“दिन में केवल दो बार भोजन से मोटापा और मधुमेह से छुटकारा” के डॉ दीक्षित के दावों की पड़ताल

20 नवंबर 2018 को, टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक लेख प्रकाशित किया। शीर्षक था “Two-meals-a-day’ professor to drive diabetes fight” – “दिन में दो बार भोजन” प्रोफेसर की मधुमेह से जंग”, लेख में डॉ जगन्नाथ दीक्षित के हवाले से कहा गया था कि,

“यदि कोई दिन में दो बार भोजन की डाइट का अभ्यास करता है, तो मुझे यकीन है कि इससे न केवल वजन कम होगा, बल्कि यह मधुमेह को नियंत्रित करने में भी मदद करेगा। मधुमेह से छुटकारा पाना भी संभव है।” (अनुवादित)

डॉ दीक्षित को महाराष्ट्र सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा मोटापे और मधुमेह से निपटने के लिए ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया था। भाजपा नेता गिरीश महाजन, जो चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख हैं, ने कहा कि डॉ दीक्षित को ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करने का कारण यह था कि उनकी ‘आहार योजना’ से मोटापे और मधुमेह से निपटने के परिणाम मिल रहे है।’

डॉ दीक्षित ने दिन में दो बार भोजन की इस धारणा को यूट्यूब पर कई वीडियो के जरिये खूब लोकप्रिय बनाया है, जिसमें सबसे लोकप्रिय वीडियो को 16 लाख लोग देख चुके है। यूट्यूब के साथ-साथ सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से भी ये दावे वायरल हुऐ है।

डॉ दीक्षित का दावा है कि दिन में केवल 2 बार भोजन करने से, जिसमें प्रत्येक आहार को 55 मिनट से कम समय में खाने से 3 महीने में लगभग 8 किलो तक वजन कम हो जाता है। डॉ दीक्षित के अनुसार, भोजन करने की फ्रीक्वेंसी को कम करने, भोजन की मात्रा या गुणवत्ता की परवाह किए बिना, इंसुलिन के स्तर पर प्रभाव पर सकता है।

नीचे दिए गए अपने मराठी वीडियो में, उन्होंने यह भी दावा किया है कि यह विधि शुरूआती मधुमेह स्थितियों को संभावित रूप से उलट सकती है।

 

इस लेख में, हम चर्चा करेंगे:

  • मोटापा और मधुमेह के बीच की कड़ी
  • मधुमेह के रोगियों से वजन कम करने का सुझाव
  • डॉ दीक्षित का “दिन में दो बार भोजन” से संबंधित सिद्धांत
  • क्या ये दावे डॉ दीक्षित के मौजूदा शोध पर आधारित हैं
  • निष्कर्ष और गलत सूचना के खतरे

 

मोटापा और मधुमेह के बीच क्या संबंध है?

 

मधुमेह और मोटापा भारत में सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों के रूप में उभरा है। भोजन द्वारा अधिक कैलोरी का सेवन जो व्यायाम से भी ना घटे, बाद में अत्यधिक वसा के रूप में परिवर्तित हो जाता है जिससे मोटापा हो सकता है।

मोटापे के कारण इन्सुलिन को अवरोध उत्पन्न होता है, जिसके कारण इन्सुलिन सही तरह काम नही कर पाता और रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है, जिसे डायबिटीज कहा जाता है।

इंसुलिन प्रतिरोध टाइप 2 मधुमेह का प्राथमिक कारण है और यह मनुष्यों में टाइप 2 मधुमेह आने से पहले भी होता था। भोजन सेवन, व्यायाम और अन्य जीवन शैली कारकों के अलावा, आनुवंशिकी मोटापे मधुमेह के जोखिम को निर्धारित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते है।

90% से अधिक मधुमेह रोगी टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस नामक श्रेणी में आते हैं, जबकि डायबिटीज के कई अन्य प्रकार भी हैं जैसे कि टाइप 1 विभिन्न पैथोफिजियोलॉजिकल तंत्र के साथ।

 

मधुमेह के रोगियों में वजन घटाने के लिए मानक सुझाव हैं:

