बीते दिनों अहमदाबाद के एक स्कूल में “आई एम मलाला” और “द डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल” किताबें पढ़ाए जाने को लेकर विवाद हुआ था. किताबों के समर्थन में अहमदाबाद के वस्त्रापुर एरिया के औडा गार्डन में 27 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे से 6 बजे तक शांतिपूर्वक रीडिंग सेशन आयोजित किया गया था. तकरीबन 40 से 50 लोग वहां शांतिपूर्वक किताब पढ़ रहे थे. तभी बजरंग दल से जुड़े लोगों ने वहां पहुंचकर हाथापाई की, किताब फाड़ दी और गाली-गलौज की.

अहमदाबाद का स्टूडेंट्स एंड कलेक्टिव ग्रुप (SYCA) एक ज़मीनी स्तर का वालंटियर संचालित सिवल नेटवर्क है. इसमें छात्र, शिक्षक, लेखक, ऐक्टिविस्ट और कानूनी पेशेवर जुड़े हुए हैं, ने ये रीडिंग सेशन आयोजित किया था. ग्रुप की ओर से दिए स्टेटमेंट के अनुसार, बजरंग दल और VHP से जुड़े होने का दावा करने वाले लगभग 30-40 लोग भगवा गमछों, बेसबॉल बैट और लाठियों के साथ वहां पहुंचे. कथित रूप से उन्होंने नारेबाजी की, वहां किताब पढ़ रहे लोगों को धमकाया और सांप्रदायिक टिप्पणियां कीं.

आरोप है कि बजरंग दल के लोगों ने हिंसक होकर वहां मौजूद लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट की. कुछ महिलाओं के साथ बदसलूकी किए जाने का आरोप स्टूडेंट्स एंड कलेक्टिव ग्रुप की ओर से लगाए गए.

SYCA के सदस्यों ने ऑल्ट न्यूज़ के साथ कुछ तस्वीरें शेयर कीं. इनमें फटी हुई किताबें और प्रतिभागियों को आई चोटें दिखाई दे रही हैं. उन्होंने बताया कि कम से कम छह लोग हमले में घायल हुए हैं.

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दक्षिणपंथी संगठनों के लोग और रीडिंग सेशन में शामिल लोगों के बीच विवाद के समय कथित रूप से दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े एक शख्स ने कमेन्ट किया, “इनकी पैन्ट खोलकर देख लीजिए कही मुस्लिम तो नहीं है.” मामले में पीड़ित ने वस्त्रापुर पुलिस स्टेशन में बजरंग दल से जुड़े हिरेन रबारी और जिमित रबारी के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई है.

 

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आनंद निकेतन स्कूल से विवाद की शुरुआत

इस पूरे विवाद की शुरुआत 11 अगस्त को हुई. अहमदाबाद के शीलज एरिया में स्थित आनंद निकेतन स्कूल के कैन्टीन में दिए गए खाने में कथित रूप से कांच का टुकड़े जैसा कुछ निकला था. इसे आठवीं कक्षा के एक स्टूडेंट ने निगल लिया था. बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस छात्र के माता-पिता ने स्कूल के मेनेजमेंट पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस मुद्दे को लेकर विरोध किया था.

हालांकि, कुछ ही दिनों में आनंद निकेतन स्कूल विवाद ने एक भयावह मोड़ ले लिया. विवाद में अब स्कूल की लाइब्रेरी में मौजूद “आई एम मलाला” और “द डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल” जैसी 2 किताबें शामिल हो गईं.

बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद जैसे हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया कि मलाला, एक पाकिस्तानी ऐक्टिविस्ट है तो फिर उनकी किताब स्कूल की लाइब्रेरी में क्यूं है? बस इसी मुद्दे को लेकर हिन्दू कार्यकर्ताओं ने स्कूल के परिसर में गेट लांघकर प्रवेश किया और स्कूल में जाकर “जय श्री राम” के नारे लगाए. दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोगों ने स्कूल के केम्पस में घुसकर नारेबाज़ी की और स्कूल के मेनेजमेंट को धमकियां दी. संभवतः इन लोगों की शिकायत स्कूल के कैन्टीन के खाने की क्वालिटी से ज़्यादा स्कूल की लाइब्रेरी में मौजूद किताबें थी.

 

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हिन्दू संगठनों के विरोध रैली में कई पोस्टर्स भी थे जिसमें ये नारे लिखे थे – “स्वामी विवेकानंद और वेदों का ज्ञान – यही है भारत का सन्मान”, “वेदों का ज्ञान कब देंगे?”, “हिन्दू स्कूल में विधर्मी शिक्षक क्यूं?”, “बच्चों को ज्ञान की जगह इस्लामिक ज्ञान क्यूं?”.

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अहमदाबाद के ज़िला शिक्षण अधिकारी आर एम चौधरी ने स्कूल को शो कॉज़ नोटिस जारी किया और कैन्टीन और कथित किताबों के मामले में कारवाई करने को कहा. जारी नोटिस में से एक में शिकायत के मुताबिक लिखा है कि स्कूल बच्चों को एक खास तरह की किताब पढ़ने के लिए मज़बूर करती थी. वहीं कैन्टीन विवाद पर जारी नोटिस में शिक्षण विभाग की ओर से खाने की गुणवत्ता के लिए स्कूल की ओर से क्या प्रबंध किये गए थे, कैन्टीन चलाने वाली एजेंसी की जानकारी और स्कूल को घटना की जानकारी मिलने के बाद क्या कारवाई की गई, इन मुद्दों पर स्कूल की ओर से प्रतिक्रिया मांगी गई.

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ज़िला शिक्षा कार्यालय (DEO) में संपर्क करने पर ऑल्ट न्यूज़ को बताया गया कि स्कूल ने कथित रूप से इन किताबों के लिए छात्रों के माता-पिता से एक्स्ट्रा पैसे चार्ज किए थे. ऑल्ट न्यूज़ इस मामले में ज़िला शिक्षा कार्यालय को मिली लिखित शिकायत की कॉपी भी मांगी थी. हालांकि, DEO की ओर से हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली.

ये किताबें स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं: स्कूल

स्कूल की ओर से मामले में जवाबी कार्रवाई करते हुए कैन्टीन संचालक को बर्खास्त किया गया. वहीं कथित दोनों किताबों को भी लाइब्रेरी से हटा दिया और स्कूल के सुपरवाइज़र मुंजा सैम्स को भी निलंबित किया गया था.

स्कूल के एक टीचर से कथित मामले में सवाल-जवाब किये जाने का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें एक शख्स कथित तौर पर टीचर पर आरोप लगा रहा है कि उन्होंने खाने में से मिले कथित कांच के टुकड़े को गुमा दिया था.

ऑल्ट न्यूज़ ने इस मामले में आनंद निकेतन स्कूल से भी कान्टैक्ट किया. स्कूल के प्रवक्ता की ओर से हमें बताया गया – “हाल ही में कैन्टीन के खाने से मिले कथित कांच के टुकड़े को लेकर स्कूल ने कार्रवाई करते हुए कैन्टीन के संचालक को बर्खास्त कर दिया. फिलहाल कैन्टीन बंद है. स्कूल में खाना कैन्टीन में ही तैयार किया जाता था. लेकिन हाल की घटना के बाद सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए कैन्टीन में बदलाव किये जा रहे हैं, ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो.”

ऑल्ट न्यूज़ ने “आई एम मलाला” और “द डायरी ऑफ़ अ यंग गर्ल” किताब को लेकर सवाल किये जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए हमें बताया गया कि ये दोनों किताबें स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थी. इन्हें स्कूल के बुक क्लब की ओर से लिस्ट में ऐड किया गया था. उन्होंने हमें बताया कि “इन दोनों किताबों के अलावा वीर सावरकर, दलाई लामा की किताब भी लाइब्रेरी में मौजूद है. वहीं शिक्षण अधिकारी की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद दोनों किताब को फिलहाल हटा दिया है.”

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ऑल्ट न्यूज़ ने ज़िला शिक्षा कार्यालय की ओर से लगाए गए आरोप को लेकर भी सवाल किया था जिसमें ‘स्कूल ने दोनों किताबों के लिए स्टूडेंट्स से एक्स्ट्रा पैसे मांगे थे’. हालांकि, स्कूल के प्रवक्ता की ओर से हमें बताया गया कि स्कूल ने लाइब्रेरी की किताबों के लिए अधिक फ़ी चार्ज नहीं की थी. स्कूल ने इम्प्रेस्ट फीस के तौर पर निर्धारित रकम स्टूडेंट्स के माता-पिता को चार्ज की थी.” बता दें कि ये खर्च Fee Regulatory Committee (FRC) के दायरे में है जिसमें छात्रों के रोज़मरा के खर्च, स्टेशनरी, लैब सामग्री, गतिविधियां या शैक्षणिक यात्राओं का खर्च वसूला जाता है.

वहीं, लोकल न्यूज़ आउट्लेट जमावट से बात करते हुए स्कूल के 2 शिक्षकों ने जानकारी दी कि “कथित रूप से सब्ज़ी में कांच या फाइबर जैसे टुकड़े को निगल जाने के कारण बच्चे ने पेट में दर्द उठने की शिकायत की थी. इसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया.”

बातचित के दौरान, किताबों के मुद्दे पर टीचर ने कहा, “स्कूल में बुक क्लब चलाई जाती है जिसमें टीचर्स की एक कमिटी बनती है जो कि किताबों को उम्र के हिसाब से रीडिंग लिस्ट के लिए मंज़ूरी देते हैं, कंटेन्ट को रिव्यू करते हैं. स्कूल की ओर से ये नहीं था कि सिर्फ मलाला की किताब को ही लिस्ट में रखा जाए, बुक क्लब की लिस्ट में विवेकानंद, श्री राधाकृष्ण, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, रानी लक्ष्मीबाई की किताब भी शामिल की जाती है. स्कूल किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं देता है, बल्कि मानवता को बढ़ावा देते हैं और बच्चों को भी यही सिखाते हैं”. उन्होंने बताया कि “बच्चों को आलोचनात्मक सोचना सिखाया जाता है और साथ ही दूसरों की राय का सम्मान करना भी.”

आनंद निकेतन स्कूल के इंस्टाग्राम अकाउंट ने 14 अगस्त को स्कूल में पढ़नेवाले बच्चों के माता-पिता की ओर से भेजे गए ईमेल्स के स्क्रीनशॉर्ट्स शेयर किये थे. ऑनलाइन रूप से पेरेंट्स कम्यूनिटी ने स्कूल का समर्थन किया था. हालांकि, ज्यादातर लोगों ने कैन्टीन विवाद पर चिंता जताई और कैन्टीन को लेकर कुछ सुझाव भी दिए थे. वहीं किताबों के विवाद मुद्दे पर ज्यादातर माता-पिता ने स्कूल का समर्थन किया और इन किताबों को छात्रों के विकास के लिए अहम बताया.

‘शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक’

27 अगस्त की रीडिंग सेशन के दौरान हुई हिंसा की घटना से पहले भी स्टूडेंट्स एंड कलेक्टिव ग्रुप ने आनंद निकेतन स्कूल मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया जारी की थी. स्टेटमेंट के अनुसार, इसे गुजरात और भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया गया.

उनका कहना है कि स्कूल केवल पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोच, चर्चा और स्वस्थ बहस की जगह भी होनी चाहिए. और इसके लिए आलोचनात्मक किताबों का छात्रों तक पहुंच जरूरी है.

विवादित दोनों किताबों में से एक किताब मलाला यूसुफजई की आत्मकथा थी जो लड़कियों की शिक्षा और अधिकारों के संघर्ष को सामने लाती है. वहीं दूसरी किताब ऐन फ्रैंक की डायरी थी जो नाज़ी शासन और होलोकॉस्ट के दौर की घटनाएं सामने रखती है. इन किताबों को “आपत्तिजनक’ मानने के बजाय, उन्हें छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए.