क्या पाकिस्तान में हिंदुओं पर पुलिस ने हमला किया? झूठे दावे से 2013 का वीडियो वायरल

फेसबुक पेज भा.ज.पा. : मिशन 2019 ने 2 जनवरी को ‘पाकिस्तान में हिन्दुओ का हाल’ शीर्षक से एक वीडियो पोस्ट किया। इसका कैप्शन दिया गया- ‘इस विडियो को देखने के बाद आपकी भी आँखे भर जायेगी, हो सके तो कुछ और लोगो को जगा देना।’ इस लेख के लिखे जाने तक इस वीडियो को 15 लाख बार देखा और लगभग 45,000 बार शेयर किया गया है।

पाकिस्तान में हिन्दुओ का हाल

इस विडियो को देखने के बाद आपकी भी आँखे भर जायेगी ,हो सके तो कुछ और लोगो को जगा देना

Posted by भा.ज.पा : Mission 2019 on Wednesday, 2 January 2019

3:19 मिनट के इस वीडियो में पुलिस को लोगों के घरों में जबरन घुसते और लाठियों से उनकी पिटाई करते हुए दिखाया गया है। महिलाओं को रोते-बिलखते सुना जा सकता है जबकि परिवार के पुरुषों को पकड़ कर ले जाया जाता है। वीडियो में बाद के कुछ हिस्सों में लोगों पर और हिंसा होते दिखलाया गया है। कुछ अन्य फेसबुक पेजों (नरेंद्र मोदी पीएम 2019 और बजरंग दल – चौमूं नगर) ने भी दावा किया कि इस घटना ने पाकिस्तान में हिंदुओं के प्रति व्यवहार का चित्रण किया है।

ट्विटर यूजर दिनेश जोशी, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी और रेल मंत्री पीयूष गोयल के कार्यालय का ट्विटर अकाउंट फॉलो करते हैं, ने जनवरी 2018 में वह वीडियो ट्वीट किया था। उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान में एक हिंदू को अपने घर पर भगवा झंडा फहराने के कारण पीटा गया था।

पिछले साल जनवरी में इसी संदेश के साथ तेलुगु में भी यह वीडियो वायरल हुआ था।

2013 का वीडियो; हिंदुओं पर अत्याचार का चित्रण नहीं

इस वीडियो को इनविड (InVid) सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके कई फ़्रेमों में तोड़ने और इनमें से एक फ़्रेम की गूगल रिवर्स सर्च करने पर हम कई तथ्य-जांच रिपोर्टों तक पहुंचे। बीबीसी, बूमलाइव और होक्स और फैक्ट (Hoax or Fact) पहले भी इस वीडियो को खारिज कर चुके हैं।

बीबीसी ने इस्लामाबाद के अपने एक संवाददाता से बात की, जिसने बताया कि यह वीडियो पाकिस्तान में हिंदुओं को पीटे जाने को चित्रित नहीं करता है। यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद में 2013 में हुई एक घटना से संबंधित है।

पाकिस्तानी मीडिया Dunya News, Geo TV और The Express Tribune ने उस घटना की रिपोर्ट की थी जिसमें पाकिस्तान के ‘एलीट फोर्सेस’ के कर्मियों द्वारा नागरिकों को पीटा गया था।

दुनिया न्यूज़ के अनुसार, “… फैसलाबाद में बिजली जाने के खिलाफ प्रदर्शन के बाद , पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के घरों में प्रवेश किया और उनकी महिलाओं को बंधक बना लिया।”

बीबीसी इस्लामाबाद के संवाददाता उमर दराज़ ने बताया कि फैसलाबाद में बिजली की कमी रहती ही है, लेकिन 2013 में स्थिति विकट हो गई थी। दिन में 14-16 घंटे तक बिजली गुल होने की शिकायत के बाद लोग विरोध में सड़कों पर उतर आए थे।

द एक्प्रेस ट्रिब्यून की जून 2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार, “वे अंतिम उपाय के तौर पर पत्थर फेंक रहे थे और एक फेस्को (FESCO) कार्यालय को भी जला दिया था, जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की थी।” मुस्लिम परिवारों पर पुलिस की बर्बरता के बाद तीन पुलिस कर्मियों बाबर मसीह, तौसीफ अहमद, आबिद हुसैन को निलंबित कर दिया गया।

