सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें सुपर-मून धरती के बेहद नज़दीक दिखाई दे रहा है. कांग्रेस सदस्य रुक्षमणि कुमारी ने ये क्लिप शेयर की और कहा कि ये आर्कटिक का दृश्य है जो रूस और कनाडा के बीच दिखा. वीडियो को 21 हज़ार से ज़्यादा बार देखा गया.

आईपीएस ऑफ़िसर अमिताभ ठाकुर ने भी ये क्लिप शेयर की और फिर डिलीट कर दी. डिलीट किये जाने से पहले इसे 14 सौ बार रीट्वीट किया गया था. ऐसे ही, दर्जनों ट्विटर, फ़ेसबुक और यूट्यूब यूज़र्स ने ये क्लिप शेयर की.

ये बात ध्यान में रखी जानी चाहिए कि 26 मई को दो खगोलीय घटनाएं हुई थीं – सुपरमून और चंद्रग्रहण. इंडियन एक्सप्रेस ने बताया, “NASA के अनुसार सुपरमून तब होता है जब चांद की कक्षा धरती के सबसे नज़दीक होती है और उसी वक़्त पूर्णिमा होती है.” लेकिन वीडियो में जो चांद दिख रहा है वो आकार में काफ़ी ज़्यादा बड़ा है और काफ़ी तेज़ गति से चलता दिख रहा है.

ऑल्ट न्यूज़ को अपने व्हाट्सऐप नम्बर (7600011160) पर और आधिकारिक मोबाइल ऐप (iOS और एंड्रॉइड) पर इस वीडियो की सच्चाई जानने के लिए कई रिक्वेस्ट मिलीं.

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CGI का काम

ऑल्ट न्यूज़ को @hoaxeye हैंडल द्वारा किया गया एक ट्वीट मिला जो बता रहा था कि ये वीडियो टिकटॉक यूज़र @Aleksey___nz ने बनाया था. हम इस यूज़र की प्रोफ़ाइल पर पहुंचे और पाया कि इसने 17 मई को ये वीडियो पोस्ट किया था. आप ओरिजिनल टिकटॉक वीडियो यहां क्लिक कर के देख सकते हैं (भारतीय यूज़र्स को टॉर ब्राउज़र या VPN वाला ब्राउज़र इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है).

एलेक्सी एक CGI और VXF आर्टिस्ट हैं जिन्होंने अपनी प्रोफ़ाइल से ऐसे ही कई काम शेयर किये हैं. उन्होंने ऐसे ही और भी कई खगोलीय विज़ुअल ग्राफ़िक्स बनाए हैं जिसमें चांद के कुछ टुकड़े दिखते हैं, शनि और सूर्य बेहद करीब दिखते हैं और एक वीडियो में उड़न-तश्तरी भी दिखती है.

उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम हैंडल पर अपनी वेबसाइट का लिंक भी दिया है.

इस वीडियो के असली न होने का सबसे पहला सुराग चांद की गति से ही मिल जाता है. असल में चांद स्थिर ही दिखता है जबकि वीडियो में चांद बेहद तेज़ी से चलता दिख रहा है. स्पेस डॉट कॉम के मुताबिक़, “चांद 27.322 दिनों में धरती का एक चक्कर लगा लेता है. इसके साथ ही लगभग 27 दिनों में ही चांद अपनी धुरी पर एक चक्कर भी पूरा कर लेता है. इसकी वजह से चांद घूमता हुआ नहीं दिखता है. धरती से देखने वालों को ये एकदम स्थिर दिखता है. वैज्ञानिक इसे सिंक्रोनस रोटेशन कहते हैं.”


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