पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद, राज्य हिंसा की चपेट में आ गया है. 6 मई को भाजपा नेता और मनोनीत मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक की मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस संदर्भ में सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी ज़्यादा शेयर किया जा रहा है. दावा है कि TMC कार्यकर्ता ने राजनीतिक झड़प के दौरान भाजपा समर्थकों द्वारा उस पर हमला करने का झूठा आरोप लगाया.

वीडियो में महिला सिर पर पट्टी लपेटे नज़र आ रही है. लेकिन, कोई पट्टी खींच देता है, जिससे पता चलता है कि नीचे सिर पर कोई चोट नहीं है. इसके बाद भीड़ के बीच हाथापाई शुरू हो जाती है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया, ABP न्यूज़, द इकोनॉमिक टाइम्स और रिपब्लिक वर्ल्ड जैसे कई प्रमुख समाचार आउटलेट्स ने भी “फ़र्ज़ी चोट” पर रिपोर्ट की. इन सभी रिपोर्ट्स में इसे बंगाल की घटना बताया गया. किसी भी रिपोर्ट में कोई अन्य डिटेल नहीं था जैसे स्थान या तारीख या महिला की पहचान.

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पुणे मिरर ने वायरल वीडियो को इसी दावे के साथ X पर पोस्ट किया. (आर्काइव)

ये दावा करने वालों में @Incognito_qfs@FrontalForce, और @ocjain4 जैसे सोशल मीडिया यूज़र्स भी शामिल हैं. बाद में तीनों ने पोस्ट हटा दिया.

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ये वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ. @thetruth.india ने क्लिप पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि महिला ने चोट लगने का नाटक किया और भाजपा समर्थकों को झूठा बदनाम किया कि उस पर हमला हुआ है. इस पोस्ट को 310,000 से ज़्यादा बार देखा गया.

 

 

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फ़ैक्ट-चेक

वायरल दावों की सच्चाई जांचने के लिए हमने वीडियो से कीफ्रेम्स लिए. ऐसे ही एक कीफ़्रेम पर रिवर्स इमेज सर्च करने से हमें ये वीडियो मिला, जिसे 6 मई को “मौर्य ध्वज एक्सप्रेस” नामक चैनल से अपलोड किया गया था.

वीडियो में वॉयसओवर बताता है कि ये बिहार के मुजफ्फ़रपुर में श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) की घटना है, और इसे पश्चिम बंगाल के संदर्भ में ग़लत तरीके से शेयर किया गया है. वीडियो में जो हाथापाई दिखाई गई है वो अस्पताल के कर्मचारियों और मरीजों के बीच तीखी बहस के कारण हुई थी. बताने वाले ने आगे कहा कि वायरल वीडियो, जिसमें कथित तौर पर “नकली चोट” दिखाई दे रही है, मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के एक रिपोर्टर द्वारा शूट किया गया था.

इसके बाद हमने ये देखने के लिए कि क्या ऐसी कोई और भी रिपोर्ट है जो मौर्य ध्वज एक्सप्रेस द्वारा अपलोड किए गए यूट्यूब वीडियो में दिए गए बयान की पुष्टि करती हो, हमने हिंदी में सबंधित कीवर्ड सर्च किया.

हमें दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान न्यूज़ और प्रभात ख़बर जैसे आउटलेट्स की कई न्यूज़ रिपोर्ट्स मिलीं. इनमें पूरी घटना के बारे में बताया गया था. आपातकालीन वार्ड में एक ट्रॉली-मैन द्वारा एक मरीज पर हिंसा के आरोप को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसके बाद मरीज के परिवार के सदस्यों ने स्टाफ़ सदस्यों के साथ जबरदस्त झड़प की.

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इंडिया टुडे ने मौर्य ध्वज एक्सप्रेस के पत्रकार प्रेम शंकर से बात की, जिन्होंने ये क्लिप शूट किया था. उन्होंने अपनी मीडिया गैलरी में सेव वीडियो का स्क्रीनशॉट इंडिया टुडे फ़ैक्ट चेक के साथ शेयर किया, जिससे साफ पता चला कि ये 28 अप्रैल को शाम 8 बजकर 13 मिनट पर रिकॉर्ड किया गया था.

पत्रकार ने इंडिया टुडे को बताया कि एक कर्मचारी ने कुछ मरीजों पर उसे पीटने का आरोप लगाया था. इसके बाद जब उसका सामना मरीजों के रिश्तेदारों से हुआ तो फ़र्ज़ी चोट का खुलासा हुआ.

इंडिया टुडे का फ़ैक्ट चेक यहां पढ़ा जा सकता है. ये वीडियो को शूट करने वाले पत्रकार ने 4 मई को अपने फ़ेसबुक पेज पर इसे अपलोड किया था. पोस्ट यहां देखी जा सकती है.

कुल मिलाकर, एक वीडियो जो असल में 28 अप्रैल को बिहार के मुजफ्फ़रपुर में हुई एक घटना का था, उसे न्यूज़ आउटलेट्स और कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने पश्चिम बंगाल में TMC कार्यकर्ता के रूप में भाजपा समर्थकों को बदनाम करने के लिए “नकली चोट” बताकर शेयर कर दिया.

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