इस प्रकार, पाकिस्तान में हिंदुओं की पिटाई’ के रूप में वायरल यह वीडियो, असल में पाकिस्तान के प्रदर्शनकारी नागरिकों पर ‘एलीट फोर्सेज’ की बर्बरता का वीडियो था।

संतोष श्रीवास्तव – वीडियो को प्रसारित करने वाला व्यक्ति

यदि कोई गौर से देखे, तो कई फेसबुक पेजों द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में एक स्टाम्प है (नीचे तस्वीर में देखें)।

फेसबुक पेज भा.ज.पा.: मिशन 2019 से स्क्रॉल करते हुए हमने पाया कि इसके कई पोस्टों में उसी स्टाम्प का उपयोग किया गया है। उनमें से एक  स्टाम्प में नाम था – ‘संतोष श्रीवास्तव’। इस नाम ने हमें वीडियो बनाने वाले के फेसबुक प्रोफाइल तक पहुंचा दिया।

श्रीवास्तव ढेरों फेसबुक पेजों से जुड़े हैं, जो भ्रामक सूचना और भाजपा-समर्थक प्रचार नियमित प्रसारित करते हैं। उनके सबसे लोकप्रिय पेजों में से एक – ‘बार-बार मोदी सरकार – Modi Forever ‘ – के 37 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। कुछ अन्य पेज और ग्रुप, जिनसे वे जुड़े हैं, वे हैं – WE SUPPORT PM MODI (20+ लाख सदस्य), NAMO (45+ लाख फॉलोअर्स), I Support Yogi (8+ लाख सदस्य), I M With Namo (20+ लाख फॉलोअर्स) ) और Youth 4 UP (13+ लाख फॉलोअर्स)।

‘पाकिस्तान में हिंदुओं की पिटाई’ वाला वीडियो विभिन्न संदेशों के साथ 2014 से ही वायरल

एक घटना, जिसमें पाकिस्तानी एलीट फोर्सेज ने अपने ही लोगों पर बर्बरता की थी, उसे उस देश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर पुलिस की बर्बरता बताने का प्रयास करते हुए, हाल में भारतीय सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।

संतोष श्रीवास्तव द्वारा प्रचारित यह दावा इंटरनेट की दुनिया में फैली कोई पहली झूठी कहानी नहीं थी। यह वीडियो अन्य देशों में भी विभिन्न विकृत तथ्यों के साथ फैलता रहा है। 2014 में एक फ़ारसी वेबसाइट ‘शिया न्यूज़ एसोसिएशन’ ने दावा किया कि यह अफ़गान शरणार्थियों पर पाकिस्तानी पुलिस की बर्बरता को दर्शाता है।

2015 में, इस वीडियो को इस दावे के साथ प्रसारित किया गया था कि यह ईसाइयों पर पाकिस्तानी पुलिस की क्रूरता को चित्रित करता है। यूट्यूब हैंडल ‘पीस वर्ल्डवाइड‘ (Peace Worldwide) से, इसे 95,000 से अधिक बार देखा गया। यूरोप के एक ट्विटर यूजर जिन्हें रेल मंत्री पीयूष गोयल का कार्यालय भी फॉलो करता है, ने भी ऐसे ही ‘क्रिश्चियन-संदेश’ के साथ इस वीडियो को 2017 में शेयर किया था।

सोशल मीडिया में प्रसारित उत्तेजक दावे अक्सर ही विघटनकारी सूचनाओं से भरे होते हैं। इसलिए, यही उचित है कि सोशल मीडिया यूजर इन संदेशों पर आंख मूंदकर भरोसा करने की बजाय बुनियादी तथ्य-जांच जरूर करें।

योगदान करें!!
सत्ता को आइना दिखाने वाली पत्रकारिता जो कॉरपोरेट और राजनीति के नियंत्रण से मुक्त भी हो, वो तभी संभव है जब जनता भी हाथ बटाए. फेक न्यूज़ और गलत जानकारी के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद कीजिये. डोनेट करिये.

Donate Now

तत्काल दान करने के लिए, ऊपर "Donate Now" बटन पर क्लिक करें। बैंक ट्रांसफर / चेक / डीडी के माध्यम से दान के बारे में जानकारी के लिए, यहां क्लिक करें

Send this to a friend