 200 से 250 यात्रियों से फोन पर संपर्क किया. पूछताछ के दौरान एक यात्री ने पुलिस को घटना की एक छोटी वीडियो क्लिप भेजी, इसके बाद एक अन्य यात्री ने एक और स्पष्ट वीडियो उपलब्ध कराया, जिसमें मौलाना को धक्का दिए जाने के बाद आरोपी की पिटाई होते हुए दिखाई दे रही थी. इस वीडियो में आरोपी का चेहरा बिल्कुल साफ नजर आ रहा था. चेहरे की पहचान होने के बाद सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने उन सभी रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जहां से आरोपी के चढ़ने की संभावना हो सकती थी, इसी क्रम में पुलिस ने सर्विलांस के सहयोग से आरोपी के हुलिये को मुरादाबाद स्टेशन पर मैच किया. मुखबिर की सूचना पर मुरादाबाद के मुगलपुरा निवासी मुख्य आरोपी पंकज राजपूत को बरेली रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में आरोपी ने पूरी घटना बताई और अपना जुर्म कबूल किया है. आरोपी द्वारा रास्ते में फेंका गया मोबाइल भी पुलिस ने बरामद कर लिया है, जो किसी राहगीर को मिला था और उसने आरोपी के भाई को सौंप दिया था. पुलिस ने सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर हत्यारोपी को जेल भेज दिया है.

पुलिस जांच के दौरान इस मामले में दो बार जांच को भटकाने का मामला सामने आया. एक तरफ इतनी जघन्य घटना के बावजूद उस दौरान ट्रेन में यात्रा कर रहे मुजफ्फरपुर निवासी अभिषेक पांडे नाम के एक यात्री ने पुलिस की जांच को गुमराह करने की कोशिश करते हुए यह झूठा दावा किया कि मौलाना ने खुद चलती ट्रेन से छलांग लगाई थी. वहीं दूसरी ओर, यह बात भी प्रकाश में आई है कि आरोपी ने जीआरपी को चकमा देने के लिए अपना नाम पंकज के बजाय ‘रहमान’ बताया था. जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि ट्रेन में मौलाना के साथ हुई कहासुनी के दौरान भी आरोपी ने खुद को ‘रहमान’ ही बताया था, जिसकी पुष्टि उस कोच में यात्रा कर रहे अन्य यात्रियों से की गई पूछताछ में हुई है.

केस के बारे में बात करते हुए एसएचओ सुशील कुमार वर्मा बताते हैं की टीमवर्क से हमलोग इस केस को सुलझाने में सफल रहे. इस जांच के दौरान पुलिस को भारी असहयोग का सामना करना पड़ा. अधिकांश यात्रियों ने घटना की जानकारी होने से इंकार कर दिया, जबकि कई लोगों ने पुलिस की इस पूछताछ को स्कैम या फ्रॉड समझकर अधिकारियों को ही भला-बुरा कहा. तमाम बाधाओं के बावजूद पुलिस टीम जांच में जुटी रही आरोपी को पकड़ लिया.