दिलीप कुमार की मौत के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अपनी सारी सम्पति “वक्फ़ बोर्ड” या मुस्लिम वक्फ़ बोर्ड” के नाम कर दी.

ऐसा दावा करने वालों में ट्विटर यूज़र @RealArnab_, @arunbajpairajan, @janardanspeaks, @janardanmis शामिल हैं. इनके ट्वीट्स को हज़ारों लाइक्स और रिट्वीट मिले हैं.

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कुछ लोगों ने दावा किया है कि दिलीप कुमार ने वक्फ़ बोर्ड को 98 करोड़ रुपये दिए हैं.

इस दावे को अलग-अलग तरीके से फ़ेसबुक और ट्विटर पर शेयर किया जा रहा है. ऐसा एक इन्फ़ोग्राफ़िक भी पोस्ट किया जा रहा है.

सेक्युलर हिन्दुओं के गाल पर करारा तमाचा है ये

Posted by Kusum singh on Thursday, 8 July 2021

ग़लत दावा

ऑल्ट न्यूज़ ने दिलीप कुमार के प्रवक्ता और Mouthshut.com के संस्थापक और सीईओ फैज़ल फ़ारूकी से बात की. उन्होंने बताया कि ये दावा ग़लत है और इस तरह का कोई डोनेशन नहीं दिया गया है. फैज़ल फ़ारूकी दिलीप कुमार के परिवार के बेहद नज़दीकी और दोस्त हैं. और वो दिलीप कुमार का सोशल मीडिया हैंडल भी चलाते हैं.

हमने महाराष्ट्र वक्फ़ बोर्ड के सीईओ अनीस शेख़ से संपर्क किया. उन्होंने कहा कि ऑफ़िस के पास इस तरह के डोनेशन की कोई जानकारी नहीं है.

हमें ऐसी कोई ख़बर भी नहीं मिली जिसमें बताया गया हो कि दिलीप कुमार ने वक्फ़ बोर्ड को 98 करोड़ रुपये डोनेट किए हैं.

ये ध्यान देने वाली बात है कि दिलीप कुमार की मौत के तुरंत बाद कई लोगों ने उनके मुस्लिम पहचान की बात करते हुए नफरत भरे बयान दिए. ये दावा कि उन्होंने मुस्लिम संस्थान को पैसे डोनेट किए, ये भी उनके ख़िलाफ़ फैलाई गयी ग़लत जानकारियों का हिस्सा है.

वक़्फ़ बोर्ड एक कानूनी संस्था है. हर राज्य में एक वक़्फ़ बोर्ड होता है जिसमें एक चेयरपर्सन, राज्य सरकार द्वारा चुने गए 1 या 2 सदस्य, मुस्लिम विधायक और सांसद शामिल होते हैं. वक़्फ़ बोर्ड को डोनेशन देने में कुछ भी गैरकानूनी या गलत नहीं है.

ये पहली बार नहीं है जब किसी नामचीन मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ़ ऐसा दावा शेयर किया गया हो. शाहरुख खान को लेकर भी ऐसा ही एक दावा पिछले कई सालों से शेयर किया जा रहा है कि उन्होंने पाकिस्तान के तेल टैंकर ब्लास्ट पीड़ितों को 45 करोड़ रुपये दिए.

यानी, दिलीप कुमार द्वारा करीब 98 करोड़ रुपये की अपनी संपत्ति ‘वक़्फ़ बोर्ड’ को दान में देने का दावा गलत है.

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Kalim is a journalist with a keen interest in tech, misinformation, culture, etc