  • कैलोरी को बढ़ने से रोकना ,
  • छोटे अंतराल पर भोजन,
  • नियमित व्यायाम, और
  • एंटी-हाइपरग्लाइकेमिक (Anti-hyperglycaemic) दवाओं को मधुमेह विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निर्धारित किया जा जाता है, ताकि बेसल रक्त शर्करा (basal blood glucose) को बनाए रखा जा सके।

मधुमेह के रोगियों में ब्लड ग्लूकोज़ में बड़े तेजी से परिवर्तन खतरनाक हो सकते हैं और रोगियों को अपने आहार की आवृत्ति, गुणवत्ता और मात्रा को नियंत्रित करके भोजन में सर्वोत्तम ग्लूकोज (optimal glucose) लेवल बनाए रखना चाहिए।

ये सिफारिशें यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण randomised controlled trials (RCT) और मेटा-विश्लेषण (meta-analyses) से प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित हैं, अर्थात् नमूना आकार (रोगी संख्या) बढ़ाने के लिए कई आरसीटी का सामूहिक मूल्यांकन।

 

क्या दिन में दो बार भोजन ‘सिद्धांत इंसुलिन के संबंध में प्रभावी है? हमने डॉ दीक्षित के दावों की जाँच की:

 

दावा 1: इंसुलिन की दूसरी सीमा से बचने के लिए भोजन का सेवन 55 मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए

डॉ दीक्षित का तर्क है कि यदि कोई 55 मिनट से अधिक समय तक भोजन करता है, तो समान मात्रा में इंसुलिन का एक दूसरा बाउट जारी हो जाता है।

कम मात्रा में निरंतर इंसुलिन रिलीज के अलावा, स्वस्थ मनुष्यों में इंसुलिन ज्यादा मात्रा में दो चरणों में रिलीज होता है। चरण 1- भोजन शुरू करने के तुरंत बाद और, चरण II – भोजन खाने के लगभग 45 से 60 मिनट बाद। भोजन की गुणवत्ता के अनुपात में कोई भी भोजन इंसुलिन को दो चरणों में रिलीज करेगा।

हालांकि, टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में, इंसुलिन रिलीज का पहला चरण ख़राब होने की वजह से जो भोजन के बाद ग्लूकोज को प्रोसेस करने में असमर्थता पैदा करता है, जिसके कारण पोस्टपैंडियल हाइपरग्लाइकेमिया (postprandial hyperglycaemia) होता है।

चूंकि, इंसुलिन रिलीज की मात्रा भोजन के सेवन के साथ बदलता रहता है, इसलिए यह दावा करना गलत है कि भोजन के सेवन का समय 55 मिनट तक सीमित करने से चरण -2 का इंसुलिन रिलीज बंद हो सकता है।

दावा 2: भोजन की मात्रा और गुणवत्ता इंसुलिन रिलीज के लिए अप्रासंगिक है

डॉ दीक्षित का दावा है कि भोजन की मात्रा और गुणवत्ता जो भी हो, हर भोजन के बाद इंसुलिन की एक निश्चित मात्रा ही रिलीज़ होती है। अपने अंग्रेजी वीडियो में, उन्होंने यह भी विस्तार से बताया कि यदि मधुमेह के रोगी दिन में दो बार भोजन का नियमित पालन करते हैं तो उन्हें मिठाई खाने की अनुमति भी दी जा सकती है।

इसके विपरीत, कई प्रकाशित अध्ययनों में ये बताया गया है कि भोजन की मात्रा के अनुपात के हिसाब से इंसुलिन प्रतिक्रिया करता है और भोजन में कार्बोहाइड्रेट कंटेंट के साथ इसका सहसंबद्ध है। भोजन की ज्यादा मात्रा से ज्यादा इंसुलिन रिलीज़ होता है।

फ़ूड इंसुलिन इंडेक्स (FII), किसी भोजन के बाद इंसुलिन रिलीज़ की मात्रा जैसे रोटी के संदर्भ में या विभिन्न प्रकार के भोजन के संदर्भ में अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन (American Journal of Clinical Nutrition) में अध्ययन और प्रकाशित किया गया है। अध्ययन से पता चला है कि, जब स्वस्थ लोगों में एक ही ऊर्जा सामग्री के साथ 13 विभिन्न भोजनों का सेवन करके इंसुलिन का स्तर मापा तो यह घटक खाद्य पदार्थों के FII द्वारा अनुमानित इंसुलिन की मांग के साथ इसका सहसंबद्ध था।

