“रामपुर मे आज़म खान के भतीजे ने एक सिक्ख ट्रक चालक की पगड़ी उतार कर बेरहमी से पीटा, सिक्ख धर्म के चालक ने कहा जितना मारना है मार लो पर मेरे बाल ना खोलो, पर उन्होने बाल पकड़ कर घसीट घसीट कर मारा…” यह संदेश सोशल मीडिया पर एक वीडियो के साथ प्रसारित किया जा रहा है। इस विडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोगों द्वारा एक लंबे बाल वाले व्यक्ति को बेरहमी से पीटा जा रहा है और उसके बालो को झटके से खींचा जा रहा है।
रामपुर मे आजम खान के भतीजे ने एक सिक्ख ट्रक चालक की पगड़ी उतार कर बेरहमी से पीटा ,
सिक्ख धर्म के चालक ने कहा जितना मारना है मार लो पर मेरे बाल ना खोलो, पर उन्होने बाल पकड़ कर घसीट घसीट कर मारा
इस वीडियो को इतना ज़्यादा शेयर करिये कि ये खबर न्यूज में हर चैनल दिखाने को मजबूर हो pic.twitter.com/jnTqdmsX0J— Suresh Lal Das (@SureshLalDas3) June 16, 2018
उपर्युक्त ट्वीट 16 जून की सुबह को पोस्ट किया गया था और शायद ट्विटर पर इस तरह का दावा करने वाले सबसे पहले में से एक पोस्ट यह भी था। हालांकि फेसबुक पर भी यह वीडियो इसी संदेश के साथ शेयर किए जा रहे है। ज्यादातर यूजर्स जिन्होंने इसे अपलोड किया है वो एक ही जैसे संदेश का उपयोग कर रहे हैं, जिससे एक बार फिर इस ओर इशारा जाता है कि इसे व्हाट्सएप पर भी व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है।

सच क्या है ?
ऑल्ट न्यूज़ ने दावे के मुताबिक यह देखने के लिए जाँच की कि हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में किसी सिख ट्रक ड्राइवर पर हमला किया गया था या नहीं। हमें पड़ताल करने पर इस घटना से संबंधित कोई खबर नहीं मिली। इसके बाद हमने शब्द “सिख ट्रक ड्राइवरों पर हमला” को यूट्यूब पर खोजा। थोड़ी पड़ताल करने के बाद हमें ‘akaalchannel’ चैनल का एक वीडियो मिला, जिसे तीन महीने पहले ‘असम में पिटाई होते हुये सिखों के वायरल वीडियो के पीछे की सच्चाई’ शीर्षक के साथ पोस्ट किया गया था।
झूठे दावे के साथ वायरल हो रहे वीडियो की क्लिप उपरोक्त वीडियो में 7:27 से देखी जा सकती है। Akaalchannel द्वारा प्रसारित किये गये वीडियो की सत्यता की जांच करने के लिए, हमने YouTube पर ढूंढने के लिए पहले उपयोग किए गए शब्द (सिख ट्रक ड्राइवरों पर हमला) के साथ Google खोज की तो हमें घटना से संबंधित जानकारी मिली।
यह वीडियो असम का है, नाकि उत्तर प्रदेश का l
यह वीडियो असम के कामरूप जिले का है, नाकि उत्तर प्रदेश का l News 18 Hindi की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना फरवरी 2018 में हुई थी। वीडियो में पीटे जा रहे व्यक्ति के साथ एक और व्यक्ति को स्थानीय लोगों द्वारा बच्चों के अपहरण के संदेह में पीटा गया था। उन पर उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के घर को लूटने का आरोप भी लगाया गया था। बाद में उन्हें पुलिस को सौंप दिया गया था, जिसने इस मामले की जांच की। यह ध्यान देने वाली बात है कि इस घटना का कथित तौर पर कोई सांप्रदायिक दृष्टिकोण नहीं है।
सांप्रदायिक तनाव को उत्तेजित करने और अविश्वास को बढ़ाने के उद्देश्य से पहले भी फ़र्ज़ी समाचार फ़ैलाने वालों द्वारा झूठे, भड़काऊ संदेशो के साथ इस तरह के वीडियो कई बार साझा किये गए है। दर्शकों और पाठकों को चौकसी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि हिंसक और भयानक वीडियो अक्सर उत्तेजक और झूठे दावों के साथ होते हैं।





