28 जनवरी 2026 को खबर सामने आई कि पॉक्सो अदालत की विशेष न्यायाधीश निरुपमा विक्रम ने गवाहों और डीएनए सैम्पल को ध्यान में रखकर मोईद खान को बेकसूर पाया और उन्हें 2024 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के आरोपों से मुक्त कर दिया. वहीं डीएनए टेस्ट में मोईद खान के नौकर राजू खान का सैम्पल मैच हुआ, इस आधार पर अदालत ने राजू को दोषी पाया है. साल 2024 में उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भदरसा थानाक्षेत्र से 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ गैंग रेप के मामले में बतौर मुख्य आरोपी समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान का नाम सामने आया था.

इस हाई प्रोफाइल केस में शुरुआत से ही मीडिया संगठनों की नज़र रही है. भारतीय न्यूज़ एजेंसी ANI ने दुष्कर्म के इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रशासन द्वारा सपा नेता की संपत्ति के खिलाफ की गई कार्रवाई को काफी अच्छे से डॉक्युमेंट किया था. ANI ने 3 अगस्त 2024 को मौकाए वारदात का एक वीडियो पोस्ट कर जानकारी दी कि अयोध्या रेप केस के मुख्य आरोपी सपा नेता मोईद खान के अयोध्या स्थित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बेकरी पर बुलडोज़र चलाया गया.

ANI ने एक और वीडियो पोस्ट कर जानकारी दी थी कि सपा नेता की बेकरी को अवैध पाये जाने पर प्रशासन ने धवस्त कर दिया था.

22 अगस्त 2024 को सपा नेता मोईद खान के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को अवैध बताते हुए उसे भी बुलडोज़र से तोड़ दिया गया, उस वक़्त भी न्यूज़ एजेंसी ANI ने सिलसिलेवार तरीके से प्रशासन की कारवाई को डॉक्युमेंट किया था.

यहां तक ऐसा लग रहा है कि ANI ने बखूबी न्यूज़ एजेंसी होने की ज़िम्मेदारी निभाई. लेकिन हैरतअंगेज़ बात ये है कि जब अयोध्या के इस चर्चित रेप केस में अदालत ने फैसला सुनाया और समाजवादी पार्टी नेता मोईद खान पर लगे आरोपों को गलत पाया गया, तब ANI ने मामले में चुप्पी साध ली. 28 जनवरी को आए फैसले के बाद से 30 जनवरी इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक ANI ने ये ख़बर नहीं चलाई है. न्यूज़ एजेंसी के सोशल मीडिया या फिर वेबसाईट पर बलात्कार के इस मामले में अदालत की सुनवाई या फैसले से जुड़ी खबरें 1 साल से ज़्यादा पुरानी हैं.

एक ओर जहां ANI ने अयोध्या रेप केस में सुनाए गए फैसले को रिपोर्ट करने से नज़रअंदाज़ किया, वहीं ANI की तरह कई और भी मीडिया संगठनों ने यही किया. इन्होंने साल 2024 और 2025 में इस केस के सिलसिले में रिपोर्ट्स और पोस्ट्स शेयर किये. लेकिन कोर्ट के इस मामले में हालिया जजमेंट पर कोई खबर नहीं दी. जैसे कि ऑप इंडिया, IANS हिन्दी, बिहार तक. (2024 की बिहार तक और टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट).

This slideshow requires JavaScript.

रिपब्लिक टीवी पर एंकर अर्नब गोस्वामी ने अयोध्या रेप केस पर प्राइम टाइम डिबेट चलाई थी. शो के दौरान, अर्नब ने कमेन्ट करते हुए कई मौकों पर मोईद खान को अपराधी बताया था. मीडिया ट्रायल चलाते हुए खुद ही जज बनकर अर्नब ने मोईद खान को अपराधी बता दिया.

गौर करें कि हाल में रिपब्लिक वर्ल्ड या रिपब्लिक भारत ने अयोध्या बलात्कार मामले में अभी तक कोई अपडेट नहीं दिया है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में टिप्पणी करते हुए कहा था, “अयोध्या में मोईद खान जो समाजवादी पार्टी का नेता है, अयोध्या की सांसद की टीम का सदस्य है, 12 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के कृत्य में शामिल पाया गया है.”

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने साल 2024 में इस घटना को लेकर कई पोस्ट्स किये और साफ तौर पर सपा नेता मोईद खान को अपराधी बता दिया था. अमित मालवीय न सिर्फ समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा बल्कि आरोपी के धर्म को आधार बनाकर भी टिप्पणी की.

This slideshow requires JavaScript.

वहीं मोईद खान पर लगे गंभीर आरोप के बाद उनके परिवार को भी काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. मीडिया से बात करते हुए मोईद खान की बेटी ने बताया कि बिना डीएनए टेस्ट किये उनके पिता को अरेस्ट किया गया, साथ ही इन आरोपों के बाद उसे स्कूल में बाकी लोगों की और खासकर लड़कों की टीका-टिप्पणी का सामना करना पड़ा था.

ये काफी गंभीर बात है कि किसी अपराध में आरोपी का नाम सामने आने के बाद उसे सार्वजनिक रूप से अपराधी घोषित कर दिया गया. जबकि कथित अपराध का मामला न्यायालय में लंबित था और मुकदमे में सबूत पेश किये जा रहे थे. ऐसे में बार-बार सत्ताधारी पार्टी और उनके नेताओं द्वारा आरोपी को ‘मुजरिम’ बता कर या फिर उन्हें सत्ता के सहारे और धर्म के आधार पर टारगेट करना, न्यायिक प्रक्रिया को हाशिये में ढकेल देने जैसा है. और तो और मीडिया संगठनों का काम है देश भर में हुई घटनाओं को रिपोर्ट करना और जनता के समक्ष पेश करना. लेकिन अयोध्या रेप केस में ऑल्ट न्यूज़ ने देखा कि कैसे ANI और अन्य कुछ मीडिया आउटलेट्स ने साल 2024 और 2025 में मामले को तो कवर किया, खबरें चलाई लेकिन जब कोर्ट ने आरोपी मोईद खान को इस रेप केस में बेकसूर पाया तो इन्हीं चंद मीडिया संगठनों ने इस बारे में कोई खबर नहीं चलाई. ये चयनात्मक पत्रकारिता का सही उदाहरण है.

वर्गीकरण करना कठिन

There is insufficient information to make a definitive determination.

हमारी कार्यप्रणाली पढ़ें