इसका मतलब है कि, मात्रा और गुणवत्ता दोनों, रिलीज़ हुए इंसुलिन की मात्रा पर भारी प्रभाव डालती है, जो दूसरे और सबसे खतरनाक दावे को पूरी तरह नकारती है।

दावा 3: दिन में कभी भी दो बार भोजन, वजन भी कम करता है और संभवतः मधुमेह को भी नियंत्रित कर सकता है

डॉ दीक्षित ने अपने लोकप्रिय वीडियो में यह सुझाव दिया कि दिन में कभी भी दो बार भोजन करने से, यहाँ तक कि रात को 9 बजे तक भी भोजन कर लेने से , मोटापे और मधुमेह में मदद मिलती है। हमने डॉ दीक्षित के बयानों को समझने और जांचने के लिए दो विरोधाभासी अध्ययनों की जांच की।

2014 में प्रकाशित एक अध्ययन Diabetologia में 27, टाइप -2 मधुमेह रोगियों के समूह के साथ इसका परीक्षण किया कि दिन में 2 बार ज्यादा भोजन की तुलना (जिसका सेवन दोपहर का भोजन और नाश्ता में किया गया था) बनाम दिन भर में 6 थोड़े भोजन से किया, इससे निष्कर्ष निकाला कि लोगो के शरीर के वजन और तेजी से बढ़ते प्लाज्मा ग्लूकोज में काफी अंतर था।

हालांकि, ‘डायबिटीज केयर‘ (Diabetes Care) पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दिन में दो बार भोजन से काफी अधिक इंसुलिन प्रतिक्रिया मिलती है अगर हम उसकी तुलना दिन कई बार भोजन करे तो । 12 मधुमेह रोगियों में, दिन में दो बार अधिक भोजन से ग्लूकोज में वृद्धि और अधिक इंसुलिन रिलीज़ पायी गयी, 6 बार काम भोजन करने की तुलना में बशर्ते कि दोनो अधिक भोजन की कैलोरी की खपत, 6 छोटे भोजन के समान थी।

इसका मतलब यह है, डॉ दीक्षित एक दिन में दो बार भोजन की योजना का सुझाव देने में पूरी तरह से गलत नहीं हैं। हालांकि, यह सुझाव देना कि दो बार भोजन के समय, मोटापा और मधुमेह के लिए अप्रासंगिक है, तथ्यात्मक रूप से गलत है।

इसके अलावा, कई विश्वसनीय पत्रिकाओं में इसके अधिक प्रमाण हैं जो यह बताता है कि यदि भोजन के कुल घटक समान कैलोरी के हैं, यानी iso-caloric diets, तो थोड़ा -नियमित भोजन मोटापे और मधुमेह के लिए बेहतर हैं, दिन में दो बार अधिक भोजन करना।

 

हमने जांच की, क्या डॉ दीक्षित ने अपने दावे की पुष्टि के लिए अपने किसी शोध को प्रकाशित किया है?

 

हमने भाजपा नेता, श्री गिरीश महाजन के किए गए दावों पर एक वैज्ञानिक साहित्य समीक्षा (scientific literature review ) की और डॉ दीक्षित द्वारा Google, Google scholar और PUBMED का उपयोग करके। इन सभी साइट्स पर हम उनके नाम से मोटापे या मधुमेह के क्षेत्र में किया कोई शोध नहीं मिला।

हालाँकि, डॉ दीक्षित के भाषणों से, हमें गैर-अनुक्रमित पत्रिका (non-indexed journal) में प्रकाशित दो लेख मिले, जिन्हें इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल ट्रायल (International Journal of Clinical Trials) कहा गया है।

अध्ययन 1: इस अध्ययन का बहुत कम वैज्ञानिक मूल्य है क्योंकि शोधकर्ता द्वारा वजन और कमर के आकार जैसे मापदंडों को कैलिब्रेटेड उपकरण से नहीं मापा था जिससे इसकी सटीकता नहीं पता चलती, इसके बजाय रोगी से फोन (self-reported) पे रिपोर्ट ले ली गयी थी।

