16 मई, 2026 को आधी रात के आसपास, उपनगरीय हैदराबाद के गुडिमलकापुर में स्व-घोषित गौरक्षकों के एक समूह ने इस शक पर एक ट्रक पर छापा मारा कि ये ट्रक अवैध रूप से मवेशियों को ले जा रहा था. हालांकि, जब ट्रक को रोका गया तो उसमें प्लाईवुड भरा हुआ पाया गया. इसके बावजूद, भीड़ ने कथित तौर पर ट्रक में तोड़फोड़ की और उस पर पथराव किया, जिसमें चालक रसूल शेख, उसका भाई और एक पुलिस अधिकारी सहित कम से कम तीन लोग घायल हो गए.

18 मई को गुडिमलकापुर पुलिस ने कथित गौरक्षकों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया. 17 मई को दायर रसूल की शिकायत के आधार पर, तप्पाचबूतरा पुलिस स्टेशन में एक और पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई.

10 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR

ऑल्ट न्यूज़ ने तप्पाचबूतरा पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की एक कॉपी हासिल की. शिकायत के मुताबिक, महाराष्ट्र के बीड ज़िले के निवासी 58 साल के रसूल शेख, जमील कुरेशी के लिए चेन्नई से हैदराबाद तक प्लाईवुड लेकर जा रहे थे. रसूल महाराष्ट्र में रजिस्टर्ड ट्रक चला रहा था और उसके साथ उसका भाई अफ़सर शेख भी था, जो ट्रक में क्लीनर के रूप में काम करता था.

दोनों 15 मई को चेन्नई से निकले थे और 16 मई की रात करीब 11 बजकर 45 मिनट पर हैदराबाद में नोमान ट्रेडिंग कंपनी पहुंचे थे. हालांकि, स्टोर के पास एक अवरोध के कारण पार्किंग की अनुमति नहीं थी, रसूल ने ट्रक को रॉयल सी होटल के पास सड़क के किनारे खड़ा कर दिया.

FIR में लिखा है कि इसके तुरंत बाद, 10-12 लोगों ने जबरदस्ती ट्रक को रोका और ये जानने की मांग की कि ट्रक में क्या ले जाया जा रहा है. भीड़ जुटने पर विवाद शुरू हो गया. रात करीब 12 बजकर 5 मिनट पर पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को तितर-बितर किया.

AIMIM विधायक माजिद हुसैन भी घटनास्थल पर पहुंचे और रसूल के साथ ट्रक के अंदर बैठ गये. बाद में उन्होंने समर्थकों के एक समूह के साथ गोलकोंडा क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (DCP) के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

मीडिया से बात करते हुए, हुसैन ने पुलिस की प्रतिक्रिया की आलोचना की और कहा कि उन्हें घबराए हुए दिखने के बजाय भीड़ को शांत करना चाहिए था, जिससे स्थिति और खराब हो गई. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों पक्षों के खिलाफ मामले दर्ज करके कोई “संतुलन कार्य” नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, “यहां एक पक्ष किसी भी ग़लत गतिविधि में शामिल नहीं था; वे शुरू से ही पुलिस को बता रहे हैं कि वे प्लाइवुड ले जा रहे थे. अगर पुलिस इन बातों को ध्यान में नहीं रखती है, तो जनता को पुलिस पर भरोसा नहीं रहेगा.”

 

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FIR में 10 अज्ञात लोगों के नाम हैं और धारा 189(2) (गैरकानूनी सभा का सदस्य होना), 126(2) (ग़लत तरीके से रोकना), 351(2) (आपराधिक धमकी), और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) लगाई गई है, जो एक सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कृत्यों से संबंधित है.

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ऑल्ट न्यूज़ ने रसूल शेख से संपर्क किया, जो ट्रक चला रहा था और ‘गौरक्षकों’ के हमले में घायल हो गया था. उनके मुताबिक, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी गौरक्षकों ने ट्रक का पीछा किया और रसूल को उसे पुलिस स्टेशन ले जाने का निर्देश दिया था. निगरानी करने वालों, जिन्हें रसूल ने बच्चे/युवा लड़के कहकर संबोधित किया, ने ट्रक में तोड़फोड़ की और इस दौरान रसूल, अफ़सर और एक पुलिसकर्मी को घायल कर दिया.

अपने क्षतिग्रस्त ट्रक के साथ खड़े रसूल शेख

“मैंने चेन्नई, तमिलनाडु से प्लाइवुड लोड किया था, जिसे हैदराबाद में एक स्टोर में पहुंचाया जाना था, और हम रात 11 बजे तक मौके पर पहुंच गए थे. लेकिन स्टोर ने कहा कि हम बाद में प्लाइवुड उतारेंगे, क्योंकि दुकान के पास एक समारोह चल रहा था और सड़क जाम थी. इसलिए, हमने एक जगह पार्क किया, क्योंकि हमें ट्रक में सोना था और सुबह में इसके अनलोड होने का इंतजार करना था. फिर, अचानक, 3-4 बच्चे आए और ट्रक के अंदर क्या था, इसके बारे में पूछताछ करने लगे. उन्होंने पूछा कि क्या हम गायें ले जा रहे हैं. हमने बताया कि ये सिर्फ प्लाईवुड है. फिर, मैंने उन्हें फ़ोन पर किसी से बात करते देखा, और अचानक, 10-12 लोग ट्रक पर चढ़ गए, तिरपाल को फाड़ दिया और प्लाईवुड सामग्री को ज़मीन पर फेंकना शुरू कर दिया.

उन्होंने आगे कहा, “इस वक्त, एक पुलिस वैन घटनास्थल पर पहुंची और मुझे ट्रक को पुलिस स्टेशन तक ले जाने के लिए कहा. मैंने उन्हें स्पष्ट किया कि मैं प्लाईवुड ले जा रहा हूं, और अगर वे जांच करना चाहते हैं, तो वे यहीं कर सकते हैं. ऐसा करने से मामले को जल्दी से हल किया जा सकता है. लेकिन, उन्होंने मुझे ट्रक को पुलिस स्टेशन तक ले जाने के लिए कहा. जैसे ही हम पुलिस स्टेशन की ओर जा रहे थे, और ज़्यादा लोग इकट्ठा होने लगे. वे ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे और ट्रक पर पत्थर फेंक रहे थे. उनमें से कुछ लोग ट्रक के सामने भी बैठ गए और पथराव किया. पत्थरों से शीशा टूट गया और कांच के टूटे हुए टुकड़ों ने मुझे, मेरे भाई और एक पुलिस अधिकारी को घायल कर दिया जो ट्रक में हमारे साथ बैठा था. उन्होंने प्लाइवुड को सड़क पर फेंक दिया और ट्रक में तोड़फोड़ करने की कोशिश की, जिससे हमें बहुत आर्थिक नुकसान हुआ.

HN10 न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में रसूल के चेहरे पर चोटें साफ नजर आ रही हैं.

घटना के वीडियो में कई लोग ट्रक पर चढ़ते और सड़क पर प्लाईवुड की चादरें फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि नीचे खड़े अन्य लोगों को वाहन पर पथराव करते देखा जा सकता है.

रसूल ने ऑल्ट न्यूज़ को बताया, “कुछ समय बाद, विधायक माजिद हुसैन पुलिस स्टेशन पहुंचे, और तभी वे (गौरक्षक) वहां से भाग गए. विधायक साहब तब मेरे साथ मेरी लॉरी में बैठे और हमें अपना ट्रक वापस लाने में मदद की. फिर, अगली सुबह, 17 मई को मैं ट्रक को उस स्टोर तक ले गया, जहां प्लाईवुड अनलोड होना था और शिकायत दर्ज करने गया. मैं उसी शाम घर के लिए निकला और बीड वापस आ गया.”

उन्होंने कहा, “मैं 33-35 साल से ट्रक चला रहा हूं और अब तक ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. पुलिस उन्हें (गौरक्षकों को) ट्रक में तोड़फोड़ करने और हम पर हमला करने से रोक सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, जबकि ट्रक में कोई मवेशी नहीं था. विधायक हुसैन ने हमारी जान बचाई है.”

पुलिस कार्रवाई

द सियासत डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तप्पाचबुत्रा पुलिस स्टेशन में रसूल की शिकायत पर दर्ज़ की गई FIR के अलावा, एक और FIR गुडिमल्कापुर पुलिस स्टेशन में एक साईं सहित पांच व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज़ की गई थी, जिन्हें पुलिस ने घटना में शामिल गौरक्षकों के प्रमुख के रूप में पहचाना था.

आरोपियों पर BNS की धारा 109(1) (हत्या की कोशिश), 189(4) (गैरकानूनी जमावड़ा), 191(3) (गंभीर दंगा), 121(1) (स्वेच्छा से एक लोक सेवक को चोट पहुंचाना), 324(4) (शरारत), और 126(2) सहपठित 3(5) (ग़लत तरीके से रोकना) के तहत मामला दर्ज़ किया गया है. पांचों आरोपी फिलहाल फरार हैं.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पुलिस उन लोगों के खिलाफ भी एक और मामला दर्ज कर रही है जिन्होंने गोलकोंडा जोन के DCP के कार्यालय के बाहर गैरकानूनी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था.

ऑल्ट न्यूज़ ने गुडिमलकापुर SHO से संपर्क किया, जिन्होंने कहा कि पांच आरोपियों की पहचान कर ली गई है, लेकिन वे अभी भी फरार हैं. SHO ने कहा कि जांच में अभी तक ये स्थापित नहीं हुआ है कि वे किसी संगठित गौरक्षा समूह से संबंधित थे या नहीं.

ऑल्ट न्यूज़ ने रसूल की शिकायत को संभालने वाले तप्पाचबुत्रा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक और जांच अधिकारी एल राजू से भी बात की. उन्होंने कहा, “कुछ लोगों की पहचान गुडिमलकापुर पुलिस स्टेशन द्वारा की गई है, और हम घटना के वीडियो के आधार पर उनमें से और लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन अभी तक उनकी पहचान करना मुश्किल साबित हुआ है क्योंकि रोशनी बहुत खराब है. एक बार उनकी पहचान हो जाने के बाद, हम जांच कर पाएंगे कि क्या वे किसी समूह का हिस्सा थे.”