सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें कुछ छोटी लड़कियां भगवा वस्त्र पहने एक व्यक्ति को रोककर उससे बहस कर रही हैं. वीडियो में लड़कियां आरोप लगा रही हैं कि वह व्यक्ति उनसे कह रहा था कि अगर वे ‘पल्ली पार’ आएंगी, तो वह उन्हें 1200 रुपये और साइकिल देगा. इसके बाद वहां खड़े कुछ लड़कों ने उस भगवा वस्त्र पहने व्यक्ति को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया. इस वीडियो को शेयर करते हुए कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि गंगा रिसॉर्ट के पास हिंदू साधु का भेष धारण करने वाला यह व्यक्ति वास्तव में एक मुस्लिम मौलाना था, जो छोटी बच्चियों को फंसाने की कोशिश कर रहा था.
वराह वॉरियर नाम के एक अकाउंट ने यह वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि गंगा रिसॉर्ट के पास हिंदू साधु का भेष बनाकर घूमने वाला यह व्यक्ति असल में एक मुस्लिम मौलाना निकला, जो छोटी बच्चियों और बच्चों के करीब जाने की कोशिश कर रहा था. (आर्काइव लिंक)

इसी तरह, एक्स पर राकेश किशोर नाम के एक यूजर ने भी यही वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “गंगा रिसॉर्ट के पास हिंदू साधु का नाटक करने वाला और छोटी बच्चियों के पास जाने वाला यह ‘जिहादी’ मुस्लिम निकला. एक साहसी हिंदू लड़की ने उसे कड़ा जवाब दिया और बेखौफ होकर उससे पूछताछ की. तभी स्थानीय लोगों ने वहां पहुंचकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी.” (आर्काइव लिंक)

ऑक्सिमिया जियोरी नाम के एक अन्य अकाउंट ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए बिल्कुल यही दावा किया. (आर्काइव लिंक)

फ़ैक्ट-चेक
इस दावे की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले हमने घटना के स्थान की पुष्टि की. चूंकि वायरल पोस्ट में केवल गंगा रिसॉर्ट का जिक्र था, सटीक स्थान का नहीं. गूगल मैप्स पर गंगा रिसॉर्ट खोजने पर, हमें ये रिसॉर्ट ऋषिकेश में स्थित मिला जिसकी तस्वीर वायरल वीडियो के बैकग्राउंड से मेल खाता है.

इसके बाद, हमने वीडियो के की-फ्रेम्स को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया तो हमें ये वीडियो ऋषिकेश के एक कंटेंट क्रिएटर राज राय द्वारा इंस्टाग्राम पर 4 जुलाई को अपलोड किया हुआ मिला, जिसे 23 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है. इस वीडियो के कैप्शन में कहीं भी आरोपी के मुस्लिम होने का ज़िक्र नहीं था. हमने राज राय के अकाउंट पर मौजूद उनके फोन नंबर से उन्हें संपर्क किया, उन्होंने हमें बताया कि यह घटना लगभग सात-आठ दिन पुरानी है. जब वह गंगा रिसॉर्ट के पास से गुजर रहे थे, तब उन्होंने बच्चियों को भगवाधारी व्यक्ति से बहस करते देखा और इसे रिकॉर्ड कर लिया. बाद में आरोपी को मुनि की रेती पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया था. हमने क्रिएटर से आरोपी की मुस्लिम पहचान के बारे में पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वह व्यक्ति मुस्लिम नहीं है.
मामले की विस्तृत जानकारी के लिए हमने ऋषिकेश के मुनि की रेती पुलिस स्टेशन से संपर्क किया. सीनियर सब-इंस्पेक्टर योगेश पांडे ने हमें इस घटना के बारे में विस्तृत जानकारी दी. आरोपी की पहचान के बारे में पुलिस अधिकारी ने बताया, “यह घटना संभवतः 4 तारीख के आसपास की है. आरोपी का नाम रमेशानंद है, जो मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन 1997 से ऋषिकेश क्षेत्र में रह रहे हैं. हमने उनके आधार कार्ड की जांच की है, जिसमें उनका पता हरिहर कैलाश आश्रम ज्ञानपीठ, कैलाश मार्ग, मुनि की रेती दर्ज है. सोशल मीडिया पर उनके मुस्लिम होने के दावे पूरी तरह से झूठे हैं, वह एक हिंदू हैं.”
घटना के संदर्भ में बच्चियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर बात करते हुए एसएसआई पांडे ने आगे कहा, “ये बच्चियां घाटों पर फूल बेचती हैं. हमारी जांच में सामने आया कि रमेशानंद ने पहले भी कई बच्चों को कपड़े और अन्य छोटी-मोटी चीजें दी हैं. उस दिन भी उन्होंने वहां फूल बेचने वाले कुछ बच्चों से कहा था कि ‘आओ, मैं तुम्हें पार ले चलूंगा और कपड़े या साइकिल जैसी कुछ चीजें दिला दूंगा.’ वहां मौजूद कुछ लोगों ने इस बात का गलत मतलब निकाल लिया और सोच बैठे कि बाबाजी बच्चों को किसी गलत इरादे से कहीं ले जाने की बात कर रहे हैं. जब लड़की ने बोलना शुरू किया, तो किसी ने वीडियो बना लिया, लेकिन बातचीत के बाद का हिस्सा रिकॉर्ड नहीं किया गया, जिससे एक झूठा नैरेटिव बन गया.”
पुलिस की कार्रवाई के बारे में अधिकारी ने स्पष्ट किया, “हमने रमेशानंद बाबा को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया था. स्थानीय निवासियों ने भी बाबाजी की अच्छी छवि की पुष्टि की. हमने ICJS पोर्टल पर उनका आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला, लेकिन भारत में उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं मिला. इसके उलट, वहां मौजूद लोगों ने बाबाजी के साथ मारपीट की थी. हमने उन बच्चियों का पता लगाया और उनके परिवारों से संपर्क किया. हमने उनसे आग्रह किया कि अगर उनके साथ कोई दुर्व्यवहार या छेड़छाड़ हुई है तो वे लिखित शिकायत दें ताकि हम कार्रवाई कर सकें. लेकिन, परिवार ने साफ इनकार कर दिया, उन्होंने हमें लिखित बयान दिया कि उनके साथ कोई दुर्व्यवहार या छेड़छाड़ नहीं हुई है और वे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं. बाबा और बच्चियों को आमने-सामने बिठाकर बात भी कराई गई, जिससे सब कुछ स्पष्ट हो गया.”
कुल मिलाकर, एक हिंदू साधु से बच्चियों द्वारा की गई पूछताछ और स्थानीय लोगों द्वारा उनके साथ की गई मारपीट के वीडियो को गलत तरीके से सांप्रदायिक रंग देकर पेश किया गया. वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कोई मुस्लिम मौलाना नहीं, बल्कि सालों से ऋषिकेश में रह रहे एक हिंदू साधु रमेशानंद हैं.





