17 जनवरी को कर्नाटक भाजपा ने 2009 और 2019 की तुलना करते हुए, केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए सकारात्मक बदलावों का चित्रण करने के लिए तस्वीरों का एक कोलाज ट्वीट किया। विकासोन्मुख शासन के रूप में अपनी छवि स्थापित करने के प्रयास में, पार्टी ने इन तस्वीरों को, इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड 10yearschallenge से जोड़ने के लिए #10YEARCALLENGE के साथ ट्वीट किया। इसमें ‘Challenge’ की वर्तनी गलत ‘Callenge’ थी।

मैसूर के भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा उन कुछ सोशल मीडिया यूजर्स में हैं, जिन्होंने यह तस्वीर शेयर की है।

दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट की गई इस तस्वीर पर फेसबुक पेज ‘नेशन विद नमो’ (Nation with NaMo) का लोगो लगा है। नेशन विथ नमो के इस पोस्ट को 3000 से ज्यादा बार शेयर किया किया गया है। एक अन्य फेसबुक पेज भारत पॉजिटिव (Bharat Positive) ने भी यह तस्वीर शेयर की है।

तथ्य-जांच

ऑल्ट न्यूज़ ने गूगल रिवर्स इमेज सर्च और यांडेक्स (Yandex) इमेज सर्च जैसे टूल्स का उपयोग करके पहले के उदाहरणों का पता लगाया जब इन तस्वीरों को इंटरनेट पर पहली बार शेयर किया गया था।

पहला सेट

बायीं ओर की तस्वीर, एक डाक्यूमेंट्री “शौचालय के बिना असुरक्षित” (Vulnerable without a toilet) के दौरान ली गई तस्वीर है। इस डाक्यूमेंट्री को — कहानी के माध्यम से वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले वैश्विक प्रयास ‘वीडियो वॉलंटियर्स’ (Video Volunteers) द्वारा — 23 मई 2014 को अपलोड किया गया था। यूपी के वाराणसी जिलान्तर्गत एक गांव में बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की कमी पर आधारित डाक्यूमेंट्री में दी गई यह तस्वीर, 2009 की थी। इसी प्रकार, दाहिनी ओर दी गई तस्वीर को ‘द मिंट’ द्वारा एक लेख में 11 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित किया गया था। विडंबना है कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत मुफ्त शौचालय योजना की सफलता स्थापित करने के लिए भाजपा सरकार द्वारा प्रदर्शित तस्वीर का असली कैप्शन था — “इरुनगट्टूकोट्टई गांव में ‘ह्युंडई’ द्वारा निर्मित शौचालय का उपयोग करती महिला – (अनुवादित)“। लेख में बताया गया था कि ह्युंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने इस गांव में बिना स्वच्छता सुविधा वाले प्रत्येक 205 घरों पर एक शौचालय बनाने का काम लिया है।

 

दूसरा सेट

बायीं ओर वाली तस्वीर कई लेखों में इस्तेमाल की जा चुकी एक प्रातिनिधिक तस्वीर है। ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि इस तस्वीर का उपयोग‘ग्रीन ड्रिंक्स सिंगापुर’ (Green Drinks Singapore) नामक एक वेबसाइट द्वारा 7 अगस्त 2012 को प्रकाशित एक लेख में किया गया था। इस वेबसाइट ने इस तस्वीर का श्रेय 2010 में शुरू किए गए गैर-लाभकारी संगठन ‘ग्लोबल एलायंस फ़ॉर क्लीन कूकस्टोव्स’ (Global Alliance For Clean Cookstoves) को दिया था। इसी प्रकार, दाहिनी तरफ वाली तस्वीर ‘डाउन टू अर्थ’ (Down to Earth) द्वारा 2018 में प्रकाशित एक लेख में थी। उस लेख में बताया गया था कि स्वालिया बीवी जो उज्ज्वला योजना की 2-करोड़वीं लाभार्थी बनी थीं, वह एलपीजी सिलेंडर लेने में असमर्थ हैं। इस प्रकार, जो तस्वीर योजना की रुकावटों का चित्रण करती है, उसका, विडंबनापूर्वक, योजना के फायदे का प्रदर्शन करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

तीसरा सेट


बायीं ओर एक प्रातिनिधिक तस्वीर है जिसका विभिन्न लेखों और ब्लॉगों में बिजली की कमी को चित्रित करने के लिए उपयोग किया जा चुका है। हमने 10 जनवरी 2011 को प्रकाशित एक ब्लॉग पोस्ट देखा, जिसमें इस तस्वीर का कैप्शन दिया गया था — “बिहार के तहीपुर (Tahipur) गांव में पढ़ने के लिए किरासन-लालटेन का उपयोग करते विद्यार्थी” – (अनुवादित)। गैर-सरकारी संगठन ग्रीनपीस को इसका श्रेय दिया गया था। इसके अलावा, दाहिनी ओर की तस्वीर हमें फरवरी 2010 जितनी पुरानी मिली। ‘द मिंट‘ के एक फोटोग्राफर द्वारा लिए गए इस ‘गेट्टी इमेज’का कैप्शन था – “करनाल, भारत के बाज़ीदा जत्तन (Bazida Zattan) गांव में बिजली, 24 फरवरी 2010 को ली गई तस्वीर” – (अनुवादित)। इस दावे की तथ्य-जांच ‘द प्रिंट’ द्वारा पहले की गई थी।

निष्कर्ष यह निकलता है कि भाजपा शासनकाल में पूरे हुए विकास का प्रदर्शन करने के लिए, यूपीए शासनकाल से संबंधित कई तस्वीरों का उपयोग किया गया। कांग्रेस शासनकाल की कम से कम दो तस्वीरें भाजपा द्वारा उनकी उपलब्धियों के रूप में चलाई गईं। पहले भी, बिहार भाजपा ने 2009 की तस्वीर, पिछले पांच वर्ष में हुए तेज विकास का दावा करते हुए ट्वीट किया था।

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About the Author

Jignesh is a writer and researcher at Alt News. He has a knack for visual investigation with a major interest in fact-checking videos and images. He has completed his Masters in Journalism from Gujarat University.