21 जनवरी 2025 को उत्तरप्रदेश के रायबरेली के शिवगढ़ में विशाल पद यात्रा और एक सभा का आयोजन किया गया. इस दौरान खुद को कथित हिंदू धर्म का रक्षक बताने वाले सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, मुस्लिम व ईसाई समुदाय को निशाना बनाए. आयोजन के दौरान धारदार हथियार लहराती भीड़ के बीच सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले हिसंक भाषण दिए गए.
आयोजन कब और किसने कराया था?
ये आयोजन, बाबा बागेश्वर उर्फ धीरेंद्र शास्त्री के भारत को कथित हिंदू राष्ट्र और गाय को राष्ट्र माता बनाने की मांग के समर्थन में था. खुद धीरेंद्र शास्त्री ने इस आयोजन में लोगों को शामिल होने का निवेदन किया और कहा कि 21 जनवरी को हिंदू राष्ट्र के लिए, सनातन एकता, सामाजिक समरसता और हिंदुत्व जागृति के लिए अभिषेक ठाकुर अपनी टीम के साथ पद यात्रा निकालने जा रहे हैं. उन्होंने सभी लोगों से प्रार्थना किया कि हिंदू एकता को बढ़ावा दें. हिंदुओं का जोर पूरी दुनिया देख सकें, इसके लिए ऐसे पद यात्रा कार्यक्रम में शामिल होकर पूरे देश में हिंदुत्व के एक नए विचार प्रस्तुत करें. धीरेंद्र शास्त्री ने इस कार्यक्रम को भारतीय हिंदू के लिए नए विचार और सामाजिक समरसता का कार्यक्रम बताया.
इस पद यात्रा और सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से कथित धर्म रक्षक नज़र आए. पद यात्रा में लोगों की भीड़ धारदार हथियार लहराते हुए जुलूस निकाल रही थी.
ये पद यात्रा शिवगढ़ रायबरेली में जाकर एक सभा में बदल गई जिसका नाम दिया गया, “विराट हिंदू सम्मेलन”. इस सभा में राइट विंग इंफ़्लुएंसर अभिषेक ठाकुर, अक्कू पंडित, दक्ष चौधरी, प्रकाश सिंह, युधिष्ठर राणा, गौरव सिंह राजपूत, अन्नू चौधरी, स्वतंत्र भारद्वाज, खुश्बू पांडे, रिद्धिमा शर्मा, श्वेता चौहान, ठाकुर राम सिंह समेत और भी इंफ्लुएंसर्स मंच पर उपस्थित थे. इस सभा में महिला, पुरुष, बुजुर्ग, युवा सभी बड़ी तादात में शामिल हुए थे.
रिद्धिमा शर्मा: “वो आपके एक हिंदू बहन को भगा रहे हैं, आप उनकी हरामखोरों की 100 को भगाओ”
यूं तो ये सभा, कथित तौर पर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने और सामाजिक समरसता के लिए आयोजित की गई थी. लेकिन, सभा में सीधे तौर पर भारतीय मुस्लिम समुदाय और ईसाई समुदाय को निशाना बनाया गया और कई घृणास्पद बयान व भाषण दिए गए. कथित सनातनी इंफ्लुएंसर रिद्धिमा शर्मा ने इस बीच हेट स्पीच दी. उसने वर्तमान में बांग्लादेश की स्थिति को भावनात्मक ढाल बनाकर भारतीय मुसलमानों को निशाना बनाते हुए कहा, “हिंदुओं को मार रहे हैं, हम इस भारत के अंदर अब इनको (मुस्लिमों) और बर्दाश्त नहीं करेंगे, अगर वो (मुसलमान) आपके दो लोगों को मारते है, आपके दीपू चंद्र दास को ज़िंदा जला रहे हैं तो आप उनके (मुस्लिम समुदाय के) 100 लोगों को नुक़सान करोगे, तब जाकर शांति आएगी, वो आपके एक हिंदू बहन को भगा रहे हैं आप उनकी हरामखोरों की 100 को भगाओ ना, तब जाके शांति आएगी.”
आगे, रिद्धिमा शर्मा ने भारतीय मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या को लेकर कहा, “वैसे भी उनकी तो इतनी ज़्यादा फसल बड़ी हुई है थोड़ा तो कम करना पड़ेगा ना अपन को”.
रिद्धिमा ने भाषण में मुस्लिम समुदाय पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा, “हिंदू लड़कियां मुसलमानों को केवल ‘लव जिहाद’ के लिए चाहिए होती हैं, वरना लव तो वो अपनी के साथ भी कर लेते हैं क्योंकि एक ही कॉम ऐसी है जिसके अंदर अपनी सगी बहन को बेगम बनाने की परंपरा है. जो लोग ख़ुद ही अपने घर में मुंह मार लेते हैं वो आपके और मेरे कहां से अपने होंगे”.
खुश्बू पांडे: “जब हम मार के गाड़ते हैं तो उसपे आर्गेनिक गोभी उगाते हैं.”
सभा में एक और ‘सनातनी’ इंफ्लुएंसर खुश्बू पांडे ने 1989 भागलपुर हिंसा का हवाले देते हुए उसी तरह नरसंहार करने का आह्वान किया. उसने कहा, “हम हैं बिहार से और बिहार के भागलपुर में एक सदी में 15 मिनट के लिए पुलिस हटी थी, और बहती हमारी गंगा मैया और गंगा मैया की सौगन्ध उस बहती हुई गंगा नदी में एक भी लाश हिंदू की नहीं थी. 15 मिनट के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं कि कुछ काम हमारे पूर्वज कर दिए और कुछ हमारे लिये छोड़ गए, तो क्यों न एक बार 15 मिनट हमें भी दे दिया जाए. तुम मरने के बाद गाड़ते हो तो कीड़ा मकौड़ा लगता है, और जब हम मार के गाड़ते हैं तो उसपे आर्गेनिक गोभी उगाते हैं. वो सदी अगर याद नहीं है तो फिर से याद दिला दें.”
अक्टूबर 1989 में बिहार के भागलपुर शहर में क्रूर हिंसा भड़की थी. भागलपुर दंगों का तत्कालिक कारण विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) का पांच दिवसीय रामशिला कार्यक्रम था जिस दौरान हिंदू छात्राओं की हत्या मुस्लिम समुदाय द्वारा किए जाने की अफ़वाह के चलते और जुलूसों के दौरान की गई भड़काऊ नारेबाज़ी व कार्रवाइयों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया. इस कारण संगठित सांप्रदायिक हिंसा 2 महीने तक चली. रिपोर्ट के अनुसार, हजारों की संगठित भीड़ ने 250 से अधिक गांवों को जला दिया और पूरे ज़िले में सामूहिक नरसंहार हुए, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की संख्या लगभग 1,000 थी (जिनमें 90 प्रतिशत मुस्लिम थे). लेकिन स्वतंत्र अनुमानों के अनुसार, मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक थीं.
भागलपुर हिंसा का भयावह प्रभाव लोगैन गांव में देखा गया था, अक्टूबर 1989 में पुलिस अधिकारी रामचंदर सिंह के नेतृत्व में 4000 लोगों की भीड़ ने 116 मुसलमानों की हत्या कर दी. सबूत मिटाने के लिए उनके शवों को फूलगोभी और गोभी के पौधों के बीच दफनाकर छिपा दिया गया. इस घटना को ‘फूलगोभी नरसंहार’ के नाम से भी जाना जाता है.
ये पहली बार नहीं है जब इंफ्लुएंसर खुश्बू पांडे ने भागलपुर की तरह नरसंहार करने का आह्वान व 15 मिनट देने और हिंसक बयान दिया. खुश्बू ने 8 जनवरी को और हाल ही में अब दिल्ली के एक रैली में भागलपुर नरसंहार दोहराने के हिंसक बयान दोहराती हुई नज़र आयी हैं.
हिंदू सम्मेलन के बीच मंच से ख़ुशबू पांडे ने अपने कमर पर रखे हथियार को ऊपर हवा में लहराते हुए कहा, “हिंदू धर्म में हर एक सनातनियों को आवश्यकता है कि अपना शस्त्र अपने साथ लेके चलें और वैसे वकालत की पढ़ाई कर रहे हैं जो केस मुक़दमा होगा हम देखेंगे.”
सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास यही नहीं रुका, उसी मंच से युद्धिष्ठिर राणा तलवार बांटने और तलवार से किए जाने वाली हिंसा को महाभारत का उदाहरण देते हुए समझाया. साथ ही कार्यक्रम में शामिल लोगों को बांग्लादेश में कथित हिंदू हिंसा का डर बताकर हथियार उठाने और उन्हें अपने पास रखने के लिए उकसाया जा रहा था.
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ से शामिल हुए कथित हिंदू धर्म रक्षक ठाकुर राम सिंह ने भी मुस्लिमों और ईसाई समुदाय के खिलाफ बयान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कुछ न करने पर हथियार उठाने की चेतावनी दी और कहा, “मोदी जी से बहुत हो गया मन की बात, मन की बात, अरे मन की बाते बंद करो. मत ज्ञान बांटिए मोदी जी, सीधे-सीधे गद्दारों का गला काटिये मोदी जी, और नहीं तुम्हारे वस में हो तो हमें बोल दो मोदी जी, संविधान से बंधे हाथ हमारे खोल दो मोदी जी, अरे ज्यादा कुछ तो नहीं समूचा भार उठाने वाले हैं हम भारत के बेटे भी हथियार उठाने वाले हैं.”
इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में प्रकाश सिंह, अक्कू पंडित और दक्ष चौधरी केवल मुस्लिम समुदाय या अपने विरोधियों को निशाना ही नहीं बना रहे थे बल्कि उन पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें गालियां देते नज़र आए. इन्होंने आयोजक अभिषेक ठाकुर के समर्थन में कहा कि मोदी और योगी रहे या न रहे लेकिन आने वाले समय में देश के अंदर अभिषेक ठाकुर रहेगा.
शिवगढ़, रायबरेली में आयोजित ये तथाकथित “विराट हिंदू सम्मेलन” सामाजिक समरसता या हिंदू एकता का कार्यक्रम नहीं था. बल्कि खुले तौर पर सांप्रदायिक नफ़रत, हिंसा और नरसंहार को सामान्य बनाने का मंच था, जहां कथित धर्म रक्षक और राइट विंग इंफ्लुएंसर खुले मंच से हथियार लहराते नज़र आए. ग़ैर हिन्दू समुदायों को निशाना बनाना, कानूनी संरक्षण का दावा करते हुए ये कहना कि FIR हम देख लेंगे, ये सभी कानून प्रशासन को खुली चुनौती देने जैसा है.
21 जनवरी को शिवगढ़ में आयोजित इस तथाकथित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ के सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसक बयान वाले वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद इन सभी पर मुक़दमा दर्ज कर गिरफ़्तारी की मांग की जाने लगी.
हालांकि, शिवगढ़ पुलिस ने इस पूरे मामले को लेकर 25 जनवरी को सत्यम त्रिवेदी नामक स्थानीय निवासी द्वारा कार्यक्रम में भडकाऊ बयानबाजी कर धार्मिक भावनायें आहत करने कि शिकायत पर एफआईआर दर्ज की. एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353(2) के तहत अभिषेक ठाकुर, दक्ष चौधरी, रिद्धिमा शर्मा, खुश्बू पांडे, डॉ. प्रकाश सिंह, अक्कू पंडित समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई.

गौर करें कि 21 जनवरी को दिए गए इन भाषणों के बाद 25 जनवरी FIR दर्ज की गई. लेकिन 29 जनवरी को ये रिपोर्ट पब्लिश किये जाने तक इन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. पहला नाम अभिषेक ठाकुर इसी बीच 27 जनवरी को रायबरेली के कलेक्ट्रेट से मिलता है और UGC के खिलाफ़ ज्ञापन सौंपता है. ऑल्ट न्यूज़ ने रायबरेली पुलिस से इस मामले पर संपर्क किया है. जानकारी मिलने पर इस आर्टिकल को अपडेट किया जाएगा.
गौरतलब है कि इस सम्मेलन में शामिल कई राइट विंग इंफ्लुएंसर्स पहले भी इस तरह के बयान देते दिखे हैं. अभिषेक ठाकुर, स्वतंत्र भारद्वाज, खुश्बू पांडे और रिद्धिमा शर्मा जैसे इंफ्लुएंसर्स विवादित बयानों पर व्यूज बटोरने वाले यूट्यूब चैनल्स में बार-बार आम लोग बनकर मुस्लिम और ईसाई समुदाय के ख़िलाफ भड़काऊ बयान या हिंसा को सामान्य बताने का प्रयास करते नजर आये हैं.
A months-long investigation by @OishaniB_ & @RPawan01 for #AltNews has uncovered a whole syndicate of YouTube ‘news’ channels which push pro-BJP narratives with staged vox pop, planted debates & recurring faces posing as the common man. Read: https://t.co/dCb2UAaPZy
— Alt News (@AltNews) December 24, 2025
ध्यान दें कि दक्ष चौधरी, युधिष्ठिर, दुर्योधन, अमित और अभिषेक नवंबर 2025 में गिरफ़्तार किया गया था. वृंदावन में शराब की दुकान को जबरन बंद कराने, कर्मचारियों को गाली देने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में इन्हें गिरफ़्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा किया गया.

देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में धर्म के नाम पर हिंसा को सामान्य, जायज़ और गौरवपूर्ण बताने की कोशिश की जा रही है. इस मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्रवाई पर उठता हुआ नजर आ रहा है. क्या दर्ज की गई एफआईआर सिर्फ़ औपचारिकता तक सीमित रहेगी, या फिर खुले मंच से नफ़रत भरे बयान देने, हिंसा और नरसंहार का आह्वान करने वालों के ख़िलाफ ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई भी की जाएगी?