अध्ययन 2: यह शुरुआती-मधुमेह (pre-diabetic) रोगियों के 48 आकार के नमूने का एक निवारक अध्ययन (preventive study) था। परिणामों से पता चला कि HbA1C, (समस्त ग्लाइसेमिक लोड को मापने का एक पैरामीटर -a parameter to measure overall glycemic load) 3 महीने के उपचार के बाद 0.8% तक कम हो गया। इस अध्ययन में, शुरुआती-मधुमेह(pre-diabetic) के रोगियों में एक दिन में दो बार भोजन के अलावा, सप्ताह में 5 दिन 45 मिनट की फुर्तीली वॉक (brisk walk) करने की सलाह दी गई थी।

हालांकि, 20 बेतरतीब नियंत्रण परीक्षणों के एक और मेटा-विश्लेषण (meta-analysis) अध्ययन से पता चला है कि HbA1C (अधिकतम 0.78%) अकेले नियमित व्यायाम से कम हो सकता है।

 

निष्कर्ष:

  • भोजन के समय को 55 मिनट तक सीमित रखने के दावे की पुष्टि करने वाला कोई भी प्रकाशित शोध हमें नहीं मिला, परिणामस्वरूप, द्वितीय चरण के इंसुलिन रिलीज के बाद का परिहार।
  • डॉ दीक्षित का किया दावा कि भोजन की गुणवत्ता और मात्रा का इंसुलिन रिलीज़ के साथ कोई संबंध नहीं है, यह तथ्यात्मक रूप से गलत है, और कई प्रकाशित अध्ययनों के माध्यम से स्थापित शारीरिक तथ्यों के विपरीत है।
  • एक अध्ययन के अनुसार, दिन में दो बार भोजन करने से शरीर के वजन और प्लाज्मा ग्लूकोज पर प्रभाव पड़ता था, पर ये देर रात के भोजन में लागु नहीं होता जैसा कि डॉ दीक्षित द्वारा सुझाया गया था। स्थापित साक्ष्य यह सुझाव देता है कि दो बार भोजन के बजाय पूरे दिन में कम कैलोरी के छोटे भोजन का सेवन करना फायदेमंद होता है, इस विषय को रोगियों के एक बड़े समूह शोध के लिए खुला रखना चाहिए।

विशेष रूप से, डॉ दीक्षित ने वीडियो के शुरुआती भाग में एक खतरनाक दावा किया था कि मधुमेह के रोगी जब तक दो वक्त के भोजन की डाइट लेते हैं, तो वो मिठाई का सेवन कर सकते हैं, लेकिन बाद में उन्होंने सुझाव दिया कि इसके बजाय अधिक प्रोटीन लेना बेहतर है।

डॉ दीक्षित मधुमेह और मोटापे से संबंधित एक सोशल मीडिया अभियान से जुड़े हैं। उनके द्वारा किए गए अधिकांश केस स्टडीज और प्रयोग स्व-परीक्षण या स्व-रिपोर्ट किए गए उपायों पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जा सकता है।

इसलिए डॉ दीक्षित का वायरल दावा न केवल गलत है, बल्कि संभावित रूप से शुरुआती मधुमेह और टाइप -2 मधुमेह के रोगियों के लिए हानिकारक है।

1. टाइप 2 मधुमेह वाले मरीज जो ग्लूकोज कम करने वाली दवाओं पर होते हैं, उन्हें हाइपो-ग्लाइकेमिया का बहुत अधिक खतरा होता है, अगर वे डॉक्टर द्वारा सलाह के अनुसार लगातार भोजन ना ले तो उन्हें light-headedness और कंपकंपी हो सकता है।

2. एक ही समय में असीमित भोजन का सेवन करने से अत्यधिक कैलोरी की खपत होती है, खासकर यदि रोगी उच्च कैलोरी वाले भोजन का सेवन करते हैं और इससे वजन भी बढ़ता है।

मधुमेह के लिए दिशानिर्देशों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट देखें: https://www.who.int/diabetes/publications/en/

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