सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें कुछ व्यक्ति हाथापाई करते हुए दिखते हैं. आगे, वीडियो में अचानक से विस्फोट होता है. ये वीडियो सांप्रदायिक ऐंगल के साथ शेयर किया जा रहा है. वीडियो के साथ शेयर किये जा रहे मेसेज में ‘अशांतिदूत की औलाद’ लिखा है. सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय पर निशाना साधने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है.

ट्विटर यूज़र सुजीत सिंह गहलोत ने ये वीडियो ट्वीट किया. आर्टिकल लिखे जाने तक इस वीडियो को लगभग 3 हज़ार बार देखा गया. (आर्काइव लिंक)

ट्विटर पर ये वीडियो वायरल है.

फ़ेसबुक पर भी इसे शेयर किया गया है.

 

क्या मानव बम देखा है कभी??
शायद नहीं, तो अधर्म की शिक्षा पाए अशान्तिदूत की औलाद समाज के दुश्मन आतंकी को देखिए।
पकडने की कोशिश की गयी तो ..

Posted by Diksha Kaushik on Tuesday, 28 September 2021

फ़ैक्ट-चेक

वीडियो के फ़्रेम्स का रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें अलताज न्यूज़ का 23 सितंबर 2021 का आर्टिकल मिला. आर्टिकल में ये वीडियो भी शेयर किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना सीरिया के टार्टस शहर में हुई थी.

23 सितंबर की स्काइ न्यूज़ अरेबिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला एक पारिवारिक विवाद का था जिसमें एक व्यक्ति ने टार्टस के जस्टिस पैलेस के गेट के बाहर बम धमाका किया था. रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ लोग एक वकील के साथ बहस कर रहे थे. इस दौरान, उस वकील के साले ने, जो बम लेकर आया था, बहस के दौरान हैंड ग्रेनेड का सेफ़्टी वॉल्व खोल दिया था. इस धमाके में वकील और उसके साले की मौत हो गई थी. MSN अरेबिया ने भी स्काइ न्यूज़ अरेबिया के आर्टिकल को रीपब्लिश किया था.

बीबीसी ने भी इस घटना के बारे में बताते हुए एक वीडियो रिपोर्ट शेयर की थी. 24 सितंबर की इस रिपोर्ट में बताया गया था कि इस बम धमाके में 3 लोगों की मौत हुई थी.

कुल मिलाकर, सीरिया में पारिवारिक विवाद के चलते एक व्यक्ति ने विस्फोट किया था. इसका वीडियो भारतीय सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक ऐंगल के साथ शेयर किया गया.


दिल्ली में 4 साल की बच्ची से रेप के आरोपी को सोशल मीडिया पर AAP से जुड़ा हुआ बताया गया :

ग़लत
दावा:
मानव बम विस्फोट के पीछे आतंकियों का हाथ

यह सामग्री तथ्यात्मक रूप से गलत या गढ़ी हुई है.

हमारी कार्यप्रणाली पढ़ें