19 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के झारग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘झालमुरी’ का आनंद लेने के लिए सड़क के किनारे एक दुकान पर रुके. झालमुरी भारत के कई हिस्सों में एक लोकप्रिय स्ट्रीट-फ़ूड है, इसे मुरमुरे और अलग-अलग मसालों के साथ बनाया जाता है. प्रधानमंत्री को कैमरे पर नाश्ते को तैयार होते हुए, विक्रेता को 10 रुपये का भुगतान करते और उसे चखते हुए देखा गया.

 

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अगले ही दिन, बीरभूम के मुरारई में एक रैली को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि PM मोदी का झालमुरी खाना एक स्क्रिप्टेड ड्रामा था, न कि ये अचानक हुआ था जैसा कि पीएम मोदी ने कहा था.

उन्होंने दावा किया कि झालमुरी बेचने वाला व्यक्ति असल में एक स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) कमांडो था. ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा, “उन्होंने स्टॉल के अंदर एक माइक्रोफ़ोन की व्यवस्था की, और एक SPG (अधिकारी) द्वारा झालमुरी तैयार कारवाई. क्या वो (पीएम मोदी) अपनी जेब में दस रुपये का नोट लेकर घूमते हैं? क्या नाटक है.”

 

कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने ऐसे ही दावे किए.

X यूज़र जीतू भद्रक (@Jeetuburdak) ने SPG कर्मियों की पोशाक पहने झालमुरी विक्रेता की AI-जनरेटेड तस्वीर पोस्ट की. इसके साथ एक कैप्शन भी था, जिसमें लिखा है: “यहां भी घोटाला! झालमुरी वाला तो SPG कमांडो निकला.” (आर्काइव)

ऐसे अन्य कई लोग भी थे जिन्होंने X पर यही दावा शेयर किया. (आर्काइव: 123)

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ये दावा फ़ेसबुक पर भी वायरल है. नीचे स्क्रीनशॉट देखा जा सकता है:

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फ़ैक्ट-चेक

सबसे पहले, हमने एक की-वर्ड सर्च किया और INS का एक इंटरव्यू देखा, जहां उस दुकानदार ने खुद को विक्रम शाह बताया है. उसने प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए बताया कि वो असल में बिहार के गया का रहने वाला है और उसने नौवीं कक्षा तक पढ़ाई की है.

झालमुरी विक्रेता एक SPG अधिकारी है या नहीं, इस दावे की सच्चाई जानने के लिए ऑल्ट न्यूज़ के एक पत्रकार ने 22 अप्रैल को दुकान का दौरा किया. ये दुकान, चवन लाल स्पेशल झाल मुरी, झाड़ग्राम में राज कॉलेज रोड पर कॉलेज मोर ट्रैफ़िक सिग्नल के पास स्थित है. हमने देखा कि दुकान के साइनबोर्ड (नीचे तस्वीर) में नरेंद्र मोदी के साथ दिख रहे उसी व्यक्ति की तस्वीर भी है.

जब हम वहां पहुंचे तो एक बुजुर्ग व्यक्ति और एक महिला दुकान चला रहे थे. वायरल वीडियो में नरेंद्र मोदी के साथ दिख रहे शख्स के बारे में पूछे जाने पर दुकानदार ने बताया कि वो उनका बेटा विक्रम है. उन्होंने ये भी कहा कि दुकान लगभग एक दशक से यहीं है.

इसे और ज़्यादा वेरिफ़ाई करने के लिए, हमने स्टॉल पर UPI पेमेंट किया. ट्रांसेक्शन डिटेल्स में लाभार्थी का नाम विक्रम कुमार दिखाया गया.

इसके बाद, हमने नेम बोर्ड पर लिखे नंबर पर कॉल किया. कॉल रिसीव करने वाले शख्स ने अपना नाम विक्रम शाह बताया. उन्होंने पुष्टि की कि उन्होंने ही 19 अप्रैल को पीएम मोदी से बातचीत की थी और ममता बनर्जी के दावों को निराधार बताया. उन्होंने ऑल्ट न्यूज़ को बताया, “मैं यहां चार साल से ज़्यादा समय से दुकान चला रहा हूं. मैं कभी भी आर्म्ड फ़ोर्स या इस तरह की किसी चीज़ में नहीं रहा.”

इसके बाद हमने एक पड़ोसी दुकानदार से बात की जो फ़ोकस स्टूडियो नाम से फोटोग्राफ़ी स्टोर चलाता है. उन्होंने ऑल्ट न्यूज़ को बताया कि वह 36 सालों से इस व्यवसाय में हैं.

उन्होंने कहा, “2025 के आसपास, यहां की दुकानों का नवीनीकरण किया गया. मेरी दुकान छोटी हो गई और इस हिस्से में कई नई दुकानें खुल गईं.” उन्होंने वायरल वीडियो में नरेंद्र मोदी के साथ दिख रहे शख्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि वो विक्रम को कई सालों से जानते हैं. “पहले, वो सड़क के उलटी दिशा में अपना झालमुरी का ठेला लगाता था. नवीनीकरण के बाद, उसने यहीं अपनी दुकान बनाई.”

दुकानदार ने आगे कहा, “वो बिहार के गया का रहने वाला है.”

ऑल्ट न्यूज़ ने झारग्राम सरकारी अस्पताल के एक डॉक्टर से भी बात की, जो विक्रम की दुकान के लगातार ग्राहक हैं. उन्होंने नाम न छापने की बात करते हुए ये कहा, “मैं एक स्थानीय हूं. और मैं सरकारी अस्पताल से जुड़ा हुआ हूं जो चौराहे से मुश्किल से 600 मीटर की दूरी पर है जहां दुकान स्थित है. मैं अक्सर झालमुरी और अन्य सामान खरीदने के लिए वहां जाता हूं. जहां तक ​​मुझे याद है मैंने विक्रम और उसके पिता को उस स्टाल में देखा है, हालांकि, मुझे यकीन नहीं है कि वे मालिक हैं या नहीं. असल में दुकान यहां काफी फ़ेमस है,”

कुल मिलाकर, कई सोर्स ने हमारी इस बात की पुष्टि की कि जिस झालमुरी बेचने वाले की दुकान पर प्रधानमंत्री मोदी गए थे, वो वहां सालों से दुकान चला रहा था. ममता बनर्जी का ये दावा झूठा और निराधार है कि वो SPG कमांडो था